Google Firebase : ऑनलाइन फ्रॉड के बढ़ते मामलों के बीच भारत सरकार ने अब उन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी कार्रवाई तेज कर दी है, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर साइबर अपराधों के लिए किया जा रहा है। इसी कड़ी में सरकार ने Google से उसके Firebase वेब डेवलपमेंट प्लेटफॉर्म पर मौजूद कई संदिग्ध अकाउंट, वेबसाइट और डेटाबेस हटाने को कहा है। अधिकारियों के मुताबिक, इन संसाधनों का इस्तेमाल नकली बैंकिंग वेबसाइट तैयार करने और लोगों की संवेदनशील वित्तीय जानकारी हासिल करने के लिए किया जा रहा था।
I4C ने Google को भेजे कई नोटिस
रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर यानी I4C ने अगस्त में Google को कम से कम तीन नोटिस भेजे थे। इन नोटिस में Firebase पर होस्ट की गई 57 वेबसाइट और डेटाबेस को हटाने का निर्देश दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि इन लिंक का इस्तेमाल कथित तौर पर मैलवेयर फैलाने और लोगों की गोपनीय वित्तीय जानकारी चोरी करने में किया जा रहा था। नोटिस में यह भी कहा गया कि संबंधित लिंक को समय पर नहीं हटाने पर कार्रवाई की जा सकती है।
तीन घंटे में लिंक हटाने का निर्देश
सरकारी नोटिस में Google को कार्रवाई के लिए बेहद कम समय दिया गया था। अधिकारियों के अनुसार, नोटिस मिलने के तीन घंटे के भीतर संबंधित वेबसाइट या लिंक को हटाने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, सरकारी कार्रवाई का मतलब यह नहीं है कि Google या Firebase को इन कथित साइबर अपराधों के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। कार्रवाई का उद्देश्य उन संसाधनों को हटाना है, जिनका इस्तेमाल अपराधी कथित तौर पर धोखाधड़ी के लिए कर रहे थे।
SBI और ICICI के नाम से बनी फर्जी वेबसाइट
जांच के दौरान सामने आए 57 संसाधनों में कम से कम सात Firebase पर तैयार की गई फिशिंग वेबसाइट थीं। इन वेबसाइटों को भारतीय बैंकों की आधिकारिक सेवाओं जैसा दिखाने की कोशिश की गई थी। इनमें SBI, ICICI Bank और Axis Bank जैसे प्रमुख बैंकों के नाम और पहचान का कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया। इन नकली वेबसाइटों के जरिए लोगों से बैंकिंग और वित्तीय जानकारी हासिल करने का प्रयास किया जा रहा था।
क्रेडिट कार्ड और OTP पर थी ठगों की नजर
बाकी वेबसाइट और डेटाबेस कथित तौर पर पीड़ितों से चुराई गई जानकारी जमा करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे। इसमें क्रेडिट कार्ड डिटेल्स, OTP और अन्य संवेदनशील वित्तीय सूचनाएं शामिल थीं। साइबर अपराधी इन जानकारियों का इस्तेमाल आगे वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए कर सकते थे। ऐसे मामलों में नकली वेबसाइट और असली बैंकिंग सेवा के बीच अंतर करना आम यूजर्स के लिए मुश्किल हो जाता है।
Android यूजर्स को मैलवेयर से बनाया निशाना
I4C के 17 अगस्त के नोटिस के अनुसार, साइबर ठग Android यूजर्स को निशाना बनाने के लिए ऐसे मैलवेयर का इस्तेमाल कर रहे थे, जो देखने में बैंकिंग ऐप जैसा प्रतीत होता था। लोगों को नए क्रेडिट कार्ड, रिवॉर्ड या क्रेडिट लिमिट बढ़ाने जैसे आकर्षक ऑफर देकर फंसाया जाता था। इसके बाद उन्हें कथित बैंकिंग ऐप डाउनलोड करने के लिए प्रेरित किया जाता था।
PM-KISAN के नाम पर भी धोखाधड़ी
मैलवेयर आधारित इस अभियान में सरकारी योजनाओं के नाम का भी कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया। एक मामले में PM-KISAN योजना का नाम लेकर लोगों को भुगतान संबंधी लाभ का लालच दिया गया और ऐप डाउनलोड करने को कहा गया। ऐप इंस्टॉल होने के बाद वह डिवाइस में मौजूद दूसरी ऐप्स और संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकता था। चोरी की गई जानकारी को ठगों के नियंत्रण वाले डेटाबेस तक भेजे जाने का भी आरोप है।
भारत में बढ़ रहा साइबर फ्रॉड का खतरा
Firebase से जुड़े इन मामलों के बीच भारत में ऑनलाइन वित्तीय अपराधों को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में भारतीयों को कथित साइबर धोखाधड़ी के कारण करीब 2.4 अरब डॉलर का नुकसान हुआ। इसी बढ़ते खतरे को देखते हुए सरकार और सुरक्षा एजेंसियां डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, बैंकिंग सिस्टम और मैलवेयर नेटवर्क पर निगरानी बढ़ा रही हैं।
Android मैलवेयर को लेकर पहले भी चेतावनी
सरकार ने मार्च में ऐसे खतरनाक Android मैलवेयर को लेकर एडवाइजरी जारी की थी, जिसे साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं ने ‘Android God Mode’ नाम दिया है। इस तरह के मैलवेयर के जरिए साइबर अपराधी किसी डिवाइस पर काफी हद तक नियंत्रण हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं। Google ने भी कहा है कि वह I4C और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर साइबर अपराध से जुड़े मामलों की जांच और आवश्यक कार्रवाई में सहयोग करता है।
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