ITR Filing 2026 : मूल्यांकन वर्ष 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। आयकर विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 20 अगस्त 2026 तक 6.5 करोड़ से अधिक करदाताओं ने अपना ITR दाखिल कर दिया है। इनमें ITR-3 और ITR-4 दाखिल करने वाले करदाताओं की संख्या ही दो करोड़ से अधिक है। ऐसे करदाताओं के लिए अब अंतिम तारीख काफी नजदीक आ गई है, जिनके खातों का टैक्स ऑडिट अनिवार्य नहीं है।
31 अगस्त तक ITR दाखिल करने की सलाह
आयकर विभाग ने गैर-ऑडिट श्रेणी में आने वाले पात्र करदाताओं से 31 अगस्त 2026 तक अपना रिटर्न दाखिल करने की अपील की है। विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस साल बड़ी संख्या में रिटर्न जमा किए जा चुके हैं। करदाताओं को सलाह दी गई है कि वे अंतिम समय का इंतजार न करें, क्योंकि आखिरी दिनों में पोर्टल पर ट्रैफिक बढ़ने से तकनीकी परेशानी या सर्वर संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं।
किन लोगों के लिए लागू है यह डेडलाइन?
31 अगस्त की समयसीमा उन व्यक्तिगत करदाताओं, फ्रीलांसरों, कंसल्टेंट्स और कारोबारियों पर लागू होती है, जिनके खातों का टैक्स ऑडिट जरूरी नहीं है। इसके अलावा छोटे व्यवसाय चलाने वाले लोग, सैलरी के साथ अतिरिक्त आय अर्जित करने वाले करदाता और कुछ प्रिजम्पटिव टैक्स स्कीम के तहत आने वाले व्यक्ति भी इस श्रेणी में शामिल हो सकते हैं। इंट्राडे तथा फ्यूचर एंड ऑप्शंस यानी F&O से आय वाले करदाताओं को भी अपनी पात्रता के अनुसार सही ITR फॉर्म में रिटर्न दाखिल करना चाहिए।
ITR दाखिल करने के बाद ई-वेरिफिकेशन जरूरी
सिर्फ ITR ऑनलाइन जमा करना ही पर्याप्त नहीं है। रिटर्न दाखिल करने के बाद उसका ई-वेरिफिकेशन पूरा करना भी जरूरी है। मौजूदा नियमों के अनुसार, ITR दाखिल करने के बाद निर्धारित अवधि के भीतर इसे सत्यापित करना होता है। ई-वेरिफिकेशन पूरा नहीं होने पर रिटर्न की वैधता प्रभावित हो सकती है। इसलिए करदाताओं को फॉर्म जमा करने के साथ ही सत्यापन प्रक्रिया भी समय पर पूरी करनी चाहिए।
ITR-3 किसके लिए है?
ITR-3 मुख्य रूप से उन व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों यानी HUF के लिए होता है, जिनकी आय व्यापार या पेशे से होती है। जिन करदाताओं के पास बिजनेस या प्रोफेशन से आय है और वे निर्धारित शर्तों के तहत अन्य आय भी रखते हैं, उन्हें अपनी स्थिति के अनुसार ITR-3 की पात्रता जांचनी चाहिए। सही फॉर्म का चुनाव रिटर्न की सही प्रोसेसिंग के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
ITR-4 यानी सुगम का इस्तेमाल कौन करे?
ITR-4, जिसे सुगम भी कहा जाता है, छोटे करदाताओं और कुछ ऐसे पेशेवरों के लिए है, जो निर्धारित शर्तों के तहत प्रिजम्पटिव टैक्सेशन स्कीम का लाभ लेते हैं। धारा 44AD, 44ADA और 44AE से संबंधित पात्र करदाता इस फॉर्म का इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि फॉर्म चुनने से पहले अपनी आय और पात्रता की शर्तों को ध्यान से जांचना जरूरी है।
ITR-5 और ITR-7 किसके लिए हैं?
ITR-5 आम तौर पर फर्म, एलएलपी, एसोसिएशन ऑफ पर्सन्स यानी AOP, बॉडी ऑफ इंडिविजुअल्स यानी BOI और कुछ अन्य संस्थाओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है। वहीं ITR-7 धर्मार्थ या धार्मिक ट्रस्ट, राजनीतिक दल, शोध संस्थानों और कानून में निर्धारित अन्य विशेष संस्थाओं या व्यक्तियों के लिए लागू होता है। इसलिए संस्थाओं को अपनी कानूनी स्थिति के आधार पर ही फॉर्म चुनना चाहिए।
सही फॉर्म चुनने में मिलेगी मदद
अगर करदाता यह तय नहीं कर पा रहा है कि उसके लिए कौन-सा ITR फॉर्म सही है, तो आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल पर उपलब्ध ‘Help me decide’ विकल्प का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह सुविधा करदाता की जानकारी और पात्रता के आधार पर उपयुक्त फॉर्म चुनने में मार्गदर्शन करती है। इससे गलत फॉर्म दाखिल करने की संभावना कम हो सकती है।
गलत ITR फॉर्म भरने पर क्या होगा?
गलत ITR फॉर्म दाखिल करने पर आयकर विभाग इसे त्रुटिपूर्ण रिटर्न मान सकता है। ऐसी स्थिति में विभाग आयकर अधिनियम की धारा 139(9) के तहत नोटिस जारी कर सकता है और निर्धारित समय में गलती सुधारने के लिए कह सकता है। त्रुटि दूर होने तक रिटर्न की प्रोसेसिंग प्रभावित हो सकती है और रिफंड भी अटक सकता है।
गलती समय पर सुधारना बेहद जरूरी
सिर्फ गलत फॉर्म चुन लेने से हर स्थिति में तत्काल जुर्माना नहीं लगता, लेकिन यदि गलत जानकारी के कारण आय कम दिखाई गई हो, अनुचित कटौती का दावा किया गया हो या टैक्स देनदारी प्रभावित हुई हो, तो ब्याज, पेनल्टी या आगे की जांच की स्थिति बन सकती है। इसलिए करदाताओं को 31 अगस्त की समयसीमा से पहले सही ITR फॉर्म चुनकर रिटर्न दाखिल करना चाहिए और ई-वेरिफिकेशन भी समय पर पूरा करना चाहिए।
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