Ajeet Bharti FIR: दिल्ली में सोशल मीडिया पर प्रसारित एक कथित वीडियो को लेकर यूट्यूबर अजीत भारती के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया है। आरोप है कि वीडियो में जाति, आरक्षण और अनुसूचित जाति समुदाय से संबंधित आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। शिकायत के आधार पर दिल्ली पुलिस ने नॉर्थ एवेन्यू थाने में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामला आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष बालाक्रम बौद्ध की शिकायत पर दर्ज किया गया है।
22 अगस्त को प्रसारित वीडियो पर शिकायत
शिकायतकर्ता के मुताबिक, 22 अगस्त को सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में अजीत भारती ने आरक्षण और जाति से जुड़े मुद्दों पर कथित तौर पर आपत्तिजनक बातें कहीं। शिकायत में दावा किया गया है कि वीडियो में अनुसूचित जाति समुदाय के लोगों को लेकर भी ऐसी टिप्पणियां की गईं, जिन्हें अपमानजनक माना गया। शिकायतकर्ता ने पुलिस को कथित वीडियो के अलावा उससे जुड़े स्क्रीनशॉट और अन्य सामग्री भी उपलब्ध कराई है।
चंद्रशेखर आजाद का भी शिकायत में जिक्र
दर्ज FIR में नगीना से सांसद और आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद का नाम भी शामिल है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि संबंधित वीडियो में चंद्रशेखर आजाद को लेकर भी कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई। पुलिस अब वीडियो की पूरी सामग्री और उसमें कही गई बातों के संदर्भ की जांच कर रही है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि आरोपों में कितनी सच्चाई है।
डॉ. अंबेडकर से जुड़ी टिप्पणियों का भी आरोप
शिकायत में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर से संबंधित कथित टिप्पणियों का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता ने कहा है कि वीडियो में कही गई बातों से अनुसूचित जाति समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने और वीडियो के मूल स्रोत की जानकारी जुटाने की मांग की है।
वीडियो के मूल स्रोत की जानकारी जुटाएगी पुलिस
शिकायतकर्ता ने जांच के दौरान उस सोशल मीडिया अकाउंट की जानकारी हासिल करने की मांग की है, जहां से कथित वीडियो अपलोड या प्रसारित हुआ था। इसके अलावा संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से डिजिटल रिकॉर्ड, वीडियो की मूल जानकारी और उसे आगे प्रसारित करने वाले अकाउंट्स का विवरण जुटाने की मांग भी की गई है। पुलिस इन डिजिटल साक्ष्यों की मदद से वीडियो के स्रोत और प्रसार की कड़ियों की जांच करेगी।
SC/ST एक्ट और IT एक्ट के तहत मामला
पुलिस ने शिकायत के आधार पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण कानून यानी SC/ST एक्ट, आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज की है। मामले में अब पुलिस कथित वीडियो की सामग्री, उसके संदर्भ और उससे जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड की जांच करेगी।
जांच के बाद ही आरोपों की होगी पुष्टि
पुलिस का कहना है कि FIR दर्ज होना आरोपों की पुष्टि नहीं माना जाता। जांच के दौरान वीडियो की सत्यता, उसकी मूल रिकॉर्डिंग, सोशल मीडिया पर अपलोड किए जाने की परिस्थितियों और उसमें कही गई बातों का परीक्षण किया जाएगा। उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों और अन्य रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। फिलहाल इस मामले ने दिल्ली में सोशल मीडिया पर जाति और आरक्षण से जुड़े बयानों को लेकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।
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