Nepal Flood: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और सैलाब ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आपदा में अब तक 270 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1,000 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लगातार चल रहे राहत और बचाव अभियान के बीच अलग-अलग इलाकों से शव बरामद किए जा रहे हैं और लापता लोगों की तलाश जारी है।
कई जिलों में बरामद हुए शव
नेपाल पुलिस के मुताबिक, चितवन से 108, नवलपरासी पूर्व से 62, धादिंग से 27, गोरखा से 20 और रसुवा से 17 शव बरामद किए गए हैं। इसके अलावा नवलपरासी पश्चिम से 15, नुवाकोट से 12 और तनहुन से नौ शव मिलने की जानकारी सामने आई है। इन आंकड़ों से आपदा की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
288 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी
नेपाल की इस त्रासदी के बीच भारत के लिए भी चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नेपाल में 288 भारतीय नागरिकों के लापता होने की सूचना मिली है। इनमें त्रिशूली क्षेत्र में काम करने वाले लोग, कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए यात्री और अलग-अलग राज्यों के नागरिक शामिल बताए गए हैं।
तमिलनाडु और अन्य राज्यों के लोग भी शामिल
जानकारी के अनुसार, त्रिशूली में काम करने वाले 73 भारतीयों का पता नहीं चल पाया है। इसके अलावा तमिलनाडु के दो अलग-अलग समूहों में शामिल 37 और 49 लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे और लापता बताए जा रहे हैं। पश्चिम बंगाल के 32, केरल के 33 तथा विभिन्न राज्यों के 61 अन्य लोगों के भी लापता होने की जानकारी दी गई है।
भारत सरकार ने बनाया 24 घंटे कंट्रोल रूम
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री से बातचीत कर भारत की ओर से हरसंभव सहायता का भरोसा दिया है। नेपाल में बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए विदेश मंत्रालय ने विशेष 24×7 कंट्रोल रूम स्थापित किया है। प्रभावित भारतीयों के परिजन इस व्यवस्था के माध्यम से जरूरी जानकारी हासिल कर सकते हैं।
भारतीय दूतावास ने भी जारी किए आपात नंबर
भारत ने नेपाल में मौजूद नागरिकों की सहायता के लिए काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के आपातकालीन संपर्क नंबर भी उपलब्ध कराए हैं। इसके अलावा नेपाल के पर्यटन पुलिस, सेना, आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और प्रभावित जिलों की पुलिस के संपर्क नंबर भी जारी किए गए हैं। सरकार ने लोगों से जरूरत पड़ने पर इन माध्यमों का इस्तेमाल करने की अपील की है।
चीन की तरफ भी फंसे भारतीय नागरिक
विदेश मंत्रालय के अनुसार, कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कई भारतीय नागरिक चीन के तिब्बत क्षेत्र की तरफ फंसे हुए हैं। करीब 200 भारतीयों ने वहां से सुरक्षित निकलने के लिए भारत से मदद मांगी है। इनमें कुछ लोग गारचन, जीलोंग और जुतुलपो जैसे क्षेत्रों में बताए गए हैं और सुरक्षित रास्तों से नेपाल की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। स्थिति लगातार बदल रही है।
21 भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया
विदेश मंत्रालय ने बताया कि तमिलनाडु के 21 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। सरकार नेपाल और तिब्बत में फंसे भारतीयों की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है। संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय कर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
नेपाल को भारत ने भेजी राहत सामग्री
भारत ने नेपाल में राहत और बचाव कार्यों के लिए मानवीय सहायता भी भेजी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, राहत सामग्री लेकर दो विमान काठमांडू भेजे गए हैं। हवाई मार्ग से दवाइयों और खाने-पीने की आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति की गई है। दोनों चरणों में भेजी गई सहायता सहित भारत ने नेपाल को कुल 47.5 टन आपातकालीन सामग्री उपलब्ध कराई है।
ग्लेशियर टूटने के बाद आया विनाशकारी सैलाब
बताया जा रहा है कि तिब्बत में ग्लेशियर से जुड़ी घटना के बाद बड़ी मात्रा में पानी और मलबा नीचे की ओर आया, जिससे नेपाल की भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में अचानक सैलाब की स्थिति बनी। तेज बहाव ने कई इलाकों को प्रभावित किया और लोगों को संभलने तक का पर्याप्त मौका नहीं मिला।
पुल, हाईवे और हाइड्रोपावर परियोजनाएं प्रभावित
इस विनाशकारी बाढ़ में 19 पुलों, करीब 40 किलोमीटर हाईवे और नौ हाइड्रोपावर परियोजनाओं के प्रभावित या तबाह होने की जानकारी सामने आई है। कई स्थानों पर पानी और मलबे का बहाव बेहद तेज रहा। घरों, वाहनों और अन्य संपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। कुछ शव घटनास्थल से काफी दूर चितवन तक मिलने की जानकारी ने आपदा की भयावहता को और उजागर किया है।
Read more : Durg Mayor Car Fire: कार से उतरते ही धधकी इनोवा, दुर्ग महापौर बाल-बाल बचीं