Yemen War 2026: यमन में लंबे समय से चले आ रहे गृहयुद्ध के बीच करीब चार वर्षों से बनी असहज शांति अब कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार और उसके प्रमुख सहयोगी सऊदी अरब पर बड़े सैन्य अभियान की तैयारी करने का आरोप लगाया है। हूती नेता अब्दुल-मलिक अल-हूती ने 30 जुलाई को चेतावनी दी थी कि यदि उनके खिलाफ व्यापक सैन्य कार्रवाई शुरू होती है, तो संगठन भी उसी स्तर पर जवाब देगा। इसके बाद अगस्त में सरकारी ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों में तेजी देखी गई।
सरकारी ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले तेज
अगस्त के दौरान हूती लड़ाकों ने यमनी सरकार से जुड़े सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों में सैनिकों के साथ आम नागरिकों के भी हताहत होने की खबरें सामने आईं। बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने यह आशंका मजबूत की है कि यमन में वर्षों से चला आ रहा संघर्ष एक बार फिर बड़े पैमाने पर भड़क सकता है। हूतियों और सरकार के बीच जारी तनाव का असर देश की सुरक्षा व्यवस्था के साथ क्षेत्रीय स्थिरता पर भी पड़ सकता है।
लाल सागर में जहाजों को बनाया निशाना
हूतियों की रणनीति अब यमन की सीमाओं से आगे समुद्री क्षेत्र तक पहुंच गई है। जुलाई के मध्य से संगठन ने लाल सागर में सऊदी अरब से जुड़े जहाजों को निशाना बनाने के साथ बंदरगाहों, हवाई अड्डों और तेल प्रतिष्ठानों पर भी हमले किए हैं। बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाला बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां बढ़ा सैन्य खतरा वैश्विक व्यापार और जहाजों की आवाजाही को प्रभावित कर सकता है।
सऊदी अरब पर दबाव बनाने की रणनीति
सऊदी अरब लंबे समय से हूती विद्रोहियों के प्रमुख विरोधियों में शामिल रहा है। मौजूदा हमलों के पीछे हूतियों का मकसद रियाद पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव बढ़ाना बताया जा रहा है। संगठन चाहता है कि यमनी सरकारी कर्मचारियों के वेतन से जुड़े मुद्दे पर कदम उठाए जाएं तथा हवाई और समुद्री प्रतिबंधों में राहत दी जाए। इसके अलावा हूती अपने विरोधियों की संभावित सैन्य कार्रवाई से पहले रणनीतिक बढ़त हासिल करना चाहते हैं।
2014 से यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण
हूतियों ने वर्ष 2014 में राजधानी सना सहित यमन के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया था। बाद में पश्चिमी तट के कई हिस्सों में भी उनका प्रभाव बढ़ा। देश की बड़ी आबादी हूती नियंत्रित या प्रभावित क्षेत्रों में रहती है। संगठन लंबे समय से अपने नियंत्रण वाले इलाकों का विस्तार करने की कोशिश करता रहा है। इसलिए मौजूदा संघर्ष केवल यमन का आंतरिक विवाद नहीं, बल्कि पश्चिम एशिया के शक्ति संतुलन से जुड़ा मुद्दा भी बन गया है।
मोखा बंदरगाह पर हमला क्यों महत्वपूर्ण
15 अगस्त को हूती मिसाइलों ने बाब-अल-मंदेब के पास स्थित मोखा बंदरगाह को निशाना बनाया। हमले से भारी आर्थिक नुकसान होने और बंदरगाह के संचालन पर असर पड़ने की जानकारी सामने आई। मोखा राष्ट्रीय प्रतिरोध बलों के लिए महत्वपूर्ण आधार माना जाता है, जो यमनी सरकार के समर्थन में सक्रिय हैं। ऐसे में इस बंदरगाह पर हमला हूतियों की सैन्य रणनीति में अहम संकेत माना जा रहा है।
ईरान के लिए हूती क्यों महत्वपूर्ण
हूतियों की मिसाइल और ड्रोन क्षमता ने उन्हें ईरान के प्रमुख क्षेत्रीय सहयोगियों में महत्वपूर्ण स्थान दिया है। लाल सागर में समुद्री यातायात प्रभावित करने की उनकी क्षमता ने यमन के संघर्ष को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ दिया है। सऊदी अरब पर दबाव, यमनी सरकार के खिलाफ अभियान और समुद्री मार्गों को प्रभावित करने की क्षमता हूतियों को क्षेत्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण रणनीतिक ताकत देती है।
वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है असर
यदि लाल सागर और बाब-अल-मंदेब क्षेत्र में हमले जारी रहे, तो जहाजों को लंबे वैकल्पिक मार्ग अपनाने पड़ सकते हैं। इससे माल ढुलाई का समय और परिवहन लागत बढ़ सकती है। ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा पर भी दबाव बनने की आशंका है। पश्चिम एशिया में पहले से मौजूद तनाव के बीच यमन में बढ़ती हूती गतिविधियां स्थानीय संकट से आगे बढ़कर वैश्विक व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन सकती हैं।
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