यूक्रेन के मायला में गोला-बारूद से जुड़े एक गोदाम को रूसी हमले में निशाना बनाए जाने की खबर है। हमले के बाद हुए धमाकों और आग में 37 लोगों की मौत बताई जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक यह 2026 में यूक्रेन पर हुआ अब तक का सबसे घातक हमला माना जा रहा है।
यूक्रेन के मायला में गोला-बारूद से जुड़े एक गोदाम को रूसी हमले में निशाना बनाए जाने की खबर है। हमले के बाद हुए धमाकों और आग में 37 लोगों की मौत बताई जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक यह 2026 में यूक्रेन पर हुआ अब तक का सबसे घातक हमला माना जा रहा है।

Russia Ukraine War: यूक्रेन की राजधानी कीव के पश्चिमी हिस्से में स्थित बुचा जिले के मायला गांव में शुक्रवार रात एक रूसी ड्रोन हमले ने भारी तबाही मचा दी। हमले का निशाना हथियारों और गोला-बारूद का एक भंडारण केंद्र बताया जा रहा है। ड्रोन के हमले के बाद डिपो में जोरदार विस्फोटों का सिलसिला शुरू हो गया और देखते ही देखते भीषण आग फैल गई। आग की लपटों ने आसपास मौजूद कई इमारतों और रिहायशी क्षेत्रों को अपनी चपेट में ले लिया।


यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, इस घटना में कम से कम 37 लोगों की जान चली गई है। राहत और बचाव एजेंसियां प्रभावित क्षेत्र में लगातार काम कर रही हैं। अधिकारियों ने इसे 2026 में यूक्रेन पर हुए सबसे घातक और विनाशकारी हमलों में से एक बताया है। लगातार हो रहे विस्फोटों के कारण घटनास्थल पर पहुंचने वाले राहतकर्मियों के लिए भी हालात चुनौतीपूर्ण बने रहे।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया के जरिए घटना की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि शुरुआती हमला रक्षा बलों के गोला-बारूद भंडारण स्थल पर हुआ था। इस केंद्र में तोप के गोले, बारूदी सुरंगें और ड्रोन सहित कई तरह के सैन्य उपकरण रखे हुए थे। ड्रोन हमले के बाद इनमें विस्फोट होने लगे, जिससे आसपास का इलाका लंबे समय तक धमाकों और आग की चपेट में रहा।
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने इस घटना पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि इतना संवेदनशील हथियार भंडारण केंद्र रिहायशी इलाके के नजदीक नहीं होना चाहिए था। उन्होंने संकेत दिया कि जिन अधिकारियों या जिम्मेदार लोगों के फैसलों के कारण यह स्थिति बनी, उनसे जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उनके मुताबिक, युद्ध के दौरान सैन्य संसाधनों की सुरक्षा और उचित स्थान पर भंडारण बेहद महत्वपूर्ण है।
यूक्रेन के प्रधानमंत्री सेरही कोरेत्स्की ने भी घटना के बाद अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने जुलाई में कीव के उपनगर विश्नेवे में हुए एक समान हमले का उल्लेख किया। उस घटना में भी एक गोला-बारूद डिपो को निशाना बनाया गया था और 22 लोगों की मौत हुई थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछली घटना से पर्याप्त सबक नहीं लिया गया और ऐसी गलतियों की पुनरावृत्ति गंभीर चिंता का विषय है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि युद्ध के पांचवें वर्ष में भी यदि संवेदनशील सैन्य भंडारण केंद्रों को पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी जाती है, तो इसे केवल सामान्य गलती नहीं माना जा सकता। उन्होंने ऐसी घटनाओं को गंभीर लापरवाही बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। सरकार के सामने अब यह चुनौती है कि भविष्य में सैन्य भंडारों को ऐसे हमलों से कैसे सुरक्षित रखा जाए।
दूसरी ओर, रूस के रक्षा मंत्रालय ने मायला में हमले की पुष्टि की है। रूसी पक्ष का दावा है कि उसके निशाने पर ऐसा गोदाम था जहां लंबी दूरी तक मार करने वाले ड्रोनों के कलपुर्जे और लॉन्च बूस्टर रखे गए थे। रूस का कहना है कि यह हमला सैन्य ढांचे को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया था। हालांकि, दोनों पक्षों के दावों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित करना मुश्किल है।
रूस के रक्षा मंत्रालय ने मायला के अलावा मायकोलाइव और इजमाइल के बंदरगाहों को भी निशाना बनाने का दावा किया है। रूसी अधिकारियों के मुताबिक, कीव क्षेत्र में यूक्रेन की ‘फ्लेमिंगो’ क्रूज़ मिसाइलों के पुर्जे तैयार करने वाले ठिकानों पर भी कार्रवाई की गई। इन दावों के बीच यूक्रेन में सैन्य और रणनीतिक ठिकानों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति कार्यालय के उप प्रमुख पावलो पालिसा ने रूस की नई ड्रोन रणनीति को लेकर चेतावनी दी है। उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में रूस ने जेट-संचालित ड्रोनों का इस्तेमाल बढ़ाया है। इनकी गति अधिक होने के कारण मौजूदा रक्षा प्रणालियों के लिए इन्हें रोकना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। यूक्रेन को अपने एयर डिफेंस सिस्टम में तेजी से बदलाव करने की जरूरत महसूस हो रही है।
पालिसा के मुताबिक, यूक्रेन के पास मौजूद इंटरसेप्टर ड्रोन फिलहाल जेट-संचालित ड्रोन के खिलाफ पूरी तरह प्रभावी साबित नहीं हो रहे हैं। ऐसे में यूक्रेन के सामने अपनी हवाई सुरक्षा क्षमता को मजबूत करने और नई तकनीक विकसित करने की चुनौती है। मायला में हुई तबाही ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि युद्ध के बदलते स्वरूप के बीच सैन्य ठिकानों की सुरक्षा और हवाई रक्षा दोनों को मजबूत करना बेहद जरूरी हो गया है।
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