Kajari Teej 2026: कजरी तीज का व्रत हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महिलाएं इस दिन पति की लंबी आयु, अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से व्रत रखती हैं। कजरी तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने की परंपरा भी प्रचलित है। साल 2026 में कजरी तीज का पर्व 31 अगस्त, सोमवार को मनाया जा रहा है। व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए पूजा की विधि और जरूरी नियमों को पहले से जानना उपयोगी माना जाता है।
लाल या हरे वस्त्र पहनने की परंपरा
कजरी तीज के दिन सुहागिन महिलाओं के लिए लाल या हरे रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। महिलाएं स्नान आदि के बाद पारंपरिक परिधान धारण कर सोलह श्रृंगार करती हैं। इसके बाद पूजा की तैयारी की जाती है। श्रृंगार को सुहाग और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, इन परंपराओं का पालन श्रद्धा और अपनी सुविधा के अनुसार किया जा सकता है।
बुजुर्ग महिला का आशीर्वाद लेना माना जाता है शुभ
पूजा पूरी करने के बाद घर की सास या किसी बुजुर्ग सुहागिन महिला को बयाना देने की परंपरा बताई गई है। बयाना में सुहाग से जुड़ी सामग्री, वस्त्र और अन्य चीजें शामिल की जा सकती हैं। इसके बाद बुजुर्ग महिला का आशीर्वाद लिया जाता है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार किसी अन्य सुहागिन महिला को भी वस्त्र या सुहाग सामग्री का दान करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता में दान को पुण्य और सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है।
नीमड़ी माता की कथा सुनना महत्वपूर्ण
कजरी तीज की पूजा में नीमड़ी माता की कथा सुनने की परंपरा भी बताई जाती है। व्रत रखने वाली महिलाएं पूजा के दौरान कथा श्रवण करती हैं और भगवान शिव-पार्वती का स्मरण करती हैं। मान्यता के अनुसार, कथा सुनने के साथ व्रत के नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण होता है। दिनभर पूजा-पाठ और भक्ति में मन लगाने से व्रत को श्रद्धापूर्वक पूरा करने की भावना मजबूत होती है।
पूजा में काले और सफेद कपड़ों से बचें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कजरी तीज के दिन पूजा के दौरान काले या सफेद रंग के कपड़े पहनने से बचने की परंपरा है। इसके अलावा व्रत रखने वाली महिलाओं को पूरे दिन क्रोध, विवाद और किसी का अपमान करने से बचने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि व्रत के दौरान मन को शांत और सकारात्मक रखना चाहिए। पूजा-पाठ में ध्यान लगाकर दिन बिताना शुभ माना जाता है।
व्रत के दौरान संयम रखना जरूरी
कजरी तीज का व्रत कई स्थानों पर परंपरागत रूप से निर्जला रखा जाता है। यानी महिलाएं व्रत पूरा होने तक भोजन के साथ पानी का सेवन भी नहीं करती हैं। धार्मिक परंपरा में चंद्र दर्शन और पूजा के बाद व्रत खोलने का विधान बताया जाता है। हालांकि, हर व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है। किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या होने पर निर्जला व्रत रखने की जिद नहीं करनी चाहिए और जरूरत के अनुसार फलाहार या पानी का सेवन किया जा सकता है।
दिन में सोने के बजाय भजन-कीर्तन करें
व्रत के दिन दिन में सोने के बजाय पूजा, भजन-कीर्तन और धार्मिक गतिविधियों में समय बिताना शुभ माना जाता है। महिलाएं परिवार के साथ मिलकर कजरी तीज की कथा सुन सकती हैं और भगवान शिव तथा माता पार्वती का ध्यान कर सकती हैं। इस दौरान सकारात्मक विचारों के साथ संयम बनाए रखना व्रत की धार्मिक भावना के अनुरूप माना जाता है।
चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलने की परंपरा
कजरी तीज के व्रत में चंद्रमा के दर्शन का विशेष महत्व बताया गया है। रात में चंद्रमा दिखाई देने के बाद महिलाएं उन्हें विधि-विधान से अर्घ्य अर्पित करती हैं। पूजा और कथा श्रवण के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करने की परंपरा है। इसके बाद महिलाएं भोजन या जल ग्रहण करके अपना व्रत पूरा करती हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में पारण की स्थानीय परंपराएं कुछ अलग हो सकती हैं।
श्रद्धा और नियम से पूरा करें कजरी तीज व्रत
धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धा, संयम और विधि-विधान के साथ कजरी तीज का व्रत करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति और परिवार में समृद्धि की कामना की जाती है। इस दिन महिलाओं के लिए पूजा के साथ सकारात्मक सोच और शांत व्यवहार को भी महत्वपूर्ण माना गया है। हालांकि, व्रत से जुड़े नियम और परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न हो सकती हैं, इसलिए महिलाएं अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार पूजा और पारण कर सकती हैं।
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