CJP प्रमुख अभिजीत दिपके ने मोहन भागवत के हालिया बयानों को लेकर बीजेपी नेतृत्व पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सत्ता में लंबे समय से रहने के बाद भाजपा को लगने लगा है कि वह RSS से बड़ी हो गई है। दिपके ने पार्टी को संघ प्रमुख की सलाह सुनने की अपील की।
CJP प्रमुख अभिजीत दिपके ने मोहन भागवत के हालिया बयानों को लेकर बीजेपी नेतृत्व पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सत्ता में लंबे समय से रहने के बाद भाजपा को लगने लगा है कि वह RSS से बड़ी हो गई है। दिपके ने पार्टी को संघ प्रमुख की सलाह सुनने की अपील की।

CJP Abhijeet Dipke : न्यूयॉर्क में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत की ओर से हिंदू धर्म के समावेशी स्वरूप को लेकर दिए गए बयान के बाद भारत में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता अभिजीत दिपके ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी को संघ प्रमुख की सलाह को गंभीरता से सुनना चाहिए। उनका आरोप है कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बाद भाजपा को यह महसूस होने लगा है कि वह आरएसएस से भी बड़ी हो गई है।


अभिजीत दिपके से जब मोहन भागवत के न्यूयॉर्क में दिए गए बयान को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने भाजपा को संघ प्रमुख की बातों पर ध्यान देने की सलाह दी। भागवत ने ‘वन वर्ल्ड: वन ह्यूमैनिटी फेथ लीडर्स समिट’ में कहा था कि यदि कोई हिंदू यह मानता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रहेगा। भागवत के इस बयान को धार्मिक समावेशिता और सह-अस्तित्व से जोड़कर देखा जा रहा है।

दिपके ने कहा कि वह लंबे समय से यह बात कहते आ रहे हैं कि भाजपा को मोहन भागवत के विचारों को सुनना चाहिए। उनके मुताबिक, सत्ता में करीब 12 साल रहने और विभिन्न सरकारी एजेंसियों पर नियंत्रण मजबूत होने के बाद भाजपा के भीतर यह धारणा बन गई है कि वह आरएसएस से बड़ी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि भाजपा को यह समझना चाहिए कि संघ उसका वैचारिक मार्गदर्शक रहा है।
CJP नेता ने अपने आरोपों को मजबूत करने के लिए प्रदर्शन कर रहे Gen Z युवाओं को लेकर भागवत की पूर्व टिप्पणी का भी उल्लेख किया। दिपके के अनुसार, मोहन भागवत ने पहले युवाओं को राष्ट्रविरोधी नहीं कहने की सलाह दी थी। इसके बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से कथित तौर पर ‘दिमागी नक्सल’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया। दिपके ने इसे संघ प्रमुख की सलाह और सरकार की भाषा के बीच अंतर के तौर पर पेश किया।
अभिजीत दिपके ने कहा कि आरएसएस प्रमुख लगातार समाज में समावेशिता और सभी वर्गों के सम्मान की बात करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि भागवत बच्चों और युवाओं को अपमानजनक शब्दों से संबोधित नहीं करने की सलाह देते हैं, जबकि सरकार के स्तर पर अलग तरह की भाषा सुनाई देती है। दिपके का कहना है कि भाजपा को अपने वैचारिक मार्गदर्शक की बातों को गंभीरता से लेना चाहिए।

दिपके ने भाजपा और आरएसएस के संबंधों को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भाजपा आज सत्ता में है तो इसमें संघ की भूमिका महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक, पार्टी को यह नहीं भूलना चाहिए कि उसकी राजनीतिक और वैचारिक यात्रा में आरएसएस का योगदान रहा है। उन्होंने भाजपा से अपील की कि वह संघ प्रमुख की बातों को नजरअंदाज करने के बजाय उन पर विचार करे।
इसी बातचीत के दौरान अभिजीत दिपके से सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के उस कथित बयान के बारे में भी सवाल किया गया, जिसमें CJP नेताओं की राजनीतिक महत्वाकांक्षा का जिक्र होने की बात सामने आई थी। दिपके ने इस दावे को अलग संदर्भ में देखने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि वांगचुक के बयान को कथित तौर पर गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है और पूरी बातचीत का संदर्भ समझना जरूरी है।
दिपके के मुताबिक, सोनम वांगचुक से जब सौरव दास और आशुतोष रांका की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को लेकर सवाल पूछा गया था, तब उन्होंने दोनों को प्रतिभाशाली और अच्छे नेताओं के रूप में बताया था। उन्होंने यह भी कहा था कि दोनों ने अब तक भ्रष्टाचार नहीं किया और ईमानदारी के साथ आंदोलन चलाया है। दिपके ने इसी हिस्से को सामने रखते हुए कहा कि वांगचुक की टिप्पणी को केवल राजनीतिक महत्वाकांक्षा के संदर्भ में देखना उचित नहीं है।
दिपके ने बताया कि जब सोनम वांगचुक से दोनों नेताओं के भविष्य को लेकर सवाल किया गया, तब उन्होंने कथित तौर पर किसी निश्चित संभावना की बात नहीं कही। उनका कहना था कि भविष्य में कोई व्यक्ति क्या करेगा, इसे लेकर पहले से कुछ निश्चित नहीं कहा जा सकता। इसी वजह से उन्होंने लोगों को किसी भी व्यक्ति पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करने की सलाह दी थी।
मोहन भागवत के बयान और उसके बाद अभिजीत दिपके की प्रतिक्रिया ने भाजपा और आरएसएस के संबंधों को लेकर एक बार फिर राजनीतिक चर्चा को हवा दे दी है। एक तरफ भागवत के बयान को समावेशी हिंदुत्व की दृष्टि से देखा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी और राजनीतिक संगठनों के नेता भाजपा से संघ की विचारधारा और सलाह पर ध्यान देने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, दिपके के आरोप राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा हैं और भाजपा की ओर से इन टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया इस खबर में शामिल नहीं है।


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