Himachal Rain: हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही बारिश का असर ऐतिहासिक शिमला-कालका नैरो गेज रेलवे लाइन पर भी पड़ा है। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल इस रेल मार्ग पर ट्रैक के नीचे से मिट्टी बह जाने के कारण रविवार को 10 ट्रेनों का संचालन रद्द करना पड़ा। सोलन जिले में कोटी और गुम्मन रेलवे स्टेशनों के बीच ट्रैक का एक हिस्सा बारिश के कारण असुरक्षित हो गया था। यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने टॉय ट्रेन सेवा को अस्थायी रूप से रोक दिया।
कोटी-गुम्मन के बीच ट्रैक हुआ असुरक्षित
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, शनिवार रात भारी बारिश के बाद कोटी और गुम्मन स्टेशनों के बीच ट्रैक को नुकसान पहुंचा। ट्रैक के नीचे मौजूद मिट्टी बारिश के तेज बहाव में बह गई, जिसके बाद रेलवे ने एहतियाती कदम उठाते हुए इस मार्ग पर रेल परिचालन रोक दिया। शिमला रेलवे स्टेशन के अधीक्षक संजय गेवर ने बताया कि रविवार को कालका और शिमला के बीच चलने वाली कुल 10 ट्रेनें रद्द रहीं। ट्रैक को पूरी तरह सुरक्षित घोषित किए जाने के बाद ही सेवाएं बहाल करने का फैसला लिया जाएगा।
ब्रिज नंबर 57 के पास बह गई मिट्टी
रेलवे की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, कोटी और गुम्मन के बीच ब्रिज नंबर 57 के आसपास ट्रैक को सहारा देने वाली मिट्टी बारिश के पानी के साथ बह गई। इस घटना के बाद रेलवे की टीम ने तत्काल राहत और बचाव अभियान शुरू किया। ट्रैक की स्थिति को देखते हुए यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण कर जरूरी सुरक्षा उपायों पर काम शुरू किया।
400 से अधिक यात्रियों को सुरक्षित निकाला
रेलवे के मुताबिक, घटना के दौरान ट्रेन में मौजूद यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों सहित 400 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। राहत एवं बचाव अभियान के दौरान सभी यात्रियों को किसी सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया गया। रेलवे की ओर से बताया गया कि इस घटना में किसी बड़ी जनहानि की सूचना नहीं है। सुरक्षा व्यवस्था के कारण रविवार को शिमला रेलवे स्टेशन पर भी सामान्य दिनों की तुलना में कम भीड़ देखने को मिली।
मानसून में कई बार बाधित हुई टॉय ट्रेन
शिमला-कालका हेरिटेज रेल लाइन पर इस मानसून में बारिश और भूस्खलन के कारण कई बार रेल सेवाएं प्रभावित हो चुकी हैं। लगभग 96 किलोमीटर लंबा यह रेल मार्ग बेहद कठिन पहाड़ी इलाके से होकर गुजरता है। प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक महत्व के कारण टॉय ट्रेन देश-विदेश के पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है। बारिश के दौरान पहाड़ी ढलानों से मलबा और मिट्टी खिसकने का खतरा लगातार बना रहता है।
102 सुरंगों और सैकड़ों पुलों से गुजरती है ट्रेन
शिमला-कालका रेल लाइन अपनी अद्भुत इंजीनियरिंग के लिए भी जानी जाती है। इस ऐतिहासिक मार्ग पर 102 सुरंगें, करीब 800 पुल और 919 घुमावदार मोड़ हैं। पहाड़ों के बीच से गुजरने वाली यह रेल यात्रा पर्यटकों के लिए खास आकर्षण रखती है। हालांकि, इसी दुर्गम भौगोलिक क्षेत्र के कारण मानसून के दौरान ट्रैक की सुरक्षा चुनौती बन जाती है। भारी बारिश से भूस्खलन और ट्रैक के नीचे की जमीन खिसकने का खतरा बढ़ जाता है।
हिमाचल की 64 सड़कें भी बंद
लगातार बारिश के कारण राज्य के सड़क परिवहन पर भी व्यापक असर पड़ा है। रविवार शाम तक हिमाचल प्रदेश में 64 सड़कें यातायात के लिए बंद बताई गईं। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र के अनुसार मंडी में सबसे अधिक 24 सड़कें बंद रहीं। कुल्लू में 16, कांगड़ा और सिरमौर में सात-सात, ऊना में चार, शिमला में तीन, सोलन में दो और लाहौल-स्पीति में एक सड़क बंद रही।
कई इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट
शिमला मौसम विज्ञान केंद्र ने प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश को लेकर चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार अलग-अलग स्थानों पर 3 सितंबर तक भारी बारिश होने की संभावना बनी हुई है। कुछ इलाकों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं। ऐसे में पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और पर्यटकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
धौलाकुआं में सबसे ज्यादा बारिश दर्ज
शनिवार शाम से रविवार तक प्रदेश के कई इलाकों में अच्छी बारिश रिकॉर्ड की गई। धौलाकुआं में सबसे अधिक 71.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। इसके बाद नाहन में 36.8 मिलीमीटर, शिमला और घघास में 30-30 मिलीमीटर, पालमपुर में 23.8 मिलीमीटर, मुरारी देवी में 22 मिलीमीटर, काहू में 11.6 मिलीमीटर और पंडोह में 10 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई।
अगस्त में सामान्य से कम हुई बारिश
मौसम संबंधी आंकड़ों के अनुसार 1 से 30 अगस्त के बीच हिमाचल प्रदेश में कुल 205.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। इस अवधि में सामान्य बारिश का आंकड़ा 251.7 मिलीमीटर माना जाता है। इस तरह अगस्त में राज्य में सामान्य से करीब 18 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इसके बावजूद कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण स्थानीय स्तर पर भूस्खलन, सड़क बंद होने और रेल परिचालन बाधित होने जैसी समस्याएं सामने आई हैं।
सुरक्षा जांच के बाद ही बहाल होगी ट्रेन सेवा
शिमला-कालका टॉय ट्रेन सेवा को लेकर रेलवे फिलहाल ट्रैक की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है। ट्रैक और आसपास के हिस्सों की स्थिति का आकलन करने के बाद ही परिचालन दोबारा शुरू किया जाएगा। यात्रियों को सलाह दी गई है कि यात्रा से पहले ट्रेन संचालन की स्थिति की जानकारी जरूर लें। मानसून के दौरान पहाड़ी रेल मार्ग पर सुरक्षा जांच पूरी होने तक सेवाओं का प्रभावित रहना यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से जरूरी कदम माना जा रहा है।
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