US Iran Conflict : अमेरिका और ईरान के बीच कई सप्ताह से जारी सैन्य तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। रविवार को अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में मौजूद ईरान के रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया। करीब एक महीने के अंतराल के बाद ईरान के खिलाफ अमेरिका की यह बड़ी सैन्य कार्रवाई मानी जा रही है। हमले के बाद ईरान ने इसे गंभीर और घातक कार्रवाई बताया तथा जवाबी कदम उठाते हुए जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की दिशा में बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। घटनाक्रम के बाद पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है।
समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने का अमेरिकी सेना का दावा
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता टिम हॉकिन्स के अनुसार, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के जवान होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रहे थे। अमेरिकी पक्ष के मुताबिक, इन सुरंगों को समुद्री मार्ग में तैनात करने के लिए रॉकेट लॉन्चरों का इस्तेमाल किया जाना था। इसी आशंका के चलते अमेरिकी सेना ने लॉन्चरों को निशाना बनाया। अमेरिका का कहना है कि उसने पिछले सप्ताह ही होर्मुज में अंतरराष्ट्रीय जहाजों के रास्ते से समुद्री सुरंगें हटाने का अभियान पूरा किया था।
ईरान ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी ठिकानों पर किया पलटवार
अमेरिकी हमले के बाद ईरानी मीडिया ने लारक द्वीप के आसपास जोरदार धमाकों की जानकारी दी। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि हमले में उसके कुछ लड़ाके और नागरिक हताहत हुए हैं। इसके बाद ईरानी सरकारी टेलीविजन पर जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने की तस्वीरें दिखाई गईं। जॉर्डन की सेना के अनुसार, उसके हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाली आठ ईरानी मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर दिया गया।
ईरान ने ट्रंप को दी गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रवक्ता जनरल हुसैन मोहेबी ने अमेरिकी हमले को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘घातक भूल’ बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका को इस कार्रवाई के गंभीर सैन्य और आर्थिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। इस बयान से साफ है कि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होने के बजाय एक बार फिर टकराव की दिशा में बढ़ रहा है।
जुलाई के बाद अमेरिका की बड़ी सैन्य कार्रवाई
अमेरिका ने इससे पहले 29 जुलाई को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की पुष्टि की थी। उस समय अमेरिकी सेना ने IRGC के तटीय निगरानी और रक्षा ठिकानों समेत कई स्थानों को निशाना बनाने की जानकारी दी थी। इसके बाद 1 अगस्त को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खाड़ी देशों कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की अपील के बाद नए हमलों को रोकने की बात कही थी। हाल के दिनों में अमेरिकी प्रशासन सैन्य कार्रवाई के बजाय आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए ईरान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति पर जोर दे रहा था।
लंबे संघर्ष से अमेरिकी सैन्य संसाधनों पर दबाव
ईरान के साथ लंबे समय से चल रहे संघर्ष के कारण अमेरिका के हथियारों और सैन्य संसाधनों पर दबाव बढ़ने की चिंता भी सामने आई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि युद्ध लंबे समय तक चलता है तो इसका असर दुनिया के अन्य हिस्सों में अमेरिकी सैन्य तैयारियों पर पड़ सकता है। ट्रंप लगातार दावा करते रहे हैं कि अमेरिकी और इजरायली हमलों से ईरान की नौसेना और वायुसेना को भारी नुकसान पहुंचा है। दूसरी ओर ईरानी अधिकारियों ने युद्ध से करीब 270 अरब डॉलर के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नुकसान का दावा किया है।
दुनिया के तेल कारोबार के लिए क्यों अहम है होर्मुज?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल है। सामान्य परिस्थितियों में वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा इस रास्ते से गुजरता है। संघर्ष बढ़ने के बाद यहां से गुजरने वाले तेल और LNG जहाजों की संख्या में कमी आई है। राष्ट्रपति ट्रंप का दावा है कि जलडमरूमध्य खुला है और पिछले सप्ताह 24 जहाज इससे गुजरे। हालांकि, युद्ध से पहले रोजाना करीब 130 जहाज इस समुद्री मार्ग का इस्तेमाल करते थे।
टैंकर को अज्ञात प्रोजेक्टाइल से नुकसान
इस बीच ब्रिटिश सेना से जुड़े एक समुद्री निगरानी संगठन ने बताया कि शनिवार को ओमान के पास होर्मुज जलडमरूमध्य में एक टैंकर जहाज किसी अज्ञात प्रोजेक्टाइल की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हुआ। घटना में किसी व्यक्ति के हताहत होने या पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की सूचना नहीं है। दूसरी ओर अमेरिकी सेना के मुताबिक, रविवार तक 83 व्यावसायिक जहाजों का मार्ग बदला गया और ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी के तहत तीन जहाजों को निष्क्रिय किया गया।
सैन्य तनाव बढ़ते ही कच्चे तेल के दाम चढ़े
अमेरिकी कार्रवाई की खबर सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भी तेजी देखी गई। अमेरिकी क्रूड की कीमत करीब 1.8 प्रतिशत बढ़कर 84.94 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जबकि ब्रेंट क्रूड करीब 1.9 प्रतिशत की बढ़त के साथ 89.79 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। होर्मुज में तनाव बढ़ने से बाजार में वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। आने वाले दिनों में सैन्य घटनाक्रम और समुद्री यातायात की स्थिति तेल कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
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