Alwar News: राजस्थान के अलवर जिले से राहत भरी खबर सामने आई है। लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र में सोमवार को पतंग लूटने के दौरान बोरवेल में गिरे नौ साल के बच्चे को करीब छह घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और तत्काल बचाव अभियान शुरू कर दिया। बच्चे को बाहर निकालने के बाद एंबुलेंस की मदद से अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज कराया जा रहा है।
बुटोली गांव का रहने वाला है बच्चा
अधिकारियों के अनुसार, बोरवेल में गिरने वाले बच्चे की पहचान बुटोली गांव निवासी भानु के रूप में हुई है। बताया गया कि वह अन्य बच्चों के साथ पतंग लूटने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान वह अचानक खुले बोरवेल में जा गिरा। घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया और तुरंत पुलिस एवं प्रशासन को इसकी जानकारी दी गई।
सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस
हादसे की जानकारी मिलते ही लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र की पुलिस और प्रशासनिक टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। अलवर पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी ने बताया कि बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालना प्राथमिकता थी। इसके लिए जिले के कई थानों से पुलिसकर्मियों को मौके पर बुलाया गया। बचाव अभियान के दौरान अधिकारियों ने लगातार स्थिति पर नजर बनाए रखी और स्थानीय लोगों से भी सहयोग लिया।
बोरवेल के समानांतर बनाई गई सुरंग
बचाव दल ने बच्चे तक पहुंचने के लिए बोरवेल के समानांतर एक सुरंग बनाने की योजना तैयार की। इसके बाद जेसीबी मशीनों की सहायता से जमीन की खुदाई शुरू की गई। अधिकारियों के अनुसार, करीब तीन जेसीबी मशीनों को बचाव अभियान में लगाया गया था। खुदाई का काम बेहद सावधानी से किया गया, ताकि बच्चे को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे और सुरक्षित रास्ता बनाकर उसे बाहर निकाला जा सके।
छह घंटे तक लगातार चला रेस्क्यू ऑपरेशन
बच्चे को बचाने के लिए पुलिस, प्रशासन और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल की टीमें कई घंटों तक लगातार जुटी रहीं। करीब छह घंटे तक चले अभियान के दौरान बचाव दल ने हर कदम सावधानी से उठाया। बच्चे की स्थिति पर लगातार नजर रखी गई। जैसे-जैसे सुरंग के जरिए बचाव दल बोरवेल के करीब पहुंचता गया, उम्मीद बढ़ती गई कि बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला जा सकेगा।
बोरवेल में बच्चे को दी गई ऑक्सीजन
बचाव अभियान के दौरान बच्चे को बोरवेल के अंदर लगातार ऑक्सीजन उपलब्ध कराई गई। इससे उसे सांस लेने में मदद मिली और रेस्क्यू टीम को अभियान पूरा करने के लिए जरूरी समय मिल सका। अधिकारियों और बचावकर्मियों ने बच्चे से संपर्क बनाए रखने का भी प्रयास किया, ताकि उसकी स्थिति के बारे में जानकारी मिलती रहे और उसे हिम्मत दी जा सके।
बच्चे की आवाज सुनकर बढ़ी बचाव दल की उम्मीद
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बोरवेल के अंदर से बच्चे की आवाज सुनाई देने लगी। इससे बचाव दल को यह पुष्टि हुई कि भानु सुरक्षित है और उसके साथ संपर्क बनाए रखना संभव है। इसके बाद टीम ने तेजी से अंतिम चरण का बचाव अभियान शुरू किया। बच्चे तक पहुंचने के बाद उसे रस्सी की मदद से सावधानीपूर्वक बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू की गई।
रस्सी की मदद से सुरक्षित निकाला गया भानु
लगातार मेहनत के बाद बचाव दल ने बच्चे को रस्सी की मदद से बोरवेल से बाहर निकाल लिया। जैसे ही भानु बाहर आया, मौके पर मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली। कई घंटे तक चले अभियान के सफल होने के बाद बच्चे को तत्काल चिकित्सकीय जांच के लिए एंबुलेंस से अस्पताल भेजा गया।
ग्रामीणों ने भी बचाव अभियान में दिया साथ
बचाव अभियान में पुलिस और प्रशासन के साथ स्थानीय ग्रामीणों ने भी महत्वपूर्ण सहयोग किया। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने बचावकर्मियों को जरूरी मदद उपलब्ध कराई और अभियान के दौरान टीमों का हौसला बढ़ाया। प्रशासन ने सभी टीमों के समन्वय से अभियान को आगे बढ़ाया, जिसके परिणामस्वरूप बच्चे को सुरक्षित निकालने में सफलता मिली।
अस्पताल में कराया गया इलाज
बोरवेल से बाहर निकाले जाने के बाद भानु को एंबुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया। वहां डॉक्टरों ने उसकी स्वास्थ्य स्थिति की जांच शुरू की। हादसे के बाद बच्चे को सुरक्षित निकाल लिया जाना परिवार और स्थानीय लोगों के लिए बड़ी राहत की बात है। प्रशासन की ओर से बचाव अभियान के दौरान अपनाई गई सावधानियों और त्वरित कार्रवाई के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन सफल रहा।
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