India-Canada CEPA : भारत अब लैटिन अमेरिका में अपनी आर्थिक और रणनीतिक मौजूदगी मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। चिली और अर्जेंटीना के साथ बढ़ते संबंध इसी रणनीति का हिस्सा हैं। भारत का लक्ष्य केवल व्यापार बढ़ाना नहीं, बल्कि नए बाजारों तक पहुंच बनाने के साथ-साथ लिथियम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों और भरोसेमंद सप्लाई चेन को सुरक्षित करना भी है। चिली के साथ व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते यानी CEPA पर बातचीत को इस साल के अंत तक पूरा करने की कोशिश जारी है।
चिली के साथ CEPA बातचीत में तेजी
26 अगस्त को वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने सैंटियागो में चिली की उप-वाणिज्य मंत्री पाउला एस्तेवेज वाइनस्टीन से मुलाकात की। इस दौरान प्रस्तावित CEPA को लेकर चर्चा आगे बढ़ाई गई। समझौते में हेल्थकेयर, फार्मास्यूटिकल्स, ऊर्जा, खनिज, कृषि, मशीनरी और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों को प्रमुखता दी जा रही है। दोनों देशों के बीच पहले से प्रिफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट (PTA) लागू है, जिसका 2016 में विस्तार किया गया था। अब CEPA के जरिए व्यापार और निवेश के दायरे को और व्यापक बनाने की तैयारी है।
दोनों देशों का व्यापार तेजी से बढ़ा
भारत और चिली के बीच आर्थिक संबंधों में लगातार विस्तार देखा जा रहा है। वर्ष 2025 में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार करीब 5.38 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि 2024 में यह लगभग 3.84 अरब डॉलर था। इस दौरान भारत का चिली को निर्यात करीब 1.41 अरब डॉलर रहा, जबकि चिली से भारत का आयात लगभग 3.97 अरब डॉलर दर्ज किया गया। प्रस्तावित CEPA से दोनों देशों के कारोबारियों को बाजार में बेहतर पहुंच मिलने और निवेश के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
लिथियम और क्रिटिकल मिनरल्स पर भारत की नजर
चिली भारत के लिए केवल एक महत्वपूर्ण व्यापारिक बाजार नहीं है, बल्कि क्रिटिकल मिनरल्स की दृष्टि से भी बेहद अहम है। CEPA वार्ता में बाजार पहुंच के साथ महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़े मुद्दे भी चर्चा का हिस्सा हैं। चिली लिथियम, तांबा और चांदी जैसे खनिजों के प्रमुख वैश्विक उत्पादकों और निर्यातकों में शामिल है। लिथियम और अन्य खनिज इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा क्लीन-टेक उद्योग के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसलिए चिली के साथ मजबूत साझेदारी भारत की भविष्य की औद्योगिक सप्लाई चेन को मजबूती दे सकती है।
अर्जेंटीना के साथ व्यापारिक रिश्तों में नया विस्तार
भारत ने अर्जेंटीना के साथ भी आर्थिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। 24 अगस्त को ब्यूनस आयर्स में इंडिया-अर्जेंटीना जॉइंट ट्रेड कमिटी की चौथी बैठक आयोजित हुई। राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में भारत का एक बड़ा कारोबारी प्रतिनिधिमंडल अर्जेंटीना पहुंचा, जिसमें 25 से अधिक कारोबारी नेता शामिल थे। वर्ष 2025 में दोनों देशों का व्यापार 6.5 अरब डॉलर से अधिक रहा। इसके साथ ही भारत अर्जेंटीना के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल हो गया है।
भारतीय दवा कंपनियों के लिए खुल सकता है रास्ता
अर्जेंटीना ने भारतीय फार्मास्युटिकल उत्पादों के लिए नियामकीय बाधाओं को कम करने की दिशा में काम करने की प्रतिबद्धता जताई है। भारत को Annex II से Annex I में अपग्रेड करने की प्रक्रिया आगे बढ़ने से भारतीय दवा कंपनियों के लिए अर्जेंटीना के बाजार में प्रवेश आसान हो सकता है। इससे फार्मा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को नई गति मिलने की संभावना है।
लिथियम प्रोजेक्ट पर भी भारत का फोकस
क्रिटिकल मिनरल्स के मामले में भारत ने अर्जेंटीना में भी अपनी गतिविधियां बढ़ाई हैं। सरकारी कंपनी KABIL के माध्यम से कैटामारका में लिथियम प्रोजेक्ट पर काम आगे बढ़ाया जा रहा है। परियोजना के दूसरे चरण की ड्रिलिंग पूरी हो चुकी है। इसके अलावा साल्टा और जुजुय प्रांतों में भी संभावित अवसरों की तलाश की जा रही है। इससे भारत को भविष्य में बैटरी और इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के लिए जरूरी कच्चे माल की आपूर्ति सुरक्षित करने में मदद मिल सकती है।
5G, AI और स्पेस टेक्नोलॉजी पर सहयोग
भारत और अर्जेंटीना के बीच सहयोग अब पारंपरिक व्यापार से आगे बढ़कर तकनीकी क्षेत्रों तक पहुंच रहा है। दोनों देशों ने 5G, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, एविएशन और अंतरिक्ष तकनीक में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की है। ISRO और अर्जेंटीना की अंतरिक्ष एजेंसी CONAE के बीच प्रस्तावित बैठक भी इसी व्यापक तकनीकी साझेदारी का हिस्सा है।
चीन के लिए भी बढ़ सकता है रणनीतिक महत्व
लैटिन अमेरिका में भारत की बढ़ती सक्रियता का व्यापक रणनीतिक महत्व है। चिली और अर्जेंटीना के साथ मजबूत होते संबंध भारत को नए बाजारों के साथ-साथ लिथियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों तक पहुंच उपलब्ध करा सकते हैं। इससे भारत अपनी वैश्विक सप्लाई चेन को ज्यादा विविध बना सकेगा। हालांकि, भारत की यह नीति किसी एक देश के खिलाफ कदम के तौर पर नहीं देखी जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य नए बाजारों, निवेश के अवसरों और रणनीतिक संसाधनों तक भारत की पहुंच को मजबूत करना है।
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