Mohammad Deepak Case : मोहम्मद दीपक को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, FIR पर रोक, सोशल मीडिया आदेश भी स्टे

कोटद्वार के जिम संचालक मोहम्मद दीपक को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी अंतरिम राहत मिली है। कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज FIR में आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी। साथ ही उत्तराखंड हाईकोर्ट के उस आदेश के क्रियान्वयन पर भी रोक लगाई, जिसमें मामले से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट करने से उन्हें रोका गया था।

Mohammad Deepak Case : देहरादून के जिम संचालक मोहम्मद दीपक को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज FIR में आगे की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। मामला जनवरी में एक मुस्लिम दुकानदार के साथ कथित उत्पीड़न से जुड़ा है। दीपक का दावा है कि वह दुकानदार की सहायता करने के लिए मौके पर पहुंचे थे, लेकिन घटनाक्रम के बाद उन्हीं के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाई कोर्ट के उस आदेश के क्रियान्वयन पर भी रोक लगा दी, जिसमें दीपक को घटना से संबंधित वीडियो और संदेश सोशल मीडिया पर साझा करने से प्रतिबंधित किया गया था।

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दुकान के नाम में ‘बाबा’ शब्द को लेकर शुरू हुआ था विवाद

मामले की शुरुआत जनवरी में हुई एक घटना से बताई जा रही है। आरोप है कि कुछ बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने एक मुस्लिम दुकानदार की दुकान के नाम में ‘बाबा’ शब्द इस्तेमाल किए जाने पर आपत्ति जताई थी। इस दौरान कथित तौर पर दुकानदार को परेशान किए जाने की स्थिति बनी। मोहम्मद दीपक के अनुसार, वह दुकानदार की मदद के लिए वहां पहुंचे थे। इसके बाद उनका कुछ बजरंग दल सदस्यों के साथ विवाद हो गया और उनके खिलाफ भी FIR दर्ज कर दी गई।

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FIR रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे दीपक

इस मामले में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई की। मोहम्मद दीपक ने अपने खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उनकी तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए। उन्होंने उत्तराखंड हाई कोर्ट के उस आदेश को भी चुनौती दी, जिसमें FIR रद्द करने से इनकार किया गया था। दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया।

कोर्ट ने अंतरिम आदेश में दी अहम राहत

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल विवादित FIR में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही हाई कोर्ट के आदेश के क्रियान्वयन पर भी अंतरिम रोक लगा दी गई है। हालांकि, यह राहत फिलहाल अंतरिम है और मामले पर अंतिम फैसला बाद की सुनवाई में होगा। अदालत के इस आदेश से दीपक के खिलाफ चल रही कार्रवाई पर फिलहाल ब्रेक लग गया है।

‘मैं दुकानदार की मदद करने गया था’

सुनवाई के दौरान अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि उनके मुवक्किल एक जिम मालिक हैं और घटना के दिन दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग FIR दर्ज कराई गई थीं। उनका दावा था कि दीपक की शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। सिंघवी ने अदालत को बताया कि विवाद उस मुस्लिम दुकानदार के साथ हुआ था, जिसकी दुकान के नाम में ‘बाबा’ शब्द के इस्तेमाल पर कुछ लोगों ने आपत्ति जताई थी। उनके अनुसार, दीपक केवल उसकी मदद करने के लिए घटनास्थल पर पहुंचे थे।

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‘गुड समैरिटन’ को आरोपी कैसे बनाया जा सकता है?

दीपक के वकील ने अदालत के सामने सवाल उठाया कि यदि कोई व्यक्ति किसी जरूरतमंद की सहायता करने के लिए आगे आता है, तो उसे आपराधिक मुकदमे का सामना क्यों करना पड़े। सिंघवी ने अपने मुवक्किल को इस घटनाक्रम में मदद के लिए पहुंचने वाला व्यक्ति बताते हुए कहा कि ऐसी परिस्थितियों में ‘गुड समैरिटन’ को ही आरोपी बना दिया जाना गंभीर सवाल खड़े करता है।

वीडियो रिकॉर्डिंग को बताया अहम सबूत

सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध है, जिसमें पूरे घटनाक्रम को देखा जा सकता है। उन्होंने हाई कोर्ट के FIR रद्द करने से इनकार करने वाले फैसले पर भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि आदेश में पर्याप्त कारण स्पष्ट नहीं किए गए हैं। दीपक की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि हाई कोर्ट ने दंगा जैसे कुछ आरोपों के लिए आवश्यक कानूनी तत्व नहीं पाए जाने पर उन्हें हटाया, लेकिन अन्य आरोपों के संबंध में जरूरी तत्व कैसे बनते हैं, यह स्पष्ट नहीं किया।

सात साल से कम सजा वाले अपराधों का दिया हवाला

वरिष्ठ अधिवक्ता ने यह भी दलील दी कि दीपक पर लगाए गए अपराधों में अधिकतम सजा सात साल से कम है। ऐसे मामलों में गिरफ्तारी और जांच की प्रक्रिया के दौरान सुप्रीम कोर्ट के निर्धारित दिशानिर्देशों का पालन किया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल को कानूनी प्रक्रिया का पालन करने से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उनके खिलाफ की जा रही कार्रवाई और लगाए गए प्रतिबंधों की वैधता को चुनौती दी गई है।

सोशल मीडिया प्रतिबंध पर भी सुप्रीम कोर्ट की रोक

मामले में सोशल मीडिया को लेकर हाई कोर्ट का आदेश भी महत्वपूर्ण था। हाई कोर्ट ने जांच पूरी होने तक दीपक को घटना से संबंधित वीडियो या संदेश सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करने से रोक दिया था। सिंघवी ने इस आदेश को ‘ब्लैंकेट गैग ऑर्डर’ बताते हुए इसकी वैधता पर सवाल उठाया। अब सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस प्रतिबंध पर भी रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई तक दीपक पर यह सोशल मीडिया प्रतिबंध प्रभावी नहीं रहेगा।

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Chandan Das

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