Goa Nightclub Fire : गोवा के चर्चित Birch by Romeo Lane नाइटक्लब अग्निकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने क्लब के तीन सह-मालिकों को बड़ा झटका दिया है। शीर्ष अदालत ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें तीनों आरोपियों की जमानत रद्द कर दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने सौरभ लूथरा, गौरव लूथरा और अजय गुप्ता को दो सप्ताह के भीतर संबंधित अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।
तीन आरोपियों की अपील हुई खारिज
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने तीनों आरोपियों की ओर से दाखिल अपील पर सुनवाई की। अदालत ने बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही आरोपियों के लिए फिलहाल जमानत पर बाहर रहने का रास्ता बंद हो गया है। अदालत ने मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया।
6 दिसंबर 2025 की रात हुआ था भीषण हादसा
यह पूरा मामला उत्तरी गोवा के अर्पोरा इलाके में स्थित Birch by Romeo Lane नाइटक्लब में 6 दिसंबर 2025 की रात हुई आग की घटना से जुड़ा है। आग इतनी भयावह थी कि हादसे में 25 लोगों की मौत हो गई थी। घटना के बाद सुरक्षा इंतजामों और क्लब के संचालन को लेकर कई गंभीर सवाल उठे थे। हादसे ने गोवा के नाइटलाइफ और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर भी बहस छेड़ दी थी।
सुरक्षा मंजूरियों और फायर सिस्टम पर उठे सवाल
पुलिस जांच के दौरान आरोप लगाया गया कि क्लब पर्याप्त अग्निशमन इंतजाम और जरूरी सुरक्षा मंजूरियों के बिना संचालित किया जा रहा था। जांच एजेंसियों ने यह भी दावा किया कि क्लब में आयोजित इनडोर फायर शो आग फैलने की संभावित वजहों में शामिल था। आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान आवश्यक सुरक्षा सावधानियां नहीं बरती गईं। पुलिस ने क्लब के पास वैध ट्रेड लाइसेंस होने पर भी सवाल उठाए थे।
आग के बाद थाईलैंड चले गए थे लूथरा बंधु
घटना के कुछ घंटे बाद क्लब के सह-मालिक सौरभ लूथरा और गौरव लूथरा के कथित तौर पर थाईलैंड चले जाने की बात सामने आई थी। बाद में दोनों को भारत वापस भेजा गया, जिसके बाद गोवा पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। मामले में केवल क्लब मालिक ही नहीं, बल्कि अन्य साझेदारों, मैनेजर, इवेंट आयोजकों और कर्मचारियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की गई।
आरोपियों पर गंभीर धाराओं में दर्ज है मामला
जांच एजेंसियों ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इनमें गैर-इरादतन हत्या, लोगों की जान को खतरे में डालने वाले कृत्य और आग से जुड़ी कथित लापरवाही जैसे आरोप शामिल हैं। अदालत में इन आरोपों की कानूनी जांच और सुनवाई आगे जारी रहेगी।
पहले सेशन कोर्ट ने दी थी तीनों को जमानत
इस मामले में उत्तरी गोवा के मापुसा स्थित अतिरिक्त सत्र अदालत ने तीनों आरोपियों को जमानत प्रदान की थी। अजय गुप्ता को 23 मार्च को, जबकि सौरभ और गौरव लूथरा को 1 अप्रैल को जमानत मिली थी। गोवा सरकार ने इस फैसले को चुनौती देते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया था।
हाई कोर्ट ने 19 अगस्त को जमानत की रद्द
राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट की जस्टिस नीला गोखले ने 19 अगस्त को तीनों आरोपियों की जमानत रद्द कर दी थी। हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद आरोपियों ने राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हालांकि, शीर्ष अदालत से भी उन्हें राहत नहीं मिली और हाई कोर्ट का फैसला बरकरार रहा।
अब दो सप्ताह में करना होगा सरेंडर
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद सौरभ लूथरा, गौरव लूथरा और अजय गुप्ता को दो सप्ताह के भीतर अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा। अदालत ने साथ ही ट्रायल कोर्ट से मामले में आरोप तय करने की प्रक्रिया को जल्द पूरा करने का आग्रह किया है, ताकि मुकदमे की कार्यवाही आगे बढ़ सके।
दोनों पक्षों ने अदालत में रखीं अपनी दलीलें
आरोपियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी, श्याम दीवान और सिद्धार्थ दवे ने पक्ष रखा। वहीं गोवा सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू पेश हुए। फिलहाल शीर्ष अदालत के आदेश के बाद मामले में आरोपियों की जमानत समाप्त हो गई है और अब आगे की कार्रवाई ट्रायल कोर्ट में जारी रहेगी।
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