Manipur Violence: मणिपुर के काकचिंग जिले में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी NRC को अपडेट करने की मांग को लेकर आयोजित विरोध प्रदर्शन रविवार रात अचानक हिंसक हो गया। ‘नो एनआरसी, नो सेंसस’ के नारे लगाते हुए सैकड़ों लोग मशाल लेकर सड़कों पर उतरे थे। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच उस समय तनाव बढ़ गया, जब पुलिस ने रैली को आगे बढ़ने से रोक दिया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़कर भीड़ को नियंत्रित करना पड़ा। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों के घायल होने की जानकारी सामने आई है।
आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग हुए शामिल
मशाल रैली में वबागई, हियांगलाम और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। प्रदर्शनकारियों ने राज्य में जनगणना शुरू किए जाने से पहले NRC को अपडेट करने की मांग उठाई। उनका कहना था कि मणिपुर में लंबे समय से जारी जातीय हिंसा के कारण विस्थापित हुए लोगों के पुनर्वास का काम भी प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, इन मुद्दों के समाधान के बिना जनगणना की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल बने रहेंगे।
करीब तीन किलोमीटर लंबी थी विरोध रैली
जानकारी के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों की मशाल रैली लगभग तीन किलोमीटर तक चली। जैसे-जैसे भीड़ काकचिंग जिला मुख्यालय की तरफ बढ़ रही थी, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। पुलिस और सुरक्षाबलों ने केइराक बांध इलाके के पास बैरिकेड लगाकर रैली का रास्ता रोक दिया। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से आगे नहीं बढ़ने और वापस लौट जाने की अपील की। शुरुआत में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बातचीत की कोशिश हुई, लेकिन बाद में स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
रास्ता रोकने के बाद बिगड़ा माहौल
पुलिस द्वारा रैली को आगे जाने से रोकने के बाद भीड़ में नाराजगी बढ़ गई। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों में शामिल कुछ लोगों ने सुरक्षाकर्मियों पर पथराव शुरू कर दिया। अचानक हुए पथराव के बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने की कार्रवाई शुरू की। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षाबलों ने आंसू गैस के कई गोले दागे। इससे वहां कुछ समय के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई और कई लोगों को मामूली चोटें आने की खबर है।
प्रदर्शनकारियों ने NRC को बताया जरूरी
प्रदर्शन में शामिल लोगों का मुख्य जोर NRC अपडेट करने पर रहा। उनका तर्क है कि राज्य में नागरिकों की पहचान से जुड़े मुद्दों को स्पष्ट किए बिना जनगणना की प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावी नहीं हो सकती। प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग रखी कि हिंसा के कारण अपने घरों से विस्थापित हुए हजारों लोगों को उनके मूल क्षेत्रों में सुरक्षित तरीके से वापस बसाया जाए। उनका कहना है कि विस्थापितों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही प्रशासन को आगे की प्रक्रिया तय करनी चाहिए।
विस्थापित लोगों के पुनर्वास पर भी जोर
मणिपुर में लंबे समय से जारी जातीय तनाव के कारण बड़ी संख्या में लोग अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि राहत शिविरों में रह रहे लोगों का स्थायी पुनर्वास अभी भी एक महत्वपूर्ण चुनौती है। उनका मानना है कि नागरिकता और जनगणना से जुड़े किसी भी कदम से पहले विस्थापित परिवारों की वापसी और सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसी मांग को लेकर रैली में ‘नो एनआरसी, नो सेंसस’ के नारे लगाए गए।
मई 2023 से जारी है जातीय संघर्ष
मणिपुर में मई 2023 से मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा का दौर जारी रहा है। इस संघर्ष में अब तक 260 से अधिक लोगों की मौत होने की बात सामने आई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं। कई परिवार लंबे समय से राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। ऐसे में NRC, जनगणना और विस्थापित लोगों की वापसी जैसे मुद्दे राज्य में बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।
काकचिंग में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई
मशाल रैली के दौरान हुई झड़प के बाद प्रशासन ने काकचिंग जिले में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत कर दी है। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी तरह की नई हिंसक घटना को रोकना है। प्रदर्शन के बाद क्षेत्र में तनाव को देखते हुए सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
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