ग्रेटर नोएडा के परी चौक से दिल्ली के कश्मीरी गेट के बीच चलती स्लीपर बस में नाबालिग से कथित गैंगरेप का मामला सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार बस करीब 47 किलोमीटर चली और इस दौरान कोई पुलिस जांच नहीं हुई। ड्राइवर और कंडक्टर को गिरफ्तार किया गया है।
ग्रेटर नोएडा के परी चौक से दिल्ली के कश्मीरी गेट के बीच चलती स्लीपर बस में नाबालिग से कथित गैंगरेप का मामला सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार बस करीब 47 किलोमीटर चली और इस दौरान कोई पुलिस जांच नहीं हुई। ड्राइवर और कंडक्टर को गिरफ्तार किया गया है।

Delhi Bus Gangrape: दिल्ली-एनसीआर में चलती स्लीपर बस में नाबालिग के साथ कथित गैंगरेप की घटना ने राजधानी की महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला 31 अगस्त को FIR दर्ज होने के बाद सामने आया। घटना की तुलना साल 2012 के चर्चित निर्भया कांड से की जा रही है, क्योंकि दोनों मामलों में चलती बस में वारदात की बात सामने आई है। घटना के बाद दिल्ली-एनसीआर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है।


आरोप है कि 4 अगस्त 2026 को नाबालिग के साथ ग्रेटर नोएडा से दिल्ली के कश्मीरी गेट तक सफर के दौरान बस में गैंगरेप किया गया। विपक्ष की ओर से इस बात पर सवाल उठाए जा रहे हैं कि इतनी लंबी दूरी तय करने के बावजूद बस को किसी चेकपोस्ट या सुरक्षा जांच के दौरान नहीं रोका गया। घटना ने सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस घटना को लेकर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि एक नाबालिग बच्ची के साथ स्लीपर बस में करीब 47 किलोमीटर तक कथित तौर पर गैंगरेप हुआ, लेकिन दिल्ली या नोएडा पुलिस को इसकी जानकारी नहीं हो सकी। उन्होंने इस मामले को सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामी से जोड़ते हुए प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल उठाए।
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में कहा कि बस ग्रेटर नोएडा से दिल्ली की ओर जाते हुए नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे, दिल्ली के रिंग रोड और बॉर्डर जैसे महत्वपूर्ण रास्तों से होकर गुजरी। इसके बावजूद कथित तौर पर बस किसी चेकपोस्ट पर नहीं रोकी गई। उन्होंने पूछा कि इतनी लंबी दूरी के दौरान सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी व्यवस्था आखिर कहां थी।
राहुल गांधी ने बस की सीटों पर लगे पर्दों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना है कि पर्दों की वजह से बस के अंदर चल रही गतिविधियां बाहर से दिखाई नहीं देती थीं। उन्होंने सवाल किया कि निर्भया कांड के बाद सार्वजनिक परिवहन की सुरक्षा को लेकर बनाए गए नियमों का पालन आखिर क्यों नहीं हो रहा है।

चलती बस में सामने आए इस मामले ने वर्ष 2012 के निर्भया कांड की यादें फिर ताजा कर दी हैं। उस घटना ने देशभर में महिलाओं की सुरक्षा और यौन अपराधों को लेकर व्यापक आक्रोश पैदा किया था। इसके बाद सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षा बढ़ाने के लिए कई नियम और व्यवस्थाएं लागू की गई थीं। मौजूदा घटना ने उन व्यवस्थाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर बहस शुरू कर दी है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि अपराधियों में प्रशासन का पर्याप्त भय दिखाई नहीं देता। उन्होंने कहा कि अगर सुरक्षा नियमों का प्रभावी तरीके से पालन नहीं होगा तो अपराधियों के हौसले बढ़ सकते हैं। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से यह सुनिश्चित करने की मांग की कि महिलाओं और बच्चियों को सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षित वातावरण मिले।
कांग्रेस नेता ने इस मामले को लेकर केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार दोनों पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि दिल्ली पुलिस और उत्तर प्रदेश पुलिस की जवाबदेही किस तरह तय की जाएगी। राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अधीन आने वाली पुलिस व्यवस्था को लेकर जवाबदेही की मांग की।
राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा कि केवल घटना के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने सार्वजनिक परिवहन की नियमित जांच, निगरानी और सुरक्षा नियमों के सख्त पालन की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना है कि महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा के लिए ऐसी व्यवस्था जरूरी है, जिसमें अपराध होने से पहले ही जोखिम को रोका जा सके।
यह मामला घटना के कई सप्ताह बाद 31 अगस्त को FIR दर्ज होने के बाद सार्वजनिक चर्चा में आया। अब जांच एजेंसियों के सामने घटना से जुड़े तथ्यों की पुष्टि करने, आरोपों की जांच करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की चुनौती है। मामले की जांच के दौरान बस के रूट, यात्रियों, CCTV फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
इस घटना के बाद दिल्ली-एनसीआर में महिलाओं की सुरक्षा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है। विपक्ष सरकार और पुलिस से जवाब मांग रहा है, जबकि मामले की जांच आगे बढ़ रही है। फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षा नियमों को किस तरह प्रभावी बनाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
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