Weekend Habits Cancer Risk: शादी, पार्टी या वीकेंड पर दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताना हर किसी को पसंद होता है। ऐसे मौकों पर लोग खूब मस्ती करते हैं, लेकिन कई बार मनोरंजन के नाम पर शराब, सिगरेट, बीड़ी और गुटखे का सेवन भी शुरू कर देते हैं। महानगरों की तनावपूर्ण जिंदगी और अकेलेपन से राहत पाने के लिए भी कुछ लोग शराब या तंबाकू का सहारा लेते हैं। शुरुआत में ये आदतें सामान्य लग सकती हैं, लेकिन लगातार सेवन शरीर में गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है।
तंबाकू को बताया गया मुंह के कैंसर का बड़ा जोखिम
डॉ. अक्षत मलिक के अनुसार, मुंह के कैंसर के प्रमुख जोखिम कारकों में तंबाकू का सेवन शामिल है। गुटखा, खैनी, जर्दा और तंबाकू वाला पान जैसे स्मोकलेस टोबैको उत्पाद मुंह की अंदरूनी परत और मसूड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। वहीं सिगरेट और बीड़ी के धुएं में मौजूद हानिकारक पदार्थ मुंह तथा सिर और गर्दन से जुड़े कैंसर का जोखिम बढ़ा सकते हैं। इसलिए तंबाकू को किसी भी रूप में सुरक्षित मानना सही नहीं है।
कभी-कभार तंबाकू लेना भी सुरक्षित नहीं
कई लोग मानते हैं कि वे रोजाना सिगरेट या गुटखे का इस्तेमाल नहीं करते, इसलिए उन्हें इससे होने वाला नुकसान नहीं होगा। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार तंबाकू का सेवन किसी भी रूप में जोखिम से पूरी तरह मुक्त नहीं है। अक्सर कभी-कभार शुरू हुई आदत धीरे-धीरे नियमित सेवन में बदल जाती है। खासकर दोस्तों की संगत, पार्टी या वीकेंड के दौरान बार-बार तंबाकू लेने से व्यक्ति को इसकी आदत लग सकती है। इसलिए शुरुआत में ही इस व्यवहार को रोकना बेहतर है।
शराब और तंबाकू साथ लेने पर बढ़ सकता है खतरा
शराब और तंबाकू का एक साथ सेवन विशेष चिंता का विषय माना जाता है। शराब मुंह की अंदरूनी सतह को प्रभावित कर सकती है, जबकि तंबाकू में मौजूद कैंसरकारी रसायन शरीर के लिए नुकसानदायक होते हैं। दोनों का साथ में सेवन मुंह और गले से संबंधित कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकता है। युवाओं में दोस्तों के साथ होने वाली ‘सोशल स्मोकिंग’ को अक्सर गंभीर नहीं माना जाता, लेकिन यही कभी-कभार की आदत आगे चलकर नियमित लत में बदल सकती है।
मुंह में दिखने वाले इन संकेतों को न करें नजरअंदाज
मुंह के कैंसर की शुरुआती पहचान होने पर उपचार के बेहतर परिणाम मिलने की संभावना रहती है। इसलिए कुछ असामान्य लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है। यदि मुंह का कोई छाला दो सप्ताह से अधिक समय तक ठीक न हो, सफेद या लाल पैच दिखाई दे, मुंह खोलने या चबाने में परेशानी हो, लगातार दर्द या जलन महसूस हो या जीभ और मुंह के किसी हिस्से में गांठ अथवा मोटापन नजर आए, तो जांच करानी चाहिए। निगलने में कठिनाई, गर्दन में बिना दर्द वाली गांठ या लंबे समय तक आवाज में बदलाव भी चिकित्सकीय सलाह लेने का कारण हो सकता है।
लक्षण दिखने पर विशेषज्ञ से कराएं जांच
इनमें से कोई लक्षण दिखाई देने पर इसे सामान्य समस्या मानकर लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खुद से दवा लेने के बजाय हेड एंड नेक या ओरल कैंसर विशेषज्ञ से परामर्श लेना बेहतर है। हालांकि ऐसे लक्षण हमेशा कैंसर का संकेत नहीं होते, लेकिन लगातार बने रहने पर उनका कारण जानना जरूरी है। समय पर जांच से समस्या की सही पहचान और जरूरत पड़ने पर उपचार शुरू करने में मदद मिल सकती है।
परिवार का सहयोग छोड़ने में बन सकता है सहारा
तंबाकू की आदत को केवल व्यक्ति की निजी पसंद समझकर छोड़ देना उचित नहीं है। यदि परिवार का कोई सदस्य शादी, पार्टी या भोजन के बाद लगातार गुटखा या सिगरेट लेने लगा है, तो उसे शर्मिंदा करने के बजाय सहयोग और बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए। कई बार व्यक्ति को खुद महसूस नहीं होता कि उसकी ‘सोशल हैबिट’ कब नियमित आदत में बदल गई। परिवार का सकारात्मक सहयोग तंबाकू छोड़ने की कोशिश को आसान बना सकता है।
बिना नशे के भी बनाया जा सकता है यादगार जश्न
वीकेंड या किसी समारोह का आनंद लेने के लिए शराब और तंबाकू जरूरी नहीं हैं। परिवार के साथ समय बिताना, डांस करना, साइकिलिंग, स्विमिंग, वर्कआउट या अपनी पसंद की गतिविधियों में शामिल होना बेहतर विकल्प हो सकते हैं। ऐसे तरीके मनोरंजन के साथ शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी हो सकते हैं। इसलिए जश्न मनाएं, यादें बनाएं, लेकिन ऐसी आदतों से दूरी रखें जो भविष्य में आपकी सेहत के लिए गंभीर परेशानी बन सकती हैं।
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