Janmashtami Advisory : रायपुर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के आयोजन को लेकर धर्म स्तंभ काउंसिल ने प्रदेश के मठ-मंदिरों, मंदिर समितियों और श्रद्धालुओं के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। काउंसिल ने धार्मिक आयोजनों को सनातन परंपरा और धर्मसम्मत विधि के अनुसार संपन्न कराने की अपील की है। एडवाइजरी में खासतौर पर दही-हांडी लूट जैसे कार्यक्रमों के दौरान मंदिर की मर्यादा और पर्व के धार्मिक स्वरूप को बनाए रखने पर जोर दिया गया है।
आधुनिकता के नाम पर परंपरा से समझौता नहीं
धर्म स्तंभ काउंसिल के सभापति डॉ. सौरव निर्वाणी ने कहा कि जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का पावन पर्व है। इसलिए इस अवसर पर होने वाले कार्यक्रमों में आधुनिकता के नाम पर इसकी मूल धार्मिक परंपराओं से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जन्माष्टमी उत्सव में भक्ति, धार्मिक भावना और सनातन परंपरा के साथ मर्यादा का भी विशेष ध्यान रखा जाना जरूरी है।
दही-हांडी को बाल लीला से जोड़कर मनाने की अपील
डॉ. सौरव निर्वाणी के अनुसार दही-हांडी लूट भी भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण परंपरा है। इसलिए इसे केवल मनोरंजन या प्रतियोगिता के तौर पर आयोजित करने के बजाय धार्मिक भावनाओं और परंपरा के अनुरूप मनाया जाना चाहिए। काउंसिल ने प्रदेश के मठ-मंदिरों और मंदिर समितियों से स्थानीय परंपराओं को ध्यान में रखते हुए एडवाइजरी के अनुसार कार्यक्रम आयोजित करने का आग्रह किया है।
मंदिर सनातन संस्कारों के संरक्षण का केंद्र
राम जानकी मंदिर के महंत सुरेंद्र दास ने कहा कि मठ और मंदिर केवल पूजा-अर्चना के स्थान नहीं हैं, बल्कि सनातन संस्कारों, धार्मिक मूल्यों और परंपराओं के संरक्षण के प्रमुख केंद्र भी हैं। ऐसे में जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में भी इन परंपराओं की झलक दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दही-हांडी सहित सभी धार्मिक आयोजन श्रद्धा, अनुशासन और मर्यादा के साथ किए जाना बेहतर है।
पूजा और भजन-कीर्तन को प्राथमिकता देने की सलाह
धर्म स्तंभ काउंसिल की एडवाइजरी में मठ-मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण की विधिवत पूजा-अर्चना, जन्मोत्सव, भजन-कीर्तन, संकीर्तन और झांकी जैसे धार्मिक कार्यक्रमों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। काउंसिल के अनुसार इन आयोजनों के माध्यम से जन्माष्टमी के धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व को श्रद्धालुओं तक पहुंचाया जा सकता है।
दही-हांडी में धार्मिक स्वरूप बनाए रखने पर जोर
एडवाइजरी में दही-हांडी लूट के आयोजन को भी श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और सनातन परंपरा के अनुरूप करने का सुझाव दिया गया है। काउंसिल ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य प्रदेशभर के सभी जन्माष्टमी आयोजनों को एक जैसा बनाना नहीं है। इसके बजाय एडवाइजरी का मकसद मठ-मंदिरों में होने वाले कार्यक्रमों को धर्मसम्मत, मर्यादित और परंपराओं के अनुरूप बनाए रखने के लिए मार्गदर्शन देना है।
धार्मिक भावनाएं आहत करने वाले कार्यक्रमों से बचें
काउंसिल ने आयोजकों से मंदिर परिसरों में धार्मिक अनुशासन और पवित्रता बनाए रखने की अपील की है। साथ ही ऐसे कार्यक्रमों से बचने की सलाह दी गई है, जिनसे किसी की धार्मिक भावना आहत होने की आशंका हो। आयोजकों से कहा गया है कि उत्सव के दौरान धार्मिक वातावरण और मंदिर की गरिमा को प्राथमिकता दी जाए।
भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था जरूरी
जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिरों और आयोजन स्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना रहती है। इसे देखते हुए काउंसिल ने बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की सुविधा एवं सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं करने की अपील की है। आयोजन स्थल पर भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए आयोजकों को आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
भक्ति और परंपरा के साथ मनाएं जन्माष्टमी
धर्म स्तंभ काउंसिल का कहना है कि जन्माष्टमी केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य और सनातन धार्मिक परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। इसलिए पूजा-पाठ से लेकर दही-हांडी तक सभी कार्यक्रमों में धार्मिक भावना, अनुशासन और मर्यादा बनाए रखना जरूरी है। काउंसिल ने मठ-मंदिरों, आयोजकों और श्रद्धालुओं से इसी भावना के साथ जन्माष्टमी मनाने की अपील की है।
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