Jharia Fire: झारखंड के धनबाद जिले के झरिया स्थित लोदना क्षेत्र में गुरुवार को जोरदार धमाके के साथ अचानक जमीन धंस गई। जमीन में गहरी दरारें पड़ने के बाद उनमें से जहरीला काला धुआं और आग की लपटें निकलने लगीं। घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई। लोगों ने सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए प्रशासन और बीसीसीएल प्रबंधन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
बरारी 6 नंबर बस्ती में बढ़ी लोगों की चिंता
ताजा भू-धंसान की घटना लोदना क्षेत्र की बरारी 6 नंबर बस्ती में सामने आई। लगातार बारिश के बीच जमीन धंसने और गोफ बनने की घटनाएं पहले से ही लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। खासकर डेंजर जोन और फायर एरिया में रहने वाले लोगों को हर समय हादसे का डर बना रहता है। जमीन से धुआं और आग निकलने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई।
अवैध खनन और सुरंगों पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों ने घटना के पीछे अवैध तरीके से किए गए कोयला खनन और जमीन के नीचे बनाई गई कथित सुरंगों को जिम्मेदार बताया है। स्थानीय नेता सबूर गोराई ने भी अवैध खनन का आरोप लगाते हुए बीसीसीएल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि भूमिगत स्थिति की जांच और प्रभावित इलाकों की निगरानी समय रहते जरूरी है, ताकि किसी बड़े हादसे को रोका जा सके।
करीब 110 साल से धधक रही झरिया की धरती
झरिया कोयला क्षेत्र में भूमिगत आग का इतिहास करीब 110 साल पुराना है। यहां आग लगने की पहली घटना वर्ष 1916 में दर्ज की गई थी। इसके बाद अवैज्ञानिक खनन, खुली छोड़ी गई खदानों और ऑक्सीजन के संपर्क में आने से कोयले की परतों में स्वतः दहन की प्रक्रिया शुरू हुई। समय के साथ यह आग कई क्षेत्रों तक फैलती गई और झरिया को देश के सबसे गंभीर कोयला अग्नि प्रभावित इलाकों में शामिल कर दिया।
कुछ इलाकों में फिर सक्रिय हुई भूमिगत आग
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 1970 के दशक तक आग प्रभावित क्षेत्र करीब 18 वर्ग किलोमीटर बताया गया था। 2009 के झरिया मास्टर प्लान में 77 साइटों पर 17.32 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र आग से प्रभावित बताया गया। वर्ष 2021 के सर्वे में यह आंकड़ा 27 साइटों पर 1.80 वर्ग किलोमीटर रह गया था। हालांकि, 2015 से 2025 के रिमोट सेंसिंग अध्ययन में कुछ क्षेत्रों में आग के दोबारा सक्रिय होने के संकेत मिले।
करोड़ों टन कोयला आग में जल चुका
झरिया की भूमिगत आग के कारण अब तक करीब 37 मिलियन टन यानी 3.7 करोड़ टन कोयला जलने का अनुमान है। झरिया कोयला क्षेत्र में भारत के बड़े कोकिंग कोयला भंडार मौजूद हैं, लेकिन लंबे समय से जारी आग और भू-धंसान ने खनन गतिविधियों को प्रभावित किया है। कई क्षेत्रों में भूमिगत आग और अस्थिर जमीन के कारण संसाधनों का उपयोग भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
आग और पुनर्वास पर खर्च हुए हजारों करोड़
झरिया की आग पर नियंत्रण पाने और प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए सरकार लंबे समय से योजनाएं चला रही है। जून 2025 में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने संशोधित झरिया मास्टर प्लान को मंजूरी दी। इसके लिए 5,940.47 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है। इस राशि का इस्तेमाल आग नियंत्रण, भराई, ड्रेनेज और पुनर्वास जैसे कार्यों में किया जाना है।
हजारों परिवारों के पुनर्वास की योजना
वर्ष 2009 में झरिया रीहैबिलिटेशन एंड डेवलपमेंट प्लान के तहत फायर और डेंजर जोन में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर बसाने की योजना शुरू हुई थी। अलग-अलग चरणों में कई परिवारों को स्थानांतरित भी किया गया है, लेकिन अब भी बड़ी आबादी के पुनर्वास की जरूरत बनी हुई है। अनुमान के मुताबिक करीब 7,000 से 8,000 परिवारों को अंततः सुरक्षित इलाकों में शिफ्ट किया जाना जरूरी है।
बीसीसीएल टीम ने घटनास्थल का किया निरीक्षण
बरारी 6 नंबर बस्ती में जमीन धंसने की सूचना मिलने के बाद बीसीसीएल की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का निरीक्षण किया। प्रबंधन ने प्रभावित क्षेत्र में भराई कराने का आश्वासन दिया है। हालांकि, स्थानीय लोग केवल तत्काल भराई से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि जमीन के नीचे की स्थिति की वैज्ञानिक जांच, आग और जहरीली गैस के खतरे को नियंत्रित करने तथा क्षेत्र की सुरक्षा के लिए स्थायी उपाय किए जाने चाहिए।
सड़क और बस्ती की सुरक्षा बनी बड़ी चिंता
स्थानीय लोगों के मुताबिक प्रभावित क्षेत्र के आसपास आवागमन भी जोखिम भरा हो सकता है। लक्ष्मी कॉलोनी को जोड़ने वाली मुख्य सड़क की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई है। जानकारों का कहना है कि यदि समय रहते भू-धंसान और भूमिगत आग पर प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो प्रभावित क्षेत्र का दायरा बढ़ सकता है। इससे आसपास रहने वाले परिवारों के साथ-साथ सड़क और अन्य बुनियादी ढांचे पर भी खतरा मंडरा सकता है।
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