El Nino 2027: प्रशांत महासागर में अल नीनो की मजबूत स्थिति को लेकर विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने गंभीर चेतावनी दी है। संगठन के मुताबिक, अल नीनो की मौजूदा परिस्थितियां काफी मजबूत हो चुकी हैं और इसके फरवरी 2027 तक बने रहने की संभावना बेहद अधिक है। दावा किया गया है कि WMO के करीब पांच दशक के इतिहास में पहली बार मौसम पूर्वानुमान नेटवर्क में इतनी मजबूत समानता दिखाई दे रही है। इससे दुनिया के कई हिस्सों में मौसम का सामान्य चक्र प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से काफी ऊपर
मध्य-पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर की समुद्री सतह का तापमान सामान्य स्तर से काफी अधिक दर्ज किया गया है। मई से जुलाई 2026 के दौरान नीनो 3.4 इंडेक्स करीब 1.5 डिग्री सेल्सियस ऊपर था, जो अगस्त के मध्य तक बढ़कर 2.2 से 2.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। समुद्र की सतह के नीचे उप-सतही पानी का तापमान भी सामान्य से करीब 8 डिग्री सेल्सियस अधिक बताया गया है। विशेषज्ञ इसे अल नीनो के मजबूत होने का महत्वपूर्ण संकेत मान रहे हैं।
भारत में बदल सकता है मौसम का पूरा चक्र
मजबूत अल नीनो का असर भारत के मौसम पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार सर्दियों में सामान्य ठंड की अवधि और तीव्रता कम रह सकती है। तापमान अपेक्षाकृत अधिक रहने तथा उत्तर-पूर्वी मानसून की गतिविधियां कमजोर पड़ने से कृषि क्षेत्र पर भी दबाव बढ़ सकता है।
रबी फसलों पर मंडरा रहा खतरा
स्काईमेट के उपाध्यक्ष महेश पालावत के अनुसार, अल नीनो की मजबूत स्थिति भारत में गर्म सर्दियों की वजह बन सकती है। यदि तापमान सामान्य से अधिक रहा तो गेहूं और सरसों जैसी प्रमुख रबी फसलों के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। सर्दियों की अवधि कम होने से किसानों के सामने उत्पादन और सिंचाई से जुड़ी नई चुनौतियां भी पैदा हो सकती हैं।
2027 में भीषण गर्मी की बढ़ सकती है आशंका
यदि अल नीनो 2027 की शुरुआत तक प्रभावी रहता है, तो भारत में अगले साल भीषण गर्मी और लू का खतरा बढ़ सकता है। तापमान में असामान्य वृद्धि के साथ कई क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता पर भी दबाव पड़ने की आशंका है। कृषि, पेयजल और ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है।
कमजोर बारिश से पहले ही बढ़ी खाद्य सुरक्षा की चिंता
फ्लेम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और IPCC लेखक अंजल प्रकाश के अनुसार, अगस्त में बारिश सामान्य से करीब 16 प्रतिशत कम रही है और सितंबर की गतिविधियां भी कमजोर रहने की चिंता है। इससे खरीफ फसलों की पैदावार, जल सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। ऐसे में मजबूत अल नीनो भारत के लिए केवल मौसम संबंधी नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा और आर्थिक जोखिम भी बन सकता है।
संयुक्त राष्ट्र ने भी जताई गंभीर चिंता
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अल नीनो और बढ़ते वैश्विक तापमान को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि ग्रह लगातार गर्म हो रहे हैं और दुनिया ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है, जहां बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं और जलवायु कार्रवाई के बीच मुकाबला तेज हो गया है। उनके मुताबिक, इस चुनौती से निपटने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।
WMO ने आपात तैयारी पर दिया जोर
WMO महासचिव सेलेस्टे साउलो ने भी मौजूदा परिस्थितियों की गंभीरता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मौसम विज्ञान सेवाओं और संयुक्त राष्ट्र की मानवीय एजेंसियों के साथ मिलकर लोगों की जान और आजीविका बचाने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारी की जा रही है। समय रहते चेतावनी और राहत व्यवस्था मजबूत करना महत्वपूर्ण होगा।
ग्लोबल वार्मिंग से बढ़ सकता है अल नीनो का असर
अल नीनो अपने आप में एक प्राकृतिक जलवायु प्रक्रिया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग और मानव-जनित जलवायु परिवर्तन इसके प्रभावों को और गंभीर बना सकते हैं। भारत के लिए कृषि क्षेत्रों में सूखा-रोधी रणनीति, जल प्रबंधन और किसानों को समय पर मौसम आधारित सलाह देना बेहद महत्वपूर्ण होगा। आने वाले महीनों में अल नीनो की दिशा और इसकी तीव्रता पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।
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