Egg Price Hike: चीनी-प्याज के बाद अंडे ने बिगाड़ा बजट, एक साल में 40% तक बढ़े दाम

महंगाई ने आम परिवारों के किचन बजट को एक और झटका दिया है। चीनी और प्याज के बाद अब अंडों की कीमतों में भी तेज उछाल आया है। पिछले एक साल में दाम करीब 35-40 प्रतिशत बढ़े हैं। लेकिन अंडे महंगे होने के पीछे सिर्फ एक वजह नहीं, बल्कि कई कारण काम कर रहे हैं।

Egg Price Hike: महंगाई का असर अब रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर नाश्ते की प्लेट तक साफ दिखाई दे रहा है। पहले चीनी की कीमतों में तेजी आई, फिर प्याज ने रसोई का बजट बिगाड़ा और अब अंडे भी महंगे हो गए हैं। पिछले एक साल में देशभर में अंडों की कीमतों में करीब 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी बताई जा रही है। कई शहरों में खुदरा बाजार में एक अंडा 9 से 10 रुपये तक बिक रहा है, जिससे आम परिवारों के दैनिक खर्च पर सीधा असर पड़ रहा है।

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दिल्ली और कोलकाता में क्या है अंडे का भाव

नेशनल एग कोऑर्डिनेशन कमेटी यानी NECC के 5 सितंबर 2026 के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में एक अंडे की कीमत करीब 6 रुपये है। वहीं कोलकाता में इसका भाव लगभग 6.20 रुपये बताया गया है। ये कीमतें थोक या सुझाए गए भाव के आसपास हैं। हालांकि, खुदरा बाजार में ग्राहकों को इससे अधिक भुगतान करना पड़ रहा है। कई इलाकों में एक अंडा 9 से 10 रुपये तक बिकने की जानकारी है।

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थोक बाजार में भी बढ़ी कीमत

4 सितंबर के आंकड़ों के अनुसार अंडे का थोक और NECC सुझाया गया भाव करीब 4.90 रुपये प्रति अंडा था। इस हिसाब से 30 अंडों की एक ट्रे लगभग 147 रुपये की पड़ रही थी। वहीं 210 अंडों वाली एक पेटी की कीमत करीब 1,029 रुपये बताई गई। थोक और खुदरा कीमतों में अंतर के कारण उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

पोल्ट्री फीड की बढ़ती लागत बनी बड़ी वजह

अंडों की कीमत बढ़ने के पीछे सबसे महत्वपूर्ण कारण पोल्ट्री फीड की बढ़ती लागत बताई जा रही है। मुर्गियों के आहार में मक्का और अन्य अनाज का इस्तेमाल होता है। जब इन कच्चे माल की कीमत बढ़ती है, तो पोल्ट्री फार्म की उत्पादन लागत भी बढ़ जाती है। उद्योग से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक पोल्ट्री की कुल लागत में फीड की हिस्सेदारी करीब 65 से 70 प्रतिशत तक होती है।

मक्का महंगा होने से बढ़ी उत्पादन लागत

मक्का की कीमतों में हुई बढ़ोतरी ने पोल्ट्री कारोबार की लागत को और बढ़ा दिया है। कुछ बाजारों में मक्का करीब 22 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 30 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार मक्का की कीमत करीब 26,500 रुपये प्रति टन बताई जा रही है, जबकि तीन साल पहले यह लगभग 14,000 रुपये प्रति टन थी। लागत में इस बढ़ोतरी का असर अंडों की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है।

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दिसंबर तक और महंगा हो सकता है अंडा

आने वाले महीनों में अंडों की कीमतों पर दबाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। ‘Abhi Eggs’ के मुताबिक दिसंबर तक इनपुट लागत में 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। कंपनी का कहना है कि वह पोल्ट्री फीड में सस्ते विकल्पों का इस्तेमाल नहीं कर रही है। ऐसे में लागत बढ़ने पर इसका असर अंतिम उत्पाद की कीमत पर पड़ सकता है।

बढ़ती मांग से भी कीमतों पर दबाव

अंडों की बढ़ती मांग भी कीमतों में तेजी की एक वजह बताई जा रही है। यदि उत्पादन मांग के मुकाबले कम रहता है, तो बाजार में डिमांड और सप्लाई का अंतर बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में कीमतों पर दबाव बनना स्वाभाविक है। आने वाले त्योहारी और सर्दियों के मौसम में मांग और उत्पादन का संतुलन अंडे के भाव की दिशा तय कर सकता है।

चीनी ने भी बढ़ाया घरेलू बजट का बोझ

अंडे से पहले चीनी की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली है। प्रमुख बाजारों में करीब 48 रुपये किलो बिकने वाली चीनी की कीमत 60 रुपये प्रति किलो के पार पहुंचने की जानकारी है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और हैदराबाद जैसे शहरों में चीनी का भाव करीब 60 रुपये किलो बताया जा रहा है। इससे घरेलू रसोई का मासिक बजट प्रभावित हो रहा है।

प्याज भी हुआ करीब 42 प्रतिशत महंगा

प्याज की कीमतों में भी तेज उछाल दर्ज किया गया है। प्रमुख शहरों में प्याज 50 से 65 रुपये प्रति किलो के बीच बिक रहा है, जबकि देश का औसत खुदरा भाव करीब 50.50 रुपये किलो बताया गया है। अगस्त में औसत कीमत 35.47 रुपये किलो थी, जो सितंबर की शुरुआत में बढ़कर 50.50 रुपये हो गई। पिछले साल इसी अवधि में औसत भाव 28.48 रुपये किलो था। कुछ बाजारों में प्याज 70 से 82 रुपये किलो तक पहुंचने की जानकारी है।

आम आदमी की जेब पर सीधा असर

अंडा, चीनी और प्याज तीनों ही आम परिवारों की रोजमर्रा की जरूरत का हिस्सा हैं। इनकी कीमतों में एक साथ बढ़ोतरी होने से घरेलू बजट पर सीधा दबाव पड़ता है। नाश्ते से लेकर दोपहर और रात के खाने तक महंगाई का असर महसूस किया जा रहा है। यदि आने वाले दिनों में कीमतों में और वृद्धि होती है, तो परिवारों को अपने मासिक खर्च में कटौती और बजट में अतिरिक्त बदलाव करना पड़ सकता है।

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Chandan Das

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