CM मोहन यादव ने युवा शिक्षा अधिकारियों से सीधे संवाद में शिक्षा व्यवस्था को लेकर दिए अहम निर्देश, ‘कोई भी बच्चा पीछे न रहे’ का मंत्र देते हुए 90 प्रतिशत से अधिक रिजल्ट का लक्ष्य तय किया, जानें बैठक में और क्या कहा गया
CM मोहन यादव ने युवा शिक्षा अधिकारियों से सीधे संवाद में शिक्षा व्यवस्था को लेकर दिए अहम निर्देश, ‘कोई भी बच्चा पीछे न रहे’ का मंत्र देते हुए 90 प्रतिशत से अधिक रिजल्ट का लक्ष्य तय किया, जानें बैठक में और क्या कहा गया

MP Education News : शिक्षक दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के युवा शिक्षा अधिकारियों और शिक्षकों के साथ सीधे संवाद किया। 5 सितंबर को इंदौर स्थित सांदीपनि शासकीय अहिल्या आश्रम कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-1 में ‘एजुकेशन डायलॉग’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें प्रदेश के 200 से अधिक युवा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी (DEO), जिला परियोजना समन्वयक (DPC), विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) और शिक्षक शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए युवा अधिकारियों को नेतृत्वकारी भूमिका निभाने का आह्वान किया।


मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि कोई भी बच्चा पढ़ाई से पीछे न छूटे। उन्होंने अधिकारियों को प्रत्येक जिले के परीक्षा परिणाम को 90 प्रतिशत से अधिक करने का लक्ष्य निर्धारित करने को कहा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बेहतर परिणाम केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों की समझ, सीखने की क्षमता और उनके सर्वांगीण विकास में भी सुधार दिखाई देना चाहिए।

‘एजुकेशन डायलॉग’ को सामान्य सरकारी समीक्षा बैठकों से अलग संवाद और अनुभव साझा करने के मंच के रूप में आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से उनके जिलों में सामने आ रही चुनौतियों, स्थानीय स्तर पर किए जा रहे प्रयोगों और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के उपायों के बारे में जानकारी ली। युवा अधिकारियों ने इंटरैक्टिव पैनल, विद्यार्थियों की ऐप आधारित उपस्थिति, सीसीटीवी मॉनिटरिंग और CSR के माध्यम से किए जा रहे विभिन्न नवाचारों की जानकारी भी साझा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा शिक्षा अधिकारियों के पास तकनीक को तेजी से समझने और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप काम करने की क्षमता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे केवल सरकारी आदेशों को लागू करने तक सीमित न रहें। उन्हें अपने जिले की स्थानीय समस्याओं को समझकर स्थानीय स्तर पर प्रभावी समाधान तलाशने चाहिए। ऐसे नवाचार किए जाने चाहिए, जिनका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई और स्कूलों के प्रदर्शन पर दिखाई दे।
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना नहीं होना चाहिए। विद्यार्थियों में विषय को समझने, सवाल पूछने और समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता विकसित करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि बच्चों को ऐसा ज्ञान दिया जाए, जिसका इस्तेमाल वे वास्तविक जीवन की परिस्थितियों में कर सकें। कमजोर विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान, नियमित उपस्थिति और सीखने के स्तर में सुधार को उन्होंने स्कूलों की सफलता के लिए अहम बताया।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि जिन स्कूलों के पास अभी पक्के भवन नहीं हैं, वहां आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा। इसके अलावा विद्यार्थियों की स्कूल तक पहुंच आसान बनाने के लिए विद्यालयों को बस सुविधा से जोड़ने के प्रयास भी किए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य शिक्षा की पहुंच को अधिक व्यापक और सुविधाजनक बनाना है।
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से स्कूल छोड़ने वाले विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि पारिवारिक या अन्य परिस्थितियों के कारण यदि कोई बच्चा पढ़ाई छोड़ देता है तो उसकी शिक्षा वहीं समाप्त नहीं होनी चाहिए। ऐसे बच्चों को ओपन स्कूल सहित शिक्षा जारी रखने के विकल्पों की जानकारी दी जाए। साथ ही, उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार करियर काउंसलिंग भी की जाए।
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से विशेष रूप से छात्राओं को विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध करियर विकल्पों के बारे में जानकारी देने को कहा। उन्होंने मेडिकल सहित अन्य क्षेत्रों में बेटियों के लिए मौजूद संभावनाओं से उन्हें अवगत कराने और आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। उनका कहना था कि सही मार्गदर्शन मिलने पर विद्यार्थी अपनी क्षमता के अनुरूप बेहतर भविष्य बना सकते हैं।
डॉ. यादव ने शिक्षकों से विद्यार्थियों के साथ परिवार जैसा आत्मीय व्यवहार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षक की भूमिका सिर्फ कक्षा में पाठ पढ़ाने तक सीमित नहीं है। वे विद्यार्थियों और उनके परिवारों को सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और उपलब्ध अवसरों से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इससे शिक्षा के साथ सामाजिक विकास को भी गति मिल सकती है।
कार्यक्रम में बताया गया कि प्रदेश में करीब 40 नए DEO, 23 DPC और लगभग 60 BEO पदस्थ किए गए हैं। इन युवा अधिकारियों की औसत उम्र करीब 28 वर्ष बताई गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा नेतृत्व शिक्षा विभाग में नई ऊर्जा और नई सोच ला सकता है। उन्होंने अधिकारियों से रिपोर्ट तैयार करने के बजाय जमीन पर वास्तविक परिणाम दिखाने की अपेक्षा जताई।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों और शिक्षकों से अपने-अपने क्षेत्रों में सफल प्रयोगों और नवाचारों को सोशल मीडिया के माध्यम से साझा करने को कहा। इससे दूसरे जिलों के अधिकारी भी उन प्रयोगों से सीखकर उन्हें अपने क्षेत्र में लागू कर सकेंगे। ‘एजुकेशन डायलॉग’ के जरिए मुख्यमंत्री ने युवा नेतृत्व, तकनीक, नवाचार, बेहतर परीक्षा परिणाम और हर बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया।
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