Naraz Fufa Remark : दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नाराज़ फूफा’ वाले बयान को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह हर साल विपक्ष के लिए नए-नए विशेषण गढ़ते हैं। पार्टी का कहना है कि ऐसे राजनीतिक बयानों के जरिए सरकार की कथित नाकामियों और जनता से जुड़े अहम सवालों से ध्यान भटकाने की कोशिश की जाती है।
खरगे ने प्रधानमंत्री के भाषण पर उठाए सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी के SRCC में दिए भाषण पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के लिए यह देश के युवाओं, शिक्षा और उनके भविष्य से जुड़े मुद्दों पर संवाद करने का महत्वपूर्ण अवसर था। लेकिन उनके मुताबिक, युवाओं के सवालों पर चर्चा करने के बजाय प्रधानमंत्री का संबोधन एक और राजनीतिक अभियान में बदल गया।
विपक्ष पर नए विशेषण लगाने का लगाया आरोप
खरगे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की राजनीतिक कार्यशैली में लोकतंत्र के भीतर उठने वाले सवालों को दबाना और विपक्ष के लिए नए-नए विशेषणों का इस्तेमाल करना शामिल है। उन्होंने ‘नाराज़ फूफा’, ‘दिमागी नक्सल’, ‘अर्बन नक्सल’, ‘खान मार्केट गैंग’, ‘आंदोलनजीवी’ और ‘परजीवी’ जैसे शब्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि विपक्ष के लिए शब्द बदलते रहते हैं, लेकिन सरकार से जुड़े सवाल अपनी जगह कायम हैं।
‘विशेषण बदलते हैं, नीतियां नहीं’
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपनी पोस्ट में कहा कि सरकार की नीतियों और कथित जनविरोधी मुद्दों में बदलाव नहीं आया है, लेकिन विपक्ष के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले विशेषण समय के साथ बदलते रहते हैं। खरगे ने बेरोजगारी, लंबे समय से लंबित सरकारी भर्तियों और पेपर लीक से परेशान छात्रों का मुद्दा उठाया। उन्होंने महंगी होती शिक्षा, छात्रवृत्ति के घटते अवसर और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर कथित दबाव को लेकर भी सरकार से सवाल किए।
युवाओं के ‘रिपोर्ट कार्ड’ का किया जिक्र
खरगे ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में देश की उपलब्धियों का ‘रिपोर्ट कार्ड’ सामने रखा है, लेकिन देश के युवा भी अपना रिपोर्ट कार्ड लेकर खड़े हैं। उन्होंने युवाओं से जुड़े रोजगार और शिक्षा के मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने की बात कही। कांग्रेस नेता के मुताबिक, युवाओं की वास्तविक समस्याओं पर चर्चा होना राजनीतिक बयानबाजी से ज्यादा जरूरी है।
पवन खेड़ा ने भी प्रधानमंत्री पर साधा निशाना
कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने भी पीएम मोदी के बयान की आलोचना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के पद पर लंबे समय तक रहने के बाद यदि युवाओं के सामने कोई स्पष्ट विजन या प्रेरणादायक संदेश रखने के बजाय विपक्ष पर व्यक्तिगत टिप्पणियां की जाती हैं, तो यह सरकार के पास ‘विचार और सार’ की कमी को दर्शाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री के संबोधन की राजनीतिक दिशा पर सवाल उठाए।
पीएम मोदी ने आर्थिक विकास का किया जिक्र
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को SRCC के शताब्दी समारोह में भारत की अर्थव्यवस्था और विकास को लेकर सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने देश की 7.8 प्रतिशत GDP वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि युद्ध और वैश्विक व्यापार में व्यवधान जैसी चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। प्रधानमंत्री ने रोजगार के अवसर पैदा होने का भी दावा किया।
‘Fragile Five’ को लेकर कांग्रेस पर निशाना
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने पिछली सरकारों के आर्थिक रिकॉर्ड पर भी निशाना साधा। उन्होंने उन लोगों का जिक्र किया, जिनके शासनकाल में भारत को ‘Fragile Five’ अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता था। मोदी ने कहा कि ऐसे लोग वर्तमान में भारत की आर्थिक वृद्धि के आंकड़ों को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का भी उल्लेख किया और कहा कि लाल किले से इस शब्द के इस्तेमाल के बाद कुछ लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी।
क्या है ‘नाराज़ फूफा’ वाली टिप्पणी?
प्रधानमंत्री ने छात्रों से समाज और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका पर चर्चा करते हुए कहा कि कॉलेज से बाहर निकलने के बाद उन्हें दो तरह के लोग देखने को मिलेंगे। एक वर्ग ऐसा होगा जो समाज की शक्ति को राष्ट्र की शक्ति में बदलने के लिए सकारात्मक योगदान देगा। वहीं दूसरा वर्ग ऐसा होगा जो किसी काम की शुरुआत होते ही ‘नाराज़ फूफा’ की भूमिका में आ जाएगा। कांग्रेस ने इसी टिप्पणी को विपक्ष पर राजनीतिक हमला बताते हुए प्रधानमंत्री पर पलटवार किया है।
बयानबाजी से आगे युवाओं के मुद्दों पर बहस
SRCC समारोह के बाद सामने आया यह विवाद एक बार फिर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को सामने लाता है। कांग्रेस जहां बेरोजगारी, शिक्षा और भर्ती जैसे मुद्दों को लेकर सरकार से जवाब मांग रही है, वहीं प्रधानमंत्री अपने संबोधन में आर्थिक विकास और राष्ट्रीय उपलब्धियों को प्रमुखता दे रहे हैं। अब ‘नाराज़ फूफा’ टिप्पणी को लेकर दोनों पक्षों की सियासी बयानबाजी और तेज होने के आसार हैं।
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