Amit Shah News : गोवा के डोना पॉला में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था में पिछले कुछ वर्षों के दौरान हुए बदलावों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के समय देश के सामने आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी कई गंभीर चुनौतियां थीं। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद, पूर्वोत्तर में हिंसक उग्रवाद और देश के कई हिस्सों में नक्सलवाद सरकार के लिए बड़ी चुनौती बने हुए थे।
आतंकवाद और बम धमाकों से देश के सामने थी चुनौती
अमित शाह ने कहा कि एक समय देश के अलग-अलग हिस्सों में लगातार बम धमाकों की घटनाएं होती थीं। इसके साथ ही महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठते थे। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और अलगाववाद की समस्या लंबे समय से बनी हुई थी, जबकि पूर्वोत्तर के कई इलाकों में उग्रवादी गतिविधियां जारी थीं। उन्होंने दावा किया कि पिछले वर्षों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए व्यापक स्तर पर कदम उठाए गए।
अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीर में बदलाव का दावा
गृह मंत्री ने कहा कि 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद घाटी की स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। उनके मुताबिक, अलगाववाद की भावना में काफी कमी आई है और आतंकवाद से जुड़ी घटनाएं भी लगातार कम हुई हैं। शाह ने कहा कि कश्मीर में मानसिक दूरियां कम हुई हैं और अब क्षेत्र विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने इसे देश की आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में सफलता का दावा
अमित शाह ने नक्सलवाद को लेकर भी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि दशकों से देश के सामने मौजूद नक्सलवाद की समस्या अब काफी हद तक समाप्त हो चुकी है। उनके अनुसार, कभी बड़े क्षेत्र में ‘रेड कॉरिडोर’ बनाने का सपना देखने वाले कई लोगों ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का रास्ता चुना है। सरकार का लक्ष्य प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा के साथ विकास को गति देना भी है।
पूर्वोत्तर में हजारों युवाओं ने छोड़ा हिंसा का रास्ता
पूर्वोत्तर भारत की स्थिति का जिक्र करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि करीब 10 हजार युवाओं ने आत्मसमर्पण किया है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में 14 से अधिक शांति समझौतों के जरिए लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के समाधान की दिशा में प्रयास किए गए हैं। शाह के मुताबिक, इन समझौतों और सुरक्षा अभियानों के चलते पूर्वोत्तर में शांति और विकास का नया दौर शुरू हुआ है।
274 भगोड़ों को भारत लाने का दावा
आर्थिक अपराध कर विदेशों में छिपने वाले भगोड़ों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी देते हुए अमित शाह ने कहा कि 2019 से जुलाई 2026 के बीच 36 देशों से 274 भगोड़ों का प्रत्यर्पण कराया गया। इन लोगों को भारतीय कानून के तहत न्यायिक प्रक्रिया का सामना करने के लिए वापस लाया गया। उन्होंने कहा कि सरकार ने ऐसे अपराधियों पर कार्रवाई के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और जांच एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया है।
भारत-पोल सिस्टम से एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल
गृह मंत्री के मुताबिक, भगोड़ों पर शिकंजा कसने के लिए ‘भारत-पोल’ नाम का एक विशेष सिस्टम तैयार किया गया है। इसके जरिए 14 से अधिक केंद्रीय एजेंसियों और सभी राज्यों की पुलिस को आपस में जोड़ा गया है। शाह ने दावा किया कि इस व्यवस्था की मदद से भगोड़ों की करीब 17,874 करोड़ रुपये की संपत्तियां सील की जा चुकी हैं। इसका उद्देश्य आर्थिक अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाना है।
साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 बनी सुरक्षा कवच
अमित शाह ने साइबर अपराध से निपटने के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह हेल्पलाइन आम लोगों के लिए साइबर धोखाधड़ी के मामलों में महत्वपूर्ण सुरक्षा व्यवस्था बन चुकी है। इसके साथ ही देश में लागू किए गए तीन नए आपराधिक कानूनों के परिणाम भी सामने आने लगे हैं। उन्होंने कहा कि नए कानूनी प्रावधानों से जांच और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल रही है।
गोवा पुलिस की दोषसिद्धि दर का दिया उदाहरण
गोवा पुलिस की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए शाह ने कहा कि नए आपराधिक कानूनों के बाद राज्य की कनविक्शन रेट में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उनके अनुसार, गोवा पुलिस ने दोषसिद्धि दर को 22 प्रतिशत से बढ़ाकर 53.2 प्रतिशत तक पहुंचाया है। उन्होंने इसे कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और जांच व्यवस्था में सुधार का उदाहरण बताया।
2029 तक भारत को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य
गृह मंत्री ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2029 तक भारत को ‘ड्रग-फ्री’ बनाने का लक्ष्य तय किया है। उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों का कारोबार केवल सामाजिक समस्या नहीं है, बल्कि इससे मिलने वाला पैसा आतंकवादी गतिविधियों को भी बढ़ावा दे सकता है। इसलिए ड्रग नेटवर्क पर कार्रवाई को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है।
NCORD और राज्यों की एजेंसियां मिलकर करेंगी कार्रवाई
नशे के खिलाफ अभियान को मजबूत करने के लिए सरकार NCORD और राज्यों की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दे रही है। अमित शाह ने कहा कि केंद्र और राज्य एजेंसियों के साझा प्रयासों से नशीले पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। सरकार का लक्ष्य सुरक्षित, नशामुक्त और मजबूत भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ना है।
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