Satya Niketan Building Collapse : दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में इमारत ढहने की घटना पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दुख जताया है। उन्होंने हादसे को बेहद दर्दनाक और चिंताजनक बताया। घटना के बाद कई लोगों के मलबे में दबे होने की खबर सामने आई, जिनमें दिल्ली यूनिवर्सिटी के कई छात्र भी शामिल बताए गए। हादसे की गंभीरता को देखते हुए राहत और बचाव अभियान तेज करने की जरूरत पर राहुल गांधी ने जोर दिया।
हर छात्र तक पहुंचने की राहुल गांधी ने की अपील
राहुल गांधी ने कहा कि सत्य निकेतन में इमारत गिरने की खबर बेहद दर्दनाक और चिंताजनक है। उन्होंने अपील की कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), दिल्ली फायर सर्विस और मौके पर मौजूद सभी बचाव दल हर संभव प्रयास करें, ताकि मलबे में फंसे प्रत्येक व्यक्ति तक जल्द से जल्द पहुंचा जा सके। उन्होंने घायलों को तत्काल बेहतर से बेहतर इलाज उपलब्ध कराने की भी मांग की।
कांग्रेस और NSUI कार्यकर्ता मौके पर मौजूद
राहुल गांधी ने बताया कि कांग्रेस और NSUI के कार्यकर्ता भी घटनास्थल पर मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ता राहत और बचाव कार्य में हर संभव मदद के लिए तैयार हैं। उन्होंने इस मुश्किल समय में हादसे के पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ खड़े होने की बात कही। साथ ही बचाव अभियान में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरतने की अपील की।
छात्रों की रहने की व्यवस्था पर उठाए सवाल
राहुल गांधी ने हादसे को छात्रों की सुरक्षा और रहने की व्यवस्था से भी जोड़ते हुए चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि छात्रों का जीवन पहले से ही कई तरह के संघर्षों से भरा है और अब उनके सामने हालात जानलेवा हो गए हैं। उन्होंने कॉलेज और विश्वविद्यालयों में पर्याप्त हॉस्टल सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया।
PG में बड़ी संख्या में रहने को मजबूर छात्र
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि अच्छे हॉस्टल उपलब्ध नहीं होने के कारण कई छात्र PG में रहने के लिए मजबूर हैं। उनके मुताबिक, कई जगहों पर एक ही छत के नीचे करीब 40-40 छात्र अमानवीय परिस्थितियों में रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों के रहने की सुरक्षित और बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी है, क्योंकि हर छात्र का जीवन कीमती है।
छात्रों की सुरक्षा को बताया सबसे अहम
राहुल गांधी ने कहा कि प्रत्येक छात्र की जान कीमती है और उसकी सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य में जुटी एजेंसियों से पूरी क्षमता के साथ अभियान चलाने की अपील की। उनका कहना है कि मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए।
एम्स ने हादसे को लेकर जारी किया बयान
सत्य निकेतन इमारत हादसे के संबंध में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की ओर से भी बयान जारी किया गया है। एम्स के मुताबिक, इमारत गिरने की घटना में घायल चार मरीजों को जय प्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर लाया गया। इनमें दो मरीजों की हालत गंभीर बताई गई है।
एक बचावकर्मी को इलाज के बाद मिली छुट्टी
एम्स के बयान के अनुसार, अस्पताल लाए गए घायलों में एक व्यक्ति बचावकर्मी था। इलाज के बाद उसकी स्थिति में सुधार होने पर उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। वहीं, एक अन्य मरीज को अस्पताल में मृत अवस्था में लाया गया था। हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान के साथ घायलों को अस्पताल पहुंचाने का सिलसिला जारी रहा।
हादसे ने फिर बढ़ाई सुरक्षा व्यवस्था की चिंता
सत्य निकेतन में इमारत ढहने की घटना ने छात्रों और युवाओं के लिए सुरक्षित आवास व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। जहां एक ओर बचाव दल मलबे में फंसे लोगों को निकालने में जुटे हैं, वहीं राजनीतिक स्तर पर भी हादसे के कारणों और छात्रों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। फिलहाल घायलों के इलाज और राहत-बचाव अभियान पर सभी की नजर बनी हुई है।
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