Sindh Division Row : पाकिस्तान के सिंध प्रांत में नए प्रशासनिक यूनिट बनाने और प्रांत के विभाजन से जुड़े प्रस्तावों को सिंध विधानसभा ने सर्वसम्मति से खारिज कर दिया है। कराची को सिंध से अलग करने या अलग दक्षिणी प्रांत बनाने की चर्चाओं के बीच विधानसभा में नेताओं ने स्पष्ट कर दिया कि वे सिंध की क्षेत्रीय एकता से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं करेंगे। इस रुख को पाकिस्तान की मौजूदा राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
असीम मुनीर और मोहसिन नकवी पर निशाना
सिंध विधानसभा में हुई चर्चा के दौरान पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर और गृह मंत्री मोहसिन नकवी की नीतियों को लेकर भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। रिपोर्टों में नए प्रांतों के विचार को मुनीर और नकवी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर पाकिस्तान के राजनीतिक दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं और सिंध में इसका खुलकर विरोध किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने साफ किया रुख
सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने प्रांत की क्षेत्रीय अखंडता को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट किया। स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि उनकी सरकार सिंध की एकता से कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रांत के विभाजन जैसे मुद्दे पर जिस स्तर पर चर्चा होनी चाहिए थी, वहां इसे पर्याप्त रूप से नहीं उठाया गया और ऊपर से इसे थोपने की कोशिश की जा रही है।
‘सिंध को बांटने की कोशिश बर्दाश्त नहीं’
मुराद अली शाह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सिंध के विभाजन को स्वीकार नहीं किया जाएगा। विधानसभा में कई नेताओं ने भी इसी तरह का कड़ा रुख अपनाया। सामने आए वीडियो में कुछ नेताओं ने सिंध की जमीन और एकता की रक्षा के लिए पद छोड़ने तथा जरूरत पड़ने पर सड़कों पर उतरने तक की बात कही। इससे विधानसभा में इस मुद्दे की संवेदनशीलता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
बलूचिस्तान जैसे हालात की दी चेतावनी
सिंध के नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर प्रांत के विभाजन की कोशिश आगे बढ़ाई गई तो हालात गंभीर हो सकते हैं। कुछ नेताओं ने बलूचिस्तान का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पहले से ही अस्थिरता और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां मौजूद हैं। उनका कहना था कि सिंध को बांटने के बाद कानून-व्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा, इसका अनुमान लगाना मुश्किल होगा।
क्या है पाकिस्तान में नए प्रांत बनाने का प्रस्ताव?
पाकिस्तान में मौजूदा चार प्रांतों को बढ़ाकर 12 से 15 प्रांतों में बांटने का प्रस्ताव चर्चा में है। इसके समर्थकों का तर्क है कि छोटे प्रशासनिक क्षेत्रों से शासन व्यवस्था बेहतर हो सकती है और विकास को गति मिल सकती है। वहीं, कई राजनीतिक दल इस विचार से सहमत नहीं हैं। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) भी सिंध के विभाजन को लेकर असहमति जताती रही है।
मोहसिन नकवी नए प्रांतों के पक्ष में
पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी नए प्रशासनिक प्रांतों की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं। उनके अनुसार, प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नए प्रांतों पर विचार किया जाना चाहिए। लेकिन सिंध में इस विचार को लेकर राजनीतिक विरोध तेज है। यही वजह है कि नए प्रांतों का मुद्दा पाकिस्तान की राजनीति में एक संवेदनशील विषय बन गया है।
आसिफ जरदारी और बिलावल की स्थिति
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के वरिष्ठ नेता आसिफ अली जरदारी और बिलावल भुट्टो जरदारी को सिंध के विभाजन के प्रस्ताव के खिलाफ माना जा रहा है। सिंध PPP का मजबूत राजनीतिक आधार है, इसलिए प्रांत के विभाजन का मुद्दा पार्टी के लिए सीधे तौर पर राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। पार्टी के सामने अपनी सरकार और सिंधी मतदाताओं के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती है।
लंदन में जरदारी से मिले मोहसिन नकवी
PPP नेता और पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी इस समय लंदन में हैं। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि नए प्रांतों के मुद्दे को लेकर उनके नाराज होने की चर्चा है। इसी बीच गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने लंदन जाकर जरदारी से मुलाकात की। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच नए प्रांतों और खासकर सिंध तथा बलूचिस्तान को लेकर चर्चा हुई।
सिंध और बलूचिस्तान को लेकर पेच कायम
आसिफ जरदारी के लिए सिंध और बलूचिस्तान का विभाजन राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील मुद्दा है। सिंध में किसी भी तरह के विभाजन से PPP को राजनीतिक नुकसान की आशंका है, जबकि बलूचिस्तान में पहले से जारी उग्रवादी हिंसा और सुरक्षा चुनौतियां स्थिति को और जटिल बनाती हैं। ऐसे में पाकिस्तान में नए प्रांतों का प्रस्ताव फिलहाल राजनीतिक सहमति से काफी दूर दिखाई देता है।
सिंध के विरोध से बढ़ी पाकिस्तान की सियासी हलचल
सिंध विधानसभा के सर्वसम्मत विरोध ने नए प्रांतों की बहस को पाकिस्तान की राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है। एक तरफ प्रशासनिक सुधार के नाम पर नए प्रांतों की मांग सामने आ रही है, तो दूसरी ओर सिंध के नेता इसे अपनी क्षेत्रीय पहचान और राजनीतिक अधिकारों से जोड़कर देख रहे हैं। आने वाले समय में इस मुद्दे पर केंद्र और सिंध सरकार के बीच टकराव बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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