CG Govt Employee Suspension Rules : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सरकारी कर्मचारियों के निलंबन की अवधि को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अगर किसी कर्मचारी को निलंबन के 90 दिनों के भीतर विभागीय चार्जशीट जारी कर दी गई है, तो केवल निलंबन अवधि बढ़ाने का आदेश समय पर जारी नहीं होने से निलंबन अपने आप खत्म नहीं माना जाएगा। इस फैसले के साथ डिवीजन बेंच ने हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के उस आदेश को पलट दिया है, जिसमें देरी से जारी किए गए एक्सटेंशन आदेश को रद्द कर दिया गया था।
नियम 9 के तहत हाईकोर्ट ने स्थिति की स्पष्ट
डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम, 1966 के नियम 9 की व्याख्या की। अदालत के मुताबिक, यदि निलंबित कर्मचारी को 90 दिनों के भीतर विभागीय आरोप-पत्र यानी चार्जशीट दे दी जाती है, तो निलंबन को आगे बढ़ाने का अलग आदेश तत्काल जारी न होने मात्र से निलंबन स्वतः समाप्त नहीं होता। कोर्ट ने माना कि इस तरह की स्थिति में केवल एक्सटेंशन आदेश में देरी को आधार बनाकर कर्मचारी को स्वतः बहाल नहीं किया जा सकता।
कोरबा कलेक्टोरेट के कर्मचारी से जुड़ा मामला
यह पूरा मामला कोरबा कलेक्टोरेट में सहायक ग्रेड-3 के पद पर कार्यरत शिवम सहाय चौहान से जुड़ा है। उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होने के बाद 25 मार्च 2022 को निलंबन की कार्रवाई की गई थी। इसके बाद विभाग ने निर्धारित अवधि के भीतर 20 अप्रैल 2022 को उन्हें विभागीय चार्जशीट भी जारी कर दी थी। यानी निलंबन के 90 दिनों के भीतर विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी।
करीब डेढ़ साल बाद जारी हुआ एक्सटेंशन आदेश
कर्मचारी के निलंबन को आगे बढ़ाने का आदेश हालांकि काफी देर से जारी किया गया। विभाग की ओर से निलंबन अवधि बढ़ाने का आदेश 28 अगस्त 2023 को जारी हुआ, जो मूल निलंबन के करीब डेढ़ साल बाद था। इसी देरी को आधार बनाकर कर्मचारी ने हाईकोर्ट का रुख किया और दलील दी कि इतने लंबे अंतराल के बाद जारी किया गया निलंबन विस्तार आदेश नियमों के अनुरूप नहीं है।
सिंगल बेंच ने निलंबन और एक्सटेंशन किया था रद्द
कर्मचारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने निलंबन अवधि बढ़ाने में हुई देरी को महत्वपूर्ण माना था। सिंगल बेंच ने कर्मचारी के निलंबन आदेश और बाद में जारी किए गए एक्सटेंशन आदेश को रद्द करते हुए बहाली का निर्देश दिया था। इस फैसले के खिलाफ छत्तीसगढ़ शासन ने डिवीजन बेंच के समक्ष अपील दाखिल की।
डिवीजन बेंच ने शासन की अपील स्वीकार की
डिवीजन बेंच ने शासन की अपील स्वीकार करते हुए सिंगल बेंच के पूर्व आदेश को निरस्त कर दिया। अदालत ने कहा कि कर्मचारी को 90 दिनों के भीतर विभागीय चार्जशीट दी जा चुकी थी। ऐसे में केवल निलंबन विस्तार आदेश जारी करने में हुई देरी के कारण निलंबन को स्वतः समाप्त मानने का प्रावधान इस मामले में लागू नहीं होगा।
90 दिन की समयसीमा को लेकर कोर्ट की अहम टिप्पणी
अदालत ने यह भी कहा कि 90 दिनों की समयसीमा को इस तरह पूर्ण और अलग-अलग रूप से लागू करने से विभागीय नियमों में मौजूद अन्य प्रावधानों का उद्देश्य प्रभावित होगा। इसलिए चार्जशीट समय पर दिए जाने की स्थिति को भी ध्यान में रखना जरूरी है। इसी आधार पर कर्मचारी की बहाली से संबंधित सिंगल बेंच के निर्देश को रद्द कर दिया गया।
अनिश्चितकाल तक निलंबन पर कोर्ट की सख्ती
हालांकि डिवीजन बेंच ने विभाग को यह भी स्पष्ट निर्देश दिया कि किसी सरकारी कर्मचारी को अनिश्चितकाल तक निलंबित रखना उचित नहीं है। सक्षम अधिकारियों को निलंबन जारी रखने की आवश्यकता की निष्पक्ष और नए सिरे से समीक्षा करने को कहा गया है। यदि कर्मचारी को निलंबित रखने की आवश्यकता नहीं है, तो उसे किसी गैर-संवेदनशील पद पर वापस नियुक्त करने पर विचार किया जा सकता है। इस तरह कोर्ट ने विभागीय कार्रवाई और कर्मचारी के अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया।
Read More : CG Mahtari Vandan Yojana: बस्तर की 5925 महिलाओं के नाम हटे, जानें क्यों हुई बड़ी कार्रवाई