CG High Court : बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सहायक अभियंता (Assistant Engineer) के पद पर पदोन्नति कोटा घटाने के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी कर्मचारी को पदोन्नति के किसी निश्चित कोटे या पदोन्नति के अवसरों की तय संख्या पर स्थायी अथवा अर्जित अधिकार प्राप्त नहीं होता। कर्मचारी का अधिकार केवल इतना है कि उसे लागू नियमों और नीतियों के अनुसार पदोन्नति के लिए निष्पक्ष रूप से विचार का अवसर मिले।
70 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत हुआ पदोन्नति कोटा
यह मामला छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड में कार्यरत 39 जूनियर इंजीनियरों से जुड़ा था। कर्मचारियों ने सहायक अभियंता के पद पर पदोन्नति का कोटा 70 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वर्ष 2021 में पदोन्नति का कोटा 70 प्रतिशत तय किया गया था और वे इसी व्यवस्था के तहत पदोन्नति के लिए पात्र हो चुके थे।
2025 में कंपनी ने बदली भर्ती व्यवस्था
कंपनी ने वर्ष 2025 में पदोन्नति कोटा घटाकर 40 प्रतिशत कर दिया। इसके साथ ही सीधी भर्ती का हिस्सा 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया। संशोधित व्यवस्था के तहत सहायक अभियंता के पदों पर 40 प्रतिशत पदोन्नति, 10 प्रतिशत विभागीय परीक्षा और 50 प्रतिशत सीधी भर्ती का प्रावधान किया गया है।
आगामी बिजली परियोजनाओं का दिया गया हवाला
छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी ने कोर्ट में बताया कि राज्य में आगामी विद्युत परियोजनाओं और पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट्स के लिए बड़ी संख्या में योग्य एवं प्रशिक्षित ग्रेजुएट इंजीनियरों की जरूरत होगी। इसी प्रशासनिक और तकनीकी आवश्यकता को देखते हुए भर्ती के अनुपात में बदलाव किया गया है। कंपनी ने कहा कि यह फैसला भविष्य की कार्य जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया।
2018 में भी 40 प्रतिशत था पदोन्नति कोटा
कंपनी ने यह भी बताया कि वर्ष 2018 में जब याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति हुई थी, तब सहायक अभियंता पद के लिए पदोन्नति कोटा 40 प्रतिशत था। वर्ष 2021 में इसे बढ़ाकर 70 प्रतिशत किया गया था। बाद में प्रशासनिक आवश्यकताओं का दोबारा मूल्यांकन करने के बाद कंपनी ने पुराने अनुपात को बहाल करने का निर्णय लिया।
पदोन्नति का अवसर घटना मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पदोन्नति के अवसर कम होना अपने आप में संविधान के अनुच्छेद 14 या 16 का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। कर्मचारी को पदोन्नति के लिए विचार किए जाने का अधिकार जरूर है, लेकिन वह पहले निर्धारित पदोन्नति प्रतिशत को हमेशा बनाए रखने की मांग नहीं कर सकता।
भर्ती कोटा तय करना नियोक्ता का नीतिगत अधिकार
अदालत ने कहा कि पदोन्नति, विभागीय परीक्षा और सीधी भर्ती के अलग-अलग माध्यमों के लिए कोटा निर्धारित करना मुख्य रूप से नियोक्ता के प्रशासनिक और नीतिगत अधिकार क्षेत्र में आता है। इसमें विभाग की संरचना, फीडर कैडर, कर्मचारियों का अनुभव, कार्य की प्रकृति और भविष्य की जरूरतों जैसे पहलुओं पर विचार किया जा सकता है।
कोर्ट ने प्रशासनिक नीति में दखल से किया इनकार
हाईकोर्ट ने कहा कि न्यायालय प्रशासनिक नीति के मामलों में अपीलीय प्राधिकारी की भूमिका नहीं निभा सकता। जब तक कोई निर्णय मनमाना, दुर्भावनापूर्ण, संवैधानिक प्रावधानों या वैधानिक नियमों के विपरीत साबित न हो, तब तक न्यायिक हस्तक्षेप उचित नहीं है। कोर्ट ने यह भी माना कि पहले 70 प्रतिशत कोटे के तहत 23 जूनियर इंजीनियरों को पदोन्नति मिलने से अन्य कर्मचारियों के लिए 70 प्रतिशत कोटा जारी रखने का अर्जित अधिकार नहीं बनता।
60 पदों की सीधी भर्ती पर रोक नहीं
याचिकाकर्ताओं ने सहायक अभियंता के 60 पदों पर चल रही सीधी भर्ती प्रक्रिया को रोकने की भी मांग की थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि केवल इसलिए भर्ती प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता क्योंकि इससे मौजूदा कर्मचारियों के पदोन्नति के अवसर कम हो सकते हैं।
39 जूनियर इंजीनियरों की याचिका खारिज
सभी तथ्यों और कंपनी की ओर से बताई गई प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए हाईकोर्ट ने पदोन्नति कोटा 70 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत करने के फैसले में कोई अवैधता, मनमानी या विकृति नहीं पाई। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं के पास 70 प्रतिशत कोटे के तहत पदोन्नति का कोई निहित या अर्जित अधिकार नहीं था। इसी आधार पर 39 जूनियर इंजीनियरों की याचिका खारिज करते हुए अदालत ने संशोधित व्यवस्था को बरकरार रखा।
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