Throat Infection: मौसम में बदलाव, वायरल इंफेक्शन और स्वाइन फ्लू जैसी मौसमी बीमारियों के बीच इन दिनों सर्दी-जुकाम, गले में दर्द और संक्रमण की शिकायतें बढ़ रही हैं। कई लोगों को गले में कुछ चिपचिपा या अटका हुआ महसूस होता है। इसके अलावा गले में चुभन, निगलने में परेशानी, सूजन और लगातार खांसी जैसी समस्याएं भी परेशान कर सकती हैं। कुछ मामलों में खाना या एसिड ऊपर की ओर आने की शिकायत भी हो सकती है। ऐसे में गले की सेहत पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
गले में संक्रमण होने पर दिखाई दे सकते हैं ये लक्षण
गले के संक्रमण के दौरान खराश, जलन और लगातार सूखापन महसूस हो सकता है। गले के पिछले हिस्से में म्यूकस जमा होना, टॉन्सिल में सूजन या दर्द, आवाज का बैठना और भारीपन भी इसके सामान्य लक्षणों में शामिल हैं। इसके साथ बुखार, खांसी, गर्दन या जबड़े में दर्द और सिरदर्द की समस्या भी हो सकती है। केवल गले की जांच करना पर्याप्त नहीं होता, क्योंकि कई बार नाक से जुड़ी समस्याएं भी गले की परेशानी को बढ़ा सकती हैं।
आयुर्वेद में गले के लिए बताई गई हैं खास औषधियां
आशा आयुर्वेद क्लीनिक की डॉक्टर चंचल शर्मा के अनुसार, आयुर्वेद में गले की जलन, दर्द और संक्रमण से राहत के लिए कई जड़ी-बूटियों का उल्लेख मिलता है। चरक संहिता के सूत्र स्थान में गले के लिए उपयोगी दस औषधियों का वर्णन किया गया है। इनमें सारिवा, ईख की जड़, मुलेठी, मुनक्का, विदारीकंद, कैटर्य, हंसपदी, तुलसी और गोक्षुर जैसी औषधियां शामिल हैं। गले में परेशानी होने पर मुलेठी और तुलसी का काढ़ा राहत देने में मदद कर सकता है।
शरीर में दोषों का असंतुलन भी माना गया कारण
सुश्रुत संहिता के निदान स्थान में गले से जुड़ी बीमारियों के कारणों का भी उल्लेख मिलता है। आयुर्वेदिक मान्यता के अनुसार, जब शरीर में वात, पित्त और कफ का संतुलन बिगड़ता है और ये दोष गले में जमा होते हैं, तो सूजन, टॉन्सिलिटिस और अन्य गले की समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि, किसी बीमारी का सही कारण जानने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
गरारे करना माना जाता है आसान घरेलू उपाय
अष्टांग हृदय और सुश्रुत संहिता में गले की परेशानियों में गंडूष यानी कुल्ला या गरारे करने का उल्लेख मिलता है। आयुर्वेदिक उपाय के तौर पर हल्दी, सेंधा नमक या त्रिफला मिले गुनगुने पानी से गरारे किए जा सकते हैं। इससे गले में जमा कफ और खराश से राहत मिल सकती है। पानी बहुत गर्म न हो, इसका भी ध्यान रखना चाहिए।
हल्दी और सेंधा नमक से करें गरारे
गले में खराश होने पर एक गिलास गुनगुने पानी में आधा चम्मच हल्दी और एक चुटकी सेंधा नमक मिलाकर गरारे करने की सलाह दी जाती है। इसे दिन में दो से तीन बार किया जा सकता है। गरारे करते समय पानी निगलने से बचना चाहिए।
मुलेठी और तुलसी-अदरक का काढ़ा हो सकता है उपयोगी
गले की खराश के लिए आधा चम्मच मुलेठी पाउडर शहद में मिलाकर धीरे-धीरे चाटने का घरेलू उपाय बताया गया है। इसके अलावा पांच-छह तुलसी की पत्तियां, थोड़ा अदरक और दो काली मिर्च पानी में उबालकर काढ़ा तैयार किया जा सकता है। इसे गुनगुना होने पर पीने से गले में आराम मिल सकता है।
तेज दर्द या बुखार होने पर डॉक्टर से संपर्क करें
डॉक्टर चंचल शर्मा के मुताबिक, यदि निगलने में तेज दर्द, बुखार, लगातार सूखी खांसी या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो खुद से इलाज करने के बजाय आयुर्वेदिक डॉक्टर या अन्य योग्य चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। सही कारण की पहचान के बाद ही उचित उपचार तय किया जा सकता है। घरेलू या आयुर्वेदिक उपायों को चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं मानना चाहिए।
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