Middle East War : विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को पश्चिम एशिया और खाड़ी देशों के साथ भारत के संबंधों को लेकर संसदीय परामर्श समिति की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में क्षेत्र में जारी संघर्ष, भारत की ऊर्जा जरूरतों, व्यापारिक हितों और वहां रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। जयशंकर ने समिति के सदस्यों को बताया कि मिडिल ईस्ट में जारी संकट के बावजूद भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को प्रभावी तरीके से सुरक्षित रखा है।
युद्ध के बावजूद भारत पर नहीं पड़ा बड़ा असर
जयशंकर ने बैठक में बताया कि पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी संघर्ष और अस्थिरता के बावजूद भारत की आवश्यक आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित नहीं हुई। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ ऊर्जा की उपलब्धता बनाए रखने पर सरकार ने विशेष ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में भारत की प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा और देश की जरूरी जरूरतों को पूरा करना रही है।
प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता
विदेश मंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में भारत के लाखों नागरिक रहते और काम करते हैं। ऐसे में क्षेत्रीय संघर्ष के दौरान उनकी सुरक्षा सरकार की सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल है। भारत ने संबंधित देशों के साथ संपर्क बनाए रखते हुए भारतीय समुदाय की सुरक्षा पर लगातार नजर रखी। इसके साथ ही आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और ऊर्जा सुरक्षा को भी प्रभावित नहीं होने देने के प्रयास किए गए।
व्यापार, निवेश और ऊर्जा सहयोग पर चर्चा
बैठक के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बताया कि खाड़ी देशों तथा पश्चिम एशिया-उत्तरी अफ्रीका क्षेत्र के साथ भारत के संबंध बेहद महत्वपूर्ण और व्यापक हैं। उन्होंने कहा कि बैठक में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, समुद्री सहयोग और लोगों के बीच संपर्क को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा हुई। भारत इन क्षेत्रों में अपने मौजूदा रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों में विविधता पर जोर
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में सांसदों ने पश्चिम एशिया के संघर्ष और भारत की ऊर्जा जरूरतों को लेकर सवाल उठाए। इसके जवाब में जयशंकर ने बताया कि भारत ऊर्जा आपूर्ति के लिए अलग-अलग स्रोतों पर निर्भरता बढ़ा रहा है। इसका उद्देश्य किसी एक क्षेत्र या देश पर अत्यधिक निर्भरता को कम करना और वैश्विक संकट के दौरान देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाए रखना है।
अमेरिका और ईरान दोनों से भारत के संबंध
बैठक में जयशंकर ने भारत की विदेश नीति के एक महत्वपूर्ण पहलू का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत उन चुनिंदा देशों में है, जिनके अमेरिका और ईरान दोनों के साथ अच्छे संबंध हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच इन दोनों देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखना भारत के रणनीतिक हितों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने ईरान से तेल और अन्य वस्तुओं की खरीद को लेकर अमेरिकी प्रतिबंधों का भी उल्लेख किया।
मक्का रक्षा समझौते पर सांसदों ने जताई चिंता
बैठक के दौरान कुछ सांसदों ने पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुए मक्का रक्षा समझौते को लेकर भी चिंता व्यक्त की। सांसदों ने इस समझौते के संभावित प्रभावों और भारत के रुख को लेकर विदेश मंत्री से जानकारी मांगी। यह मुद्दा ऐसे समय उठा है, जब पश्चिम एशिया में पहले से ही सुरक्षा और रणनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं।
क्या है मक्का रक्षा समझौता?
बताया गया कि 7 अगस्त को पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने मक्का रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के तहत यदि तीनों देशों में से किसी एक पर हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इस व्यवस्था को क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, पश्चिम एशिया में इसके संभावित रणनीतिक प्रभावों को लेकर भी चर्चा तेज है।
भारत ने मजबूत किए पश्चिम एशिया से रिश्ते
जयशंकर ने बैठक में कहा कि भारत ने पिछले कुछ समय में पश्चिम एशिया के देशों के साथ अपने राजनीतिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत किया है। मौजूदा संकट के बीच भारत का प्रयास है कि वह सभी प्रमुख पक्षों के साथ संवाद बनाए रखे और अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करे। ऊर्जा सुरक्षा, व्यापारिक संबंध, समुद्री सहयोग और प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा भारत की पश्चिम एशिया नीति के प्रमुख आधार बने हुए हैं।
संकट के बीच संतुलित कूटनीति पर भारत का जोर
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत की चुनौती अपने आर्थिक, रणनीतिक और नागरिक हितों के बीच संतुलन बनाए रखने की है। जयशंकर के अनुसार सरकार ने इसी दिशा में काम करते हुए प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को प्राथमिकता दी है। अमेरिका और ईरान समेत क्षेत्र के विभिन्न देशों के साथ संबंध बनाए रखना भारत की संतुलित कूटनीति का अहम हिस्सा है।
Read More : Abhishek Banerjee FIR: बार-बार FIR पर कलकत्ता हाई कोर्ट सख्त, बंगाल सरकार को कड़ी फटकार