Muzaffarnagar News : मुजफ्फरनगर में दहेज हत्या के एक मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने सोमवार को दोषी को मृत्युदंड की सजा सुनाई। अदालत ने पत्नी को दहेज की मांग के चलते जिंदा जलाने के मामले में आरोपी नदीम को दोषी पाया। फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश ने कहा कि वह अपने न्यायिक कर्तव्यों का पालन करते हुए किसी भी तरह के दबाव के आगे नहीं झुकेंगे।
जज ने कहा- कायर कहलाने से बेहतर मौत
फैसले के दौरान न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने कहा कि वह ‘कायर जज’ कहलाने के बजाय मौत को गले लगाना पसंद करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते समय वह माफिया, गैंगस्टर, बाहुबली या किसी अपराधी के दबाव में नहीं आएंगे। उनके मुताबिक, न्यायपालिका में जनता का भरोसा कायम रखने के लिए निष्पक्ष और निर्भीक होकर फैसले करना जरूरी है।
माता-पिता ने सिर्फ ईश्वर से डरना सिखाया
न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि उनके माता-पिता ने उन्हें केवल ईश्वर से डरना सिखाया है। उन्होंने कहा कि यदि न्यायाधीश बाहुबलियों, माफियाओं या अपराधियों से डरकर अपने कर्तव्यों का पालन करने लगे, तो न्यायपालिका से आम लोगों का विश्वास खत्म हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक वह अपने सिद्धांतों पर कायम रह सकते हैं, तब तक न्यायिक सेवा में बने रहेंगे।
धमकियां मिलने का भी किया दावा
जज दिवाकर ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि उन्हें माफियाओं और अपराधियों की ओर से धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी अदालत से करीब 100 गंभीर आपराधिक मामलों को वापस लेकर दूसरी अदालत में स्थानांतरित किया गया है। न्यायाधीश के मुताबिक, यह कदम कथित तौर पर माफिया और अपराधियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से उठाया गया।
2018 में जिंदा जलाई गई थी पत्नी
शासकीय अधिवक्ता कुलदीप कुमार के मुताबिक, यह मामला 23 जुलाई 2018 का है। शाहपुर कस्बे में नदीम पर दहेज की मांग को लेकर अपनी 23 वर्षीय पत्नी शहजादी को कथित तौर पर जलाने का आरोप लगा था। गंभीर रूप से झुलसी शहजादी को उपचार के लिए दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
मृत्युपूर्व बयान बना सजा का आधार
मामले में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के सभी 11 गवाह अपने पूर्व बयानों से मुकर गए। इसके बावजूद अदालत ने शहजादी के मृत्युपूर्व बयान को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना। अपने बयान में शहजादी ने आरोप लगाया था कि नदीम ने उसे जलाया था। इसी बयान के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 504 के तहत सजा सुनाई।
एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया
अदालत ने नदीम को मृत्युदंड देने के साथ उस पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। मामले में अभियोजन पक्ष ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी साबित करने की दलील दी थी। अदालत ने मृत्युपूर्व बयान की विश्वसनीयता को ध्यान में रखते हुए फैसला सुनाया, जबकि सुनवाई के दौरान अन्य गवाहों के मुकर जाने से अभियोजन पक्ष को चुनौती का सामना करना पड़ा।
चार महीनों में 23 लोगों को मृत्युदंड
न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने पिछले चार महीनों में 11 मामलों में कुल 23 लोगों को मृत्युदंड सुनाया है। मृत्युदंड की संख्या को लेकर उनकी अदालत पहले से चर्चा में रही है। इसी अवधि में कई गंभीर आपराधिक मामलों में सख्त फैसले सुनाए गए हैं।
करीब 100 हत्या के मामले दूसरी अदालत में पहुंचे
अगस्त में प्रशासनिक आदेश के तहत न्यायाधीश दिवाकर की अदालत में लंबित हत्या के करीब 100 मामलों को जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र कुमार सिंह की अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया था। जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद त्यागी ने उस समय कहा था कि वकीलों और वादियों के बीच यह धारणा थी कि त्वरित अदालत में मामलों में मृत्युदंड दिए जाने की आशंका अधिक है। मामलों के स्थानांतरण के बाद यह विषय भी चर्चा में रहा।
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