El Nino Alert: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की 5 सितंबर को जारी Global Public Health Situation Analysis: El Niño 2026 रिपोर्ट ने भारत के लिए स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बढ़ा दी हैं। रिपोर्ट में भारत को उन देशों की सूची में शामिल किया गया है, जहां एल नीनो के प्रभाव से स्वास्थ्य जोखिम अधिक या बहुत अधिक हो सकते हैं। आकलन के अनुसार अगस्त से अक्टूबर के बीच दक्षिण एशिया के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश और सामान्य से ज्यादा तापमान देखने को मिल सकता है।
कम बारिश और ज्यादा गर्मी बदल सकती है स्वास्थ्य स्थिति
एल नीनो का असर केवल मौसम तक सीमित नहीं रहता। तापमान और वर्षा के पैटर्न में बदलाव होने से संक्रामक बीमारियों के फैलाव के साथ गर्मी से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है। जल उपलब्धता, कृषि उत्पादन और स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित होने पर कमजोर आबादी पर इसका असर ज्यादा गंभीर हो सकता है। इसलिए स्वास्थ्य विभागों के लिए निगरानी और समय रहते तैयारी करना बेहद जरूरी माना जा रहा है।
क्या है एल नीनो, जिससे दुनिया भर में बढ़ती चिंता
एल नीनो मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर की सतह के पानी के असामान्य रूप से गर्म होने की एक आवधिक जलवायु घटना है। इसके प्रभाव प्रशांत क्षेत्र से हजारों किलोमीटर दूर तक महसूस किए जा सकते हैं। दक्षिण एशिया में यह बारिश और तापमान के सामान्य पैटर्न को प्रभावित कर सकता है। मौसम में ऐसे बदलाव स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, पानी की उपलब्धता और संक्रामक रोगों के जोखिम को एक साथ प्रभावित कर सकते हैं।
दिल्ली में डेंगू के मामलों ने बढ़ाई चिंता
WHO का यह आकलन ऐसे समय सामने आया है, जब दिल्ली में मच्छर जनित बीमारियों के मामले बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। अगस्त में राजधानी में डेंगू के 90 मामले दर्ज किए गए, जो इस वर्ष किसी एक महीने में सबसे ज्यादा बताए गए हैं। वहीं 29 अगस्त तक दिल्ली में डेंगू के कुल मामलों की संख्या 311 पहुंच चुकी थी। बदलते मौसम के बीच मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों की निगरानी और रोकथाम महत्वपूर्ण हो गई है।
अगस्त में मलेरिया के मामलों में भी तेज बढ़ोतरी
डेंगू के साथ दिल्ली में मलेरिया के मामलों में भी अगस्त के दौरान वृद्धि दर्ज की गई। नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई में मलेरिया के 17 मामले सामने आए थे, जबकि अगस्त में यह संख्या बढ़कर 53 हो गई। 29 अगस्त तक इस साल मलेरिया के कुल 119 मामले दर्ज किए जा चुके थे। हालांकि स्वास्थ्य एजेंसियां इन मामलों को सीधे एल नीनो से जोड़कर नहीं देख रही हैं।
अत्यधिक तापमान से बढ़ सकता है गंभीर स्वास्थ्य खतरा
एल नीनो के दौरान संभावित बढ़ा हुआ तापमान भारत में एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन सकता है। अत्यधिक गर्मी से हीट एक्सॉशन और लू का खतरा बढ़ता है। हृदय, फेफड़े, किडनी और चयापचय संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर इसका असर अधिक पड़ सकता है। गर्भवती महिलाओं, नवजात बच्चों और बुजुर्गों को भी गर्मी के दौरान विशेष सावधानी बरतने की जरूरत हो सकती है।
बारिश के बदलाव से खाद्य और जल सुरक्षा पर असर
बारिश के पैटर्न में बदलाव होने पर स्वास्थ्य जोखिम कई स्तरों पर बढ़ सकते हैं। कम वर्षा से पानी की उपलब्धता और कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे खाद्य सुरक्षा पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। दूसरी तरफ अचानक भारी बारिश या बाढ़ के दौरान दूषित पानी से लेप्टोस्पायरोसिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। कमजोर जल निकासी और स्वच्छता वाले इलाकों में स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
सीमावर्ती क्षेत्रों में बीमारी की निगरानी जरूरी
भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमा से लगे क्षेत्रों में भी विशेष सतर्कता की जरूरत बताई गई है। मौसम संबंधी घटनाओं के कारण यदि लोगों को विस्थापित होना पड़े, तो संक्रमण के सीमापार फैलने का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे इलाकों में बीमारी की शुरुआती पहचान, स्वास्थ्य निगरानी और प्रभावित लोगों तक चिकित्सा सेवाएं पहुंचाना महत्वपूर्ण रहेगा।
WHO की चेतावनी भविष्यवाणी नहीं, तैयारी का संकेत
WHO का आकलन किसी एक बीमारी के निश्चित रूप से फैलने की भविष्यवाणी नहीं करता। इसका उद्देश्य बदलती जलवायु परिस्थितियों के बीच संभावित स्वास्थ्य जोखिमों के प्रति देशों को पहले से तैयार करना है। भारत में स्थानीय मौसम, मच्छरों की संख्या, जल एवं स्वच्छता व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता के आधार पर वास्तविक प्रभाव अलग-अलग हो सकता है। इसलिए डेंगू, मलेरिया, गर्मी और जलजनित बीमारियों की निगरानी मजबूत करना जरूरी होगा।
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