Mecca Pact: पाकिस्तान ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि सऊदी अरब और तुर्की के साथ हाल ही में हुए रक्षा समझौते के तहत सऊदी अरब पर हूती हमलों के जवाब में सैन्य कार्रवाई को लेकर फिलहाल कोई चर्चा नहीं चल रही है। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान यह जानकारी दी। उनसे पूछा गया था कि इस्लामाबाद रक्षा समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियों को किस तरह पूरा करेगा।
समय आने पर समझौते के तहत कार्रवाई करेगा पाकिस्तान
विदेश कार्यालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने कहा कि फिलहाल इस तरह की किसी कार्रवाई पर चर्चा नहीं हो रही है। उन्होंने संकेत दिया कि अगर परिस्थितियां समझौते के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग करती हैं, तो पाकिस्तान उस समय अपनी भूमिका निभाएगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में हूती हमलों को लेकर तनाव बढ़ने की खबरें सामने आ रही हैं।
सऊदी शहरों और ऊर्जा ठिकानों पर हमलों का दावा
खान का बयान ऐसे वक्त आया है जब ईरान समर्थित हूती बलों द्वारा सऊदी अरब के शहरों और ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने की खबरें हैं। रिपोर्टों के अनुसार हालिया हमलों में कम से कम 73 नागरिकों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। इन घटनाओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा और संभावित व्यापक सैन्य टकराव को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
मक्का में हुआ था तीन देशों के बीच संयुक्त रक्षा समझौता
पिछले महीने मक्का में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। समझौते के अनुसार तीनों देशों में से किसी एक के खिलाफ होने वाला सशस्त्र हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इसी प्रावधान के कारण सऊदी अरब और हूतियों के बीच बढ़ते तनाव के बीच इस समझौते की अहमियत पर चर्चा तेज हुई है।
ख्वाजा आसिफ ने पहले ही समझौता लागू होने की बात कही थी
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ पहले ही कह चुके हैं कि यदि हूतियों के हमलों को सऊदी अरब के खिलाफ आक्रामकता माना जाता है या यमन का संघर्ष सऊदी क्षेत्र तक फैलता है, तो संयुक्त रक्षा समझौते के प्रावधान लागू हो सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि यह व्यवस्था किसी अन्य देश के खिलाफ स्वतंत्र सैन्य कार्रवाई की अनुमति देने वाला समझौता नहीं है।
पाकिस्तान ने समझौते को बताया सामूहिक रक्षा व्यवस्था
ख्वाजा आसिफ ने जियो टीवी को दिए एक साक्षात्कार में कहा था कि समझौते को लेकर किसी तरह की अस्पष्टता नहीं होनी चाहिए। उनके मुताबिक यह एक संयुक्त रक्षा व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य सदस्य देशों की सुरक्षा से जुड़ी प्रतिबद्धताओं को पूरा करना है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान समझौते की शर्तों और नियमों से बंधा हुआ है।
जरूरत पड़ने पर सऊदी अरब के साथ खड़ा होगा पाकिस्तान
आसिफ ने यह भी कहा था कि जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान समझौते के तहत सऊदी अरब के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समझौते की शर्तों का पालन करने को लेकर कोई संदेह नहीं होना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि हालिया हूती हमलों के बाद पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच किसी विशेष संपर्क की उन्हें जानकारी नहीं है।
फिलहाल अगली कार्रवाई पर बनी हुई है नजर
पाकिस्तान के ताजा बयान से फिलहाल यही संकेत मिलता है कि इस्लामाबाद सैन्य कार्रवाई को लेकर तत्काल कोई कदम उठाने की घोषणा नहीं कर रहा है। हालांकि, सऊदी अरब पर हमले जारी रहने और क्षेत्रीय परिस्थितियों में बदलाव की स्थिति में संयुक्त रक्षा समझौते की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के रुख पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी रहेगी।
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