Durg POCSO Case: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में छह साल तीन माह की मासूम बच्ची के दुष्कर्म और हत्या के मामले में विशेष पॉक्सो न्यायालय ने दोषी को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी सोमेश यादव को गंभीर अपराध का दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा दी। आरोपी पीड़िता का चाचा बताया गया है। यह फैसला अपर सत्र न्यायाधीश, चतुर्थ एफटीएससी, विशेष न्यायालय पॉक्सो दुर्ग द्वारा सुनाया गया।
रामनवमी के दिन घर से निकली थी बच्ची
पुलिस के अनुसार, घटना 7 अप्रैल 2025 की है। रामनवमी के अवसर पर बच्ची कन्या भोज में शामिल होने के लिए सुबह अपने घर से निकली थी। इसके बाद वह वापस घर नहीं लौटी। दोपहर तक बच्ची के घर नहीं पहुंचने पर परिवार के सदस्यों ने आसपास के इलाकों में उसकी तलाश शुरू की। काफी प्रयास के बाद भी जब बच्ची का कोई पता नहीं चला तो परिजन मोहन नगर थाने पहुंचे और पुलिस को घटना की जानकारी दी।
घर के पास खड़ी कार में मिला था शव
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल बच्ची की तलाश शुरू की। इसी दौरान बच्ची के घर के नजदीक ट्रांसफार्मर के पास खड़ी एक कार से उसका शव बरामद किया गया। पुलिस के मुताबिक, बच्ची के शरीर पर चोट के निशान भी मिले थे। घटना के बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर 24 वर्षीय सोमेश यादव के खिलाफ मामला दर्ज किया।
वैज्ञानिक साक्ष्यों को जांच में बनाया गया आधार
पुलिस ने मामले की जांच के दौरान घटनास्थल को सुरक्षित किया और वहां से विभिन्न प्रकार के साक्ष्य जुटाए। इनमें डीएनए, जैविक, चिकित्सकीय, सीसीटीवी फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य शामिल थे। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद उसके मेमोरेण्डम के आधार पर संबंधित वस्तुओं की बरामदगी भी की गई। जांच एजेंसी ने एफएसएफ और डीएनए जांच सहित वैज्ञानिक साक्ष्यों को अभियोजन के माध्यम से न्यायालय के सामने प्रस्तुत किया।
पॉक्सो एक्ट की धारा 6(1) में मृत्युदंड
न्यायालय ने आरोपी को पॉक्सो अधिनियम की धारा 6(1) और भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड सुनाया। दोनों धाराओं में पांच-पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। अदालत के फैसले में धारा 238(क) के तहत पांच वर्ष के सश्रम कारावास और एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा भी दी गई है।
सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी
अदालत के आदेश के अनुसार, दोषी को दी गई सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। हालांकि, मृत्युदंड दिए जाने के बाद कानूनी प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। मृत्युदंड की पुष्टि के लिए मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर के समक्ष जाएगा। हाईकोर्ट की पुष्टि के बाद ही मृत्युदंड से संबंधित आगे की प्रक्रिया पूरी हो सकेगी।
पीड़ित परिवार को सात लाख रुपये क्षतिपूर्ति
न्यायालय ने पीड़ित परिवार के लिए भी आर्थिक राहत का निर्देश दिया है। फैसले में आहत प्रतिकर योजना के तहत पीड़ित परिवार को सात लाख रुपये की क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया गया है। इस राशि का उद्देश्य अपराध से प्रभावित परिवार को नियमानुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है।
मामले में सबूतों की भूमिका रही अहम
इस मामले में पुलिस द्वारा जुटाए गए वैज्ञानिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को अभियोजन की ओर से अदालत में प्रस्तुत किया गया। डीएनए जांच, जैविक एवं चिकित्सकीय साक्ष्य और सीसीटीवी सहित अन्य सामग्री जांच का हिस्सा रही। अदालत के फैसले के बाद अब मृत्युदंड की पुष्टि की प्रक्रिया हाईकोर्ट में आगे बढ़ेगी। मामले में अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की दलीलों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया है।
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