Amit Shah Warning: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बृहस्पतिवार को कृषि विभाग को पाकिस्तान की ओर से आने वाले टिड्डी दल के संभावित हमलों से निपटने के लिए स्थायी तैयारी बनाए रखने के निर्देश दिए। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एनआईडीएम) के शासी निकाय की तीसरी बैठक की अध्यक्षता करते हुए शाह ने कहा कि भारत को ऐसे खतरों से निपटने के लिए लगातार तैयार रहना चाहिए।
दूसरे देशों की बेहतर व्यवस्थाओं को अपनाने पर जोर
अमित शाह ने कहा कि टिड्डी दल जैसे संकट से निपटने के लिए दूसरे देशों में अपनाई जा रही बेहतर कार्यप्रणालियों का अध्ययन किया जाना चाहिए और उपयोगी तरीकों को भारत में लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कृषि विभाग से कहा कि पाकिस्तान की दिशा से आने वाले टिड्डी हमलों की संभावित चुनौती को देखते हुए तैयारी को किसी एक मौसम या घटना तक सीमित न रखा जाए।
आपदा प्रबंधन के तरीके में आया बड़ा बदलाव
बैठक में गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), कृषि मंत्रालय, दिल्ली विश्वविद्यालय और केंद्र एवं राज्य सरकारों के विभिन्न संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। शाह ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश के आपदा प्रबंधन के दृष्टिकोण में व्यापक बदलाव आया है।
राहत से आगे बढ़कर जीरो कैजुअल्टी पर फोकस
गृह मंत्री के मुताबिक पहले आपदा आने के बाद राहत और पुनर्वास पर अधिक जोर दिया जाता था। अब सरकार का दृष्टिकोण आपदा से पहले जोखिम कम करने, समय रहते चेतावनी देने और जनहानि को न्यूनतम करने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि देश ने कई आपदाओं से शून्य जनहानि के साथ सफलतापूर्वक निपटने में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।
जोखिम कम करना और पूर्व चेतावनी बने प्रमुख आधार
अमित शाह ने आपदा प्रबंधन के नए मॉडल के तीन प्रमुख आधार बताए। इनमें आपदा के जोखिम को कम करना, मजबूत पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करना और ‘शून्य जनहानि’ का लक्ष्य शामिल है। उन्होंने कहा कि आपदा-सहने में सक्षम गांवों और शहरों का निर्माण सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
सभी विभागों को मिलकर करना होगा काम
शाह ने ‘संपूर्ण सरकारी दृष्टिकोण’ अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी आपदा के समय केवल एक विभाग के भरोसे प्रतिक्रिया नहीं छोड़ी जा सकती। सभी संबंधित सरकारी विभागों को सक्रिय होकर राहत, बचाव और रोकथाम के प्रयासों में भाग लेना होगा। समन्वित कार्रवाई से आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
शोध और लगातार निगरानी से मजबूत होगी व्यवस्था
गृह मंत्री ने कहा कि शोध, तकनीक और लगातार निगरानी की मदद से आपदा प्रबंधन की क्षमता को और मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नए शोधों को नीतियों और जमीनी कार्रवाई से जोड़ा जाए। साथ ही पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करने की दिशा में भी लगातार काम किया जाना चाहिए।
पर्यावरण संरक्षण को आपदा रोकथाम से जोड़ा
अमित शाह ने ‘मिशन लाइफ’, ‘प्रो-प्लैनेट पीपल’ और अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण के प्रयास आपदाओं के जोखिम को कम करने में योगदान दे सकते हैं। उन्होंने पर्यावरण और आपदा प्रबंधन के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताई।
आपदा फंड के आवंटन में वैज्ञानिक प्रक्रिया पर जोर
शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपदा प्रबंधन से जुड़े फंड के आवंटन को वैज्ञानिक प्रक्रिया के आधार पर करने का निर्णय लिया है। उनके मुताबिक राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि के तहत आवंटन में करीब चार गुना और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया निधि के तहत लगभग तीन गुना वृद्धि हुई है।
11 वर्षों में आपदा प्रबंधन पर 2.5 लाख करोड़ खर्च
गृह मंत्री के अनुसार पिछले 11 वर्षों में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। सरकार का जोर अब केवल आपदा के बाद राहत देने के बजाय पहले से जोखिम की पहचान, निगरानी, चेतावनी और त्वरित प्रतिक्रिया की व्यवस्था मजबूत करने पर है। टिड्डी दल के संभावित हमलों को लेकर कृषि विभाग को दिया गया निर्देश भी इसी व्यापक तैयारी का हिस्सा है।
Read More : Mecca Pact: हूती हमलों पर पाकिस्तान का यू-टर्न, बोला- अभी सैन्य कार्रवाई पर कोई चर्चा नहीं