बांग्लादेश में जेल में बंद हिंदू अधिकार कार्यकर्ता और सनातन जागरण मंच के नेता चिन्मय कृष्ण दास की मां संध्या रानी धर का निधन हो गया। 71 वर्षीय संध्या रानी धर लंबे समय से कैंसर से जूझ रही थीं और चटगांव के हथजारी स्थित एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। बीमारी के दौरान उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई और इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।
बेटे का चेहरा देखने की थी मां की आखिरी इच्छा
परिवार के मुताबिक, संध्या रानी धर की अंतिम इच्छा अपने जेल में बंद बेटे चिन्मय कृष्ण दास को आखिरी बार देखना थी। परिवार ने उनकी गंभीर हालत को देखते हुए प्रशासन से चिन्मय को अस्पताल लाकर मां से मुलाकात कराने की अपील की थी। हालांकि, प्रशासन ने सख्त नियमों और कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया।
मां की अंतिम घड़ियों में नहीं मिल सके चिन्मय
परिवार की अपील खारिज होने के बाद संध्या रानी धर अपने बेटे का चेहरा देखे बिना ही दुनिया से विदा हो गईं। इस घटना के बाद परिवार और चिन्मय के समर्थकों में भावनात्मक माहौल है। परिवार का कहना है कि गंभीर रूप से बीमार मां की अंतिम इच्छा पूरी नहीं हो सकी, जबकि वह लगातार अपने बेटे से मिलने की उम्मीद कर रही थीं।
अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पांच घंटे की पैरोल
मां के निधन के बाद चटगांव जिला प्रशासन ने चिन्मय कृष्ण दास को अंतिम संस्कार की धार्मिक प्रक्रिया में शामिल होने के लिए सीमित अवधि की पैरोल मंजूर की है। चटगांव के जिला उपायुक्त मोहम्मद जाहिदुल इस्लाम के अनुसार, चिन्मय के भाई की ओर से दिए गए आवेदन पर कानूनी प्रावधानों के तहत उन्हें पांच घंटे के लिए जेल से बाहर आने की अनुमति दी गई।
कड़ी शर्तों के साथ दी गई पैरोल
चिन्मय कृष्ण दास को यह पैरोल केवल अंतिम संस्कार में शामिल होने और धार्मिक रस्में पूरी करने के उद्देश्य से दी गई है। पांच घंटे की यह अनुमति बेहद सीमित अवधि के लिए है। प्रशासन की ओर से पैरोल को लेकर निर्धारित शर्तों का पालन करना उनके लिए अनिवार्य होगा। इसके बाद उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार दोबारा जेल लौटना होगा।
नवंबर 2024 से जेल में बंद हैं चिन्मय कृष्ण दास
चिन्मय कृष्ण दास नवंबर 2024 से बांग्लादेश की जेल में बंद हैं। उन्हें चटगांव से गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद से उनका मामला बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर चल रही बहस का महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। उनके समर्थक लगातार उनकी रिहाई और कानूनी राहत की मांग करते रहे हैं।
देशद्रोह और राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का आरोप
चिन्मय कृष्ण दास पर बांग्लादेश में देशद्रोह और राष्ट्रीय ध्वज के कथित अपमान से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों के बाद उनकी गिरफ्तारी हुई थी। हालांकि, उनके समर्थकों और हिंदू संगठनों ने इन आरोपों को लेकर सवाल उठाए हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर विरोध दर्ज कराया है।
गिरफ्तारी के बाद हिंदू समुदाय ने किया प्रदर्शन
चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी के बाद बांग्लादेश के कई हिस्सों में हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय की ओर से विरोध प्रदर्शन हुए थे। उनकी गिरफ्तारी ने देश में अल्पसंख्यक अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता और सुरक्षा को लेकर बहस को और तेज कर दिया था। कई स्थानों पर प्रदर्शन और विरोध के कारण तनाव की स्थिति भी सामने आई थी।
अदालतों से लगातार नहीं मिली जमानत
गिरफ्तारी के बाद चिन्मय कृष्ण दास को कानूनी राहत दिलाने के प्रयास भी किए गए। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्हें लगातार अदालतों से जमानत नहीं मिल सकी। इसी वजह से वह लंबे समय से जेल में हैं। उनकी मां के निधन के बाद अब उन्हें अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए सीमित अवधि की पैरोल मिली है।
मां की मौत ने मामले को फिर चर्चा में ला दिया
संध्या रानी धर के निधन और चिन्मय कृष्ण दास को केवल पांच घंटे की पैरोल दिए जाने से यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। मां की अंतिम इच्छा पूरी न हो पाने और बेटे को अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए सीमित समय मिलने ने परिवार के लिए इस घटना को और भावुक बना दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आगे इस मामले में कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।
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