BRICS Summit 2026 का आयोजन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में किया जा रहा है। सम्मेलन में ब्रिक्स देशों के साथ आमंत्रित देशों के राष्ट्राध्यक्ष और शीर्ष नेता भी हिस्सा लेने के लिए राजधानी पहुंच रहे हैं। शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए दिल्ली में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। दुनिया की नजर इस महत्वपूर्ण बैठक पर टिकी है, जहां वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
पीएम मोदी ने संस्कृत श्लोक के साथ जताई सफलता की उम्मीद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS Summit के सफल आयोजन की कामना करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक संस्कृत श्लोक साझा किया। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि आने वाले दिनों में दुनियाभर के नेता BRICS Summit में हिस्सा लेने के लिए एकत्र होंगे। प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि सम्मेलन के दौरान विश्व कल्याण की भावना के साथ विभिन्न विषयों पर सकारात्मक और सार्थक चर्चा होगी।
पीएम मोदी ने साझा किया सुभाषितम का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश के साथ ‘सुभाषितम’ का एक संस्कृत श्लोक भी पोस्ट किया। उन्होंने लिखा— “सद्भिरेव सहासीत सद्भिः कुर्वीत सङ्गतिम्।” इस श्लोक के जरिए अच्छे और सज्जन लोगों की संगति करने तथा उनके साथ विचार-विमर्श और मित्रता बढ़ाने का संदेश दिया गया है। प्रधानमंत्री के इस संदेश को BRICS सम्मेलन की भावना और सहयोग की दिशा से जोड़कर देखा जा रहा है।
श्लोक का क्या है हिंदी अर्थ
इस संस्कृत श्लोक का भावार्थ है कि मनुष्य को हमेशा अच्छे और सज्जन लोगों के साथ रहना चाहिए। उसे उनके साथ संगति करनी चाहिए, मित्रता स्थापित करनी चाहिए और विचारों का आदान-प्रदान करना चाहिए। इसके विपरीत दुष्ट या असज्जन लोगों के साथ अनुचित व्यवहार या संबंधों से बचने की सीख दी गई है। प्रधानमंत्री के संदेश में सहयोग और सकारात्मक संवाद की भावना प्रमुख रूप से दिखाई देती है।
BRICS बना ग्लोबल साउथ के लिए महत्वपूर्ण मंच
भारत BRICS को ग्लोबल साउथ की विकास प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण और पूरक मंच मानता है। अधिकारियों के अनुसार, बदलते वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक माहौल के बीच समूह के माध्यम से विकासशील देशों की प्रमुख चिंताओं को सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है। खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा स्थिरता और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला जैसे विषय सम्मेलन के एजेंडे में अहम माने जा रहे हैं।
कई प्रमुख राष्ट्राध्यक्ष दिल्ली पहुंचेंगे
BRICS Summit में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो समेत कई प्रमुख नेता हिस्सा लेने वाले हैं। इन नेताओं की मौजूदगी सम्मेलन को वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण बनाती है। भारत की मेजबानी में होने वाली इस बैठक के दौरान विभिन्न देशों के बीच द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बातचीत का भी मंच तैयार होगा।
वैश्विक व्यापार विवादों के बीच अहम होगी बैठक
यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय आयोजित हो रहा है जब दुनिया की अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों से गुजर रही है। वैश्विक व्यापार विवाद, बदलती शुल्क नीतियां और भू-राजनीतिक तनाव देशों की आर्थिक योजनाओं को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे माहौल में BRICS के सदस्य और आमंत्रित देश आर्थिक सहयोग बढ़ाने, व्यापार संबंधों को मजबूत करने और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े जोखिमों को कम करने पर विचार कर सकते हैं।
रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया संकट बड़ी चुनौती
नई दिल्ली में BRICS बैठक ऐसे दौर में हो रही है जब रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी परिस्थितियां भी ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक बाजारों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की व्यापार और टैरिफ नीतियों के प्रभावों ने भी अंतरराष्ट्रीय आर्थिक माहौल को प्रभावित किया है।
खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा पर रहेगा विशेष ध्यान
वैश्विक अस्थिरता के बीच खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा स्थिरता और भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला जैसे मुद्दे BRICS देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गए हैं। भारत इन विषयों पर सहयोग को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। सम्मेलन में विकासशील देशों की जरूरतों और ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में लाने पर भी जोर रहने की संभावना है।
विश्व कल्याण की भावना से आगे बढ़ेगा सम्मेलन
BRICS Summit 2026 भारत के लिए वैश्विक मंच पर अपनी प्राथमिकताओं को सामने रखने का महत्वपूर्ण अवसर है। प्रधानमंत्री मोदी के संदेश में भी सकारात्मक संवाद, सहयोग और विश्व कल्याण की भावना पर जोर दिया गया है। ऐसे समय जब दुनिया कई संघर्षों और आर्थिक चुनौतियों से गुजर रही है, नई दिल्ली में होने वाली यह बैठक सदस्य देशों के बीच सहयोग के नए रास्ते तलाशने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
Read More : Chinmoy Krishna Das: मां का निधन, अंतिम संस्कार के लिए सिर्फ 5 घंटे की पैरोल; बांग्लादेश में उठे सवाल