BRICS Summit 2026 : राजधानी दिल्ली में शनिवार, 12 सितंबर से 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की शुरुआत हो रही है। इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई देशों के शीर्ष नेता एक मंच पर नजर आएंगे। वैश्विक राजनीति और कूटनीति के लिहाज से इस सम्मेलन को काफी अहम माना जा रहा है।
BRICS सम्मेलन में आध्यात्मिक नेताओं की मौजूदगी
शिखर सम्मेलन के बीच भारत की आध्यात्मिक और धार्मिक विविधता को भी सामने रखने की कोशिश की गई है। देश के अलग-अलग हिस्सों से कई धार्मिक नेताओं को कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया है। इसी सिलसिले में अजमेर शरीफ दरगाह के गद्दी नशीन हाजी सैयद सलमान चिश्ती भी दिल्ली पहुंचे। उन्होंने सम्मेलन के दौरान आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे की जरूरत पर जोर दिया।
सलमान चिश्ती ने दिया एकता का संदेश
न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में सलमान चिश्ती ने कहा कि BRICS शिखर सम्मेलन के अवसर पर पूरे भारत से आध्यात्मिक नेताओं को आमंत्रित किया गया है। उन्होंने कहा कि देश में सदियों से एकता और प्रेम का संदेश दिया जाता रहा है। उनके मुताबिक, कश्मीर से कन्याकुमारी तक यही भावना रही है कि सभी लोगों से प्रेम किया जाए और किसी के प्रति नफरत की भावना न रखी जाए।
भारत की धरती से दुनिया को भाईचारे का संदेश
अजमेर शरीफ दरगाह के गद्दी नशीन ने कहा कि भारत की धरती पर दुनिया के विभिन्न हिस्सों से लोगों और नेताओं का एकत्र होना अपने आप में सकारात्मक संदेश है। उन्होंने कहा कि BRICS सम्मेलन के जरिए दुनिया के सामने भारत के उन मूल्यों को भी रखा जा रहा है, जिनमें न्याय, करुणा, दया और एकता को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।
‘अन्याय के लिए कोई जगह नहीं’
सलमान चिश्ती ने कहा कि मौजूदा समय में दुनिया को स्पष्ट संदेश देने की जरूरत है कि अन्याय के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। उन्होंने भारत की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि देश हमेशा न्याय, करुणा, दया और एकता जैसे मूल्यों को महत्व देता आया है। उनके मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इन्हीं मानवीय मूल्यों को आगे बढ़ाने की जरूरत है।
‘पूरी दुनिया एक परिवार है’
सलमान चिश्ती ने अपने संदेश में कहा कि पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखने की भावना मजबूत होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अलग-अलग देशों, समुदायों और संस्कृतियों के लोग मिलकर मानवता की सेवा कर सकते हैं। BRICS जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों को केवल राजनीतिक और आर्थिक बातचीत तक सीमित न रखकर आपसी समझ बढ़ाने का माध्यम भी बनाया जा सकता है।
ईरानी दूतावास ने धार्मिक नेताओं को बुलाया
BRICS सम्मेलन के दौरान ईरानी दूतावास की ओर से भारत के कई धार्मिक नेताओं और बुद्धिजीवियों को भी आमंत्रित किया गया। अजमेर शरीफ दरगाह के अलावा देश की अन्य प्रमुख धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी इसमें हिस्सा लिया। इस पहल को भारत और ईरान के बीच सांस्कृतिक तथा सामाजिक संपर्क बढ़ाने के नजरिए से भी देखा जा रहा है।
ईरानी राष्ट्रपति ने भारतीय प्रतिनिधियों को किया संबोधित
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भारत के धार्मिक नेताओं और बुद्धिजीवियों से संवाद किया। उन्होंने भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेहमाननवाजी की सराहना की। पेजेशकियन ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच अच्छी बातचीत हुई है और उन्हें उम्मीद है कि यह संवाद भविष्य में सहयोग को और मजबूत करेगा।
संस्कृति से टेक्नोलॉजी तक सहयोग की उम्मीद
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और ईरान के बीच बातचीत से संस्कृति, तकनीक, व्यापार, विज्ञान और अर्थव्यवस्था सहित कई क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। उन्होंने आपसी समझ को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। ऐसे में BRICS सम्मेलन राजनीतिक चर्चाओं के साथ-साथ विभिन्न देशों के बीच सांस्कृतिक और मानवीय संवाद का मंच भी बनता दिखाई दे रहा है।
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