BRICS Summit 2026 : दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन की शुरुआत के साथ ही भारत को बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है। सदस्य देशों के बीच लंबे विचार-विमर्श के बाद संयुक्त बयान जारी करने को लेकर सहमति बन गई है। यह समझौता ऐसे समय हुआ है, जब संगठन के भीतर कई अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर देशों के बीच मतभेद सामने आते रहे हैं। इसके बावजूद भारत ने बातचीत का सिलसिला जारी रखते हुए साझा सहमति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
देर रात तक चली गहन बातचीत के बाद बनी सहमति
संयुक्त बयान को अंतिम रूप देने के लिए BRICS सदस्य देशों के बीच देर रात तक लंबी और गहन बातचीत हुई। सूत्रों के मुताबिक, विभिन्न मुद्दों पर चर्चा सुबह करीब चार बजे तक जारी रही। बातचीत के दौरान अलग-अलग देशों के हितों और उनके रुख को ध्यान में रखते हुए भाषा और विषयों पर सहमति बनाने की कोशिश की गई। अब संयुक्त बयान को औपचारिक रूप से जारी करने की तैयारी की जा रही है।
रूस-यूक्रेन युद्ध पर देशों के अलग-अलग विचार
BRICS के भीतर रूस-यूक्रेन युद्ध सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक रहा है। सदस्य देशों का इस संघर्ष को लेकर एक जैसा रुख नहीं है। कुछ देश रूस के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को महत्व देते हैं, जबकि अन्य सदस्य युद्ध और उसके वैश्विक प्रभावों को लेकर अलग दृष्टिकोण रखते हैं। ऐसे में संयुक्त बयान में ऐसी भाषा पर सहमति बनाना चुनौतीपूर्ण था, जो सभी देशों को स्वीकार्य हो।
पश्चिम एशिया संघर्ष ने बढ़ाई कूटनीतिक चुनौती
पश्चिम एशिया में जारी तनाव भी BRICS की बातचीत के दौरान प्रमुख मुद्दा रहा। क्षेत्र में लगातार बदलते घटनाक्रम और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच सदस्य देशों के दृष्टिकोण अलग-अलग रहे हैं। ऐसे माहौल में साझा बयान तैयार करना आसान नहीं था। भारत ने अध्यक्ष देश की भूमिका निभाते हुए बातचीत को आगे बढ़ाया और कोशिश की कि मतभेदों के बावजूद संगठन की सामूहिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।
ईरान, सऊदी अरब और UAE को साथ लाना बड़ी चुनौती
इस वर्ष BRICS में पश्चिम एशिया के तीन महत्वपूर्ण देश ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात भी शामिल हैं। इन देशों के बीच क्षेत्रीय राजनीति, सुरक्षा और रणनीतिक हितों को लेकर अलग-अलग प्राथमिकताएं हैं। पश्चिम एशिया में तनाव के बीच तीनों देशों को एक साझा दस्तावेज पर सहमत कराना भारत के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक चुनौती थी। लगातार बातचीत के जरिए इस चुनौती से निपटने का प्रयास किया गया।
भारत की अध्यक्षता में बनी साझा सहमति
भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। ऐसे में उसकी जिम्मेदारी केवल शिखर सम्मेलन की मेजबानी तक सीमित नहीं रही, बल्कि सदस्य देशों के बीच मतभेदों को संभालना और साझा रास्ता तलाशना भी महत्वपूर्ण रहा। संयुक्त बयान पर सहमति को भारत की सक्रिय कूटनीति का परिणाम माना जा रहा है। भारत ने अलग-अलग दृष्टिकोण रखने वाले देशों के बीच संवाद का रास्ता खुला रखा।
BRICS की एकजुटता के लिए अहम माना जा रहा समझौता
संयुक्त बयान पर सहमति BRICS की एकजुटता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे यह संदेश जाता है कि सदस्य देशों के बीच गंभीर भू-राजनीतिक मतभेद मौजूद होने के बावजूद वे साझा हितों और वैश्विक मुद्दों पर मिलकर आगे बढ़ने की कोशिश कर सकते हैं। भारत की अध्यक्षता में बनी यह सहमति BRICS के भविष्य के एजेंडे और वैश्विक मंच पर उसकी भूमिका के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है।
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