BRICS Summit 2026 : दिल्ली में आयोजित हो रहे BRICS Summit 2026 के बीच भारत को बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिखर सम्मेलन के दौरान नई दिल्ली घोषणापत्र 2026 को अपनाने का प्रस्ताव रखा। खास बात यह रही कि किसी भी सदस्य देश ने प्रस्ताव पर आपत्ति दर्ज नहीं कराई। इसके बाद BRICS के सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से संयुक्त घोषणापत्र को स्वीकार कर लिया। इसे भारत की अध्यक्षता में हुई महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।
सुबह चार बजे तक चली संयुक्त बयान पर बातचीत
सरकारी सूत्रों के अनुसार, संयुक्त घोषणापत्र को अंतिम रूप देने के लिए सदस्य देशों के बीच लंबी बातचीत हुई। विभिन्न संवेदनशील मुद्दों पर सहमति बनाने में काफी समय लगा और चर्चा सुबह करीब चार बजे तक चलती रही। इसके बाद सभी पक्षों के बीच सहमति कायम हो सकी। बातचीत के दौरान भारत ने अलग-अलग देशों के दृष्टिकोण को समझते हुए साझा आधार तलाशने पर जोर दिया।
संवेदनशील मुद्दों पर देशों के अलग-अलग रुख
BRICS के संयुक्त बयान को लेकर सदस्य देशों के बीच कई महत्वपूर्ण और विवादित विषयों पर मतभेद सामने आए थे। अलग-अलग देशों के रणनीतिक हित, क्षेत्रीय प्राथमिकताएं और भू-राजनीतिक परिस्थितियां एक जैसी नहीं हैं। ऐसे में सभी देशों को एक साझा दस्तावेज पर सहमत कराना आसान नहीं था। भारत ने लगातार बातचीत और विचार-विमर्श के माध्यम से इन मतभेदों को कम करने की कोशिश की।
ईरान-सऊदी-यूएई के बीच मतभेद बड़ी चुनौती
भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में पश्चिम एशिया से जुड़े मुद्दे भी शामिल रहे। BRICS में ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश एक ही मंच पर मौजूद हैं, लेकिन क्षेत्रीय और भू-राजनीतिक मामलों पर उनके रुख में अंतर रहा है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और बढ़ते तनाव के बीच इन देशों को एक साझा बयान के लिए तैयार करना भारत के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक परीक्षा थी।
भारत ने बातचीत से निकाला सहमति का रास्ता
भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान सदस्य देशों के बीच संवाद बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया। कई दौर की चर्चाओं में अलग-अलग देशों की चिंताओं और प्राथमिकताओं को समझने का प्रयास किया गया। इसके बाद ऐसे बिंदुओं पर सहमति बनाने की कोशिश हुई, जिन पर अधिकांश सदस्य देश एक साथ आ सकें। इसी प्रक्रिया के परिणामस्वरूप संयुक्त घोषणापत्र को अंतिम मंजूरी मिल पाई।
मतभेदों के बावजूद आगे बढ़ी BRICS प्रक्रिया
संयुक्त घोषणापत्र पर सहमति बनने को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि BRICS में शामिल देशों के बीच कई वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर अलग-अलग विचार हैं। इसके बावजूद संगठन की सर्वसम्मति आधारित प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। यह सहमति दिखाती है कि मतभेदों के बीच भी सदस्य देश साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर साथ काम करने का रास्ता तलाश सकते हैं।
भारत की कूटनीतिक क्षमता की हुई चर्चा
नई दिल्ली घोषणापत्र पर सहमति को भारत की कूटनीतिक क्षमता के उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है। पश्चिम एशिया में तनावपूर्ण परिस्थितियों के बीच अलग-अलग रणनीतिक हित रखने वाले देशों को एक साझा दस्तावेज पर सहमत कराना चुनौतीपूर्ण था। भारत ने संवाद, संतुलन और लगातार विचार-विमर्श के जरिए इस चुनौती का सामना किया।
आज जारी होगा संयुक्त घोषणापत्र
सुबह करीब चार बजे तक चली बातचीत के बाद सदस्य देशों में संयुक्त बयान को लेकर सहमति बनी। अब संयुक्त घोषणापत्र जारी किया जाएगा। भारत के लिए यह उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उसकी अध्यक्षता में BRICS की सर्वसम्मति आधारित निर्णय प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सफलता मिली है। ईरान, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों के अलग-अलग रुख के बावजूद सहमति बनना भारत के लिए एक अहम कूटनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है।
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