BRICS Summit 2026: दिल्ली में आयोजित BRICS Summit 2026 के बीच भारत मंडपम के पास राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय एवं हस्तकला अकादमी परिसर में विशेष हस्तशिल्प बाजार सजाया गया है। इस बाजार में BRICS के सदस्य और साझेदार देशों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को एक मंच पर प्रस्तुत किया गया है। अलग-अलग देशों से आए कारीगर अपनी पारंपरिक कला, शिल्प और रचनात्मक उत्पादों के जरिए अपनी सांस्कृतिक पहचान को दुनिया के सामने रख रहे हैं।
कारीगरों की पारंपरिक कला बनी आकर्षण का केंद्र
हस्तशिल्प बाजार में विभिन्न देशों की सदियों पुरानी कलात्मक परंपराएं लोगों का ध्यान खींच रही हैं। ब्राजील की मिट्टी से कलाकृतियां तैयार करने की परंपरा से लेकर बेलारूस की पारंपरिक विलो वीविंग तक यहां कई अनूठे शिल्प देखने को मिल रहे हैं। बाजार में आने वाले लोगों को इन कलाओं के जरिए अलग-अलग देशों की लोक परंपराओं और जीवनशैली को करीब से समझने का अवसर मिल रहा है।
बेलारूस की विलो वीविंग ने खींचा ध्यान
बेलारूस की विलो वीविंग इस बाजार की खास प्रस्तुतियों में शामिल है। इस पारंपरिक कला में पेड़ों की लचीली और पतली टहनियों को बुनकर विभिन्न वस्तुएं तैयार की जाती हैं। इनमें टोकरियां, फर्नीचर, सजावटी सामान और घरेलू उपयोग की कई चीजें शामिल हैं। यह शिल्प बेलारूस की पुरानी लोक कलाओं में गिना जाता है और वहां की ग्रामीण सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है।
ब्राजील की मिट्टी कला की दिखी झलक
ब्राजील की ओर से शिल्पकार और मूर्तिकार क्लेजियानिया रिबेरो डी लीमा पाइव बाजार में मिट्टी के बर्तन और कलाकृतियां प्रदर्शित कर रही हैं। ब्राजील की मृदा शिल्प परंपरा को अमेरिका की सबसे पुरानी जीवित कलात्मक परंपराओं में से एक बताया जाता है। उनके काम में स्थानीय परंपरा, प्रकृति और रचनात्मकता का सुंदर मेल देखने को मिल रहा है।
कजाख डिजाइन में परंपरा और आधुनिकता का मेल
कजाकिस्तान के कलाकार और आभूषण डिजाइनर सेरिक रिस्बेकोव ने पारंपरिक कजाख कला को आधुनिक डिजाइन के साथ जोड़ा है। उनके उत्पादों में स्थानीय सांस्कृतिक प्रभावों के साथ समकालीन शैली दिखाई देती है। इस तरह उनका काम पुरानी परंपराओं को आधुनिक दौर की पसंद के अनुरूप प्रस्तुत करने का प्रयास करता है।
ईरानी कढ़ाई ने संरक्षित की सांस्कृतिक पहचान
ईरान की कलाकार नादिया करीमी बलूची पारंपरिक कढ़ाई की कला को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रही हैं। बाजार में उनके द्वारा प्रस्तुत शिल्प में पारंपरिक तकनीकों और डिजाइन की झलक मिलती है। उनका प्रयास पुरानी कला को संरक्षित करने के साथ नई पीढ़ी तक पहुंचाने और उसे आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत करने से जुड़ा है।
10 से 15 सितंबर तक चलेगा हस्तशिल्प बाजार
BRICS-2026 की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस बाजार में सदस्य और साझेदार देशों के कारीगरों, डिजाइनरों तथा रचनात्मक उद्यमों के उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। यहां हस्तशिल्प, हथकरघा, वस्त्र, कलाकृतियां और अन्य पारंपरिक उत्पाद मौजूद हैं। यह विशेष बाजार 10 सितंबर से 15 सितंबर तक आयोजित किया जा रहा है।
BRICS सम्मेलन के साथ संस्कृति का संगम
भारत ने 1 जनवरी 2026 को BRICS की अध्यक्षता संभाली थी और इसी वर्ष संगठन की स्थापना के 20 वर्ष भी पूरे हो रहे हैं। ऐसे में हस्तशिल्प बाजार सम्मेलन के आर्थिक और कूटनीतिक पक्ष से आगे बढ़कर सांस्कृतिक संवाद का माध्यम बन रहा है। यह आयोजन सदस्य और साझेदार देशों की कला, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान को एक-दूसरे के करीब लाने का अवसर दे रहा है।
दिल्ली में जुटे कई देशों के शीर्ष नेता
BRICS Summit 2026 का आयोजन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में हो रहा है। सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा समेत कई देशों के नेता हिस्सा ले रहे हैं। ऐसे में हस्तशिल्प बाजार ने इस बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन में संस्कृति और कूटनीति का अनूठा संगम प्रस्तुत किया है।
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