Brent Crude Oil: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष का असर अब लाल सागर और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव और सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमलों ने कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय क्रूड बाजार पर पड़ा है। Brent Crude की कीमत 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जबकि भारत के लिए महत्वपूर्ण Indian Basket में भी कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं।
Indian Basket में क्रूड की कीमत 116 डॉलर तक पहुंची
PPAC के आंकड़ों के अनुसार Indian Basket में कच्चे तेल का भाव बढ़कर 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। सोमवार को ग्लोबल एनर्जी मार्केट ने लाल सागर में बढ़ते तनाव को सप्लाई के लिए बड़ा जोखिम माना। इसके चलते WTI और Brent Crude दोनों की कीमतों में 2 फीसदी से ज्यादा की तेजी देखी गई। पिछले सप्ताह गुरुवार से Indian Basket का भाव लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है।
हूतियों के हमले से सऊदी तेल सप्लाई पर संकट
क्रूड की कीमतों में अचानक आई तेजी के पीछे सऊदी अरब की तेल सप्लाई को लेकर बढ़ी चिंता प्रमुख वजह मानी जा रही है। हूतियों के ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरब की East-West oil pipeline को बंद किया गया है। इस पाइपलाइन के माध्यम से प्रतिदिन करीब 40 लाख बैरल कच्चा तेल Red Sea के Yanbu port तक पहुंचाया जाता है। यदि यह पाइपलाइन लंबे समय तक बंद रहती है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 4 फीसदी हिस्सा प्रभावित हो सकता है।
लाल सागर बना ग्लोबल एनर्जी मार्केट का बड़ा जोखिम
होर्मुज स्ट्रेट के बाद लाल सागर को वैश्विक ऊर्जा कारोबार के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्रों में माना जाता है। यहां मौजूद Bab al-Mandeb एक अहम chokepoint है। यदि हूती इस समुद्री मार्ग को बाधित करते हैं, तो इसका असर केवल लाल सागर तक सीमित नहीं रहेगा। अदन की खाड़ी और आसपास के समुद्री रास्तों पर भी जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है, जिससे वैश्विक क्रूड सप्लाई पर बड़ा दबाव बन सकता है।
सप्लाई बाधित होने पर और महंगा हो सकता है तेल
लाल सागर में संघर्ष बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अस्थिरता और बढ़ने की आशंका है। अगर सऊदी पाइपलाइन लंबे समय तक बंद रहती है या महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर आवाजाही प्रभावित होती है, तो बाजार में उपलब्ध कच्चे तेल की मात्रा पर असर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में सप्लाई की चिंता के कारण Brent और WTI की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।
सितंबर में 104 डॉलर के करीब पहुंचा औसत क्रूड भाव
भारत के लिए स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि Indian Basket की कीमत लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। सितंबर में अब तक Indian Basket का औसत भाव करीब 104.09 डॉलर प्रति बैरल रहा है। वित्त वर्ष 2026-27 में अप्रैल के दौरान इसका औसत भाव 114.48 डॉलर, मई में 106.23 डॉलर, जून में 83.22 डॉलर, जुलाई में 82.04 डॉलर और अगस्त में 90.19 डॉलर प्रति बैरल रहा था।
महंगा क्रूड बढ़ा सकता है पेट्रोल-डीजल का दबाव
कच्चे तेल की कीमत अगर लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती है, तो भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ सकता है। इसका असर घरेलू ईंधन बाजार पर भी देखने को मिल सकता है। खासकर त्योहारी सीजन के दौरान महंगे क्रूड की वजह से पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ सकती है। आने वाले दिनों में लाल सागर की स्थिति और वैश्विक तेल कीमतों की दिशा भारत के लिए बेहद अहम होगी।
त्योहारों से पहले महंगाई की चिंता बढ़ी
भारत में त्योहारी सीजन शुरू होने के साथ ही क्रूड की कीमतों में यह तेजी अर्थव्यवस्था और आम उपभोक्ताओं के लिए चुनौती बन सकती है। महंगा ईंधन परिवहन लागत बढ़ा सकता है, जिसका असर दूसरी वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ने की संभावना रहती है। ऐसे में अमेरिका-ईरान तनाव, हूती गतिविधियों और लाल सागर में समुद्री सुरक्षा पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
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