Richest Ganpati Bappa : आज गणेश चतुर्थी के साथ मुंबई समेत पूरे देश में गणपति उत्सव की शुरुआत हो गई है। जगह-जगह भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं और भक्त बप्पा की पूजा-अर्चना में जुट गए हैं। मुंबई का गणेश उत्सव अपनी भव्यता, परंपराओं और प्रसिद्ध गणपति मंडलों के लिए देशभर में खास पहचान रखता है। यहां लालबागचा राजा से लेकर माटुंगा के GSB गणपति तक भक्तों की आस्था देखने को मिलती है।
703 करोड़ रुपये का लिया गया बीमा
मुंबई के माटुंगा स्थित GSB सेवा मंडल के गणपति को देश के सबसे समृद्ध गणपति मंडलों में शामिल किया जाता है। इस साल मंडल ने गणेश उत्सव के दौरान बप्पा की प्रतिमा, आभूषणों, सजावट और मंडल से जुड़ी अन्य संपत्तियों के लिए करीब 703 करोड़ रुपये का बीमा कवर लिया है। यह बीमा पांच दिवसीय गणेशोत्सव के लिए लिया गया है और इसमें श्रद्धालुओं तथा सेवा में जुटे लोगों से जुड़े जोखिमों को भी शामिल किया गया है।
66 किलो सोने से सजे हैं बप्पा
GSB गणपति की प्रतिमा इस बार करीब 24 फीट ऊंची है। बप्पा को लगभग 66 किलोग्राम शुद्ध सोने के आभूषणों और सोने के सिंहासन से सजाया गया है। इसके अलावा करीब 335 किलोग्राम चांदी का इस्तेमाल श्रृंगार और पंडाल की सजावट में किया गया है। सोने और चांदी से सजी भगवान गणेश की प्रतिमा भक्तों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है।
भक्तों और सेवादारों को भी बीमा सुरक्षा
मंडल की ओर से लिया गया बीमा केवल बप्पा के आभूषणों और संपत्तियों तक सीमित नहीं है। इसमें पंडाल में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के साथ-साथ सेवादारों, रसोइयों, सुरक्षा गार्डों और अन्य कर्मचारियों को भी सुरक्षा कवर दिया गया है। इस तरह करोड़ों रुपये का यह बीमा उत्सव के दौरान संपत्ति और लोगों से जुड़े संभावित जोखिमों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
मुंबई में करीब 2700 सार्वजनिक गणपति मंडल
गणेशोत्सव के दौरान मुंबई में बड़ी संख्या में सार्वजनिक गणपति मंडलों में प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। इस साल शहर में करीब 2,700 सार्वजनिक गणपति मंडलों में भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। लालबागचा राजा अपनी लोकप्रियता के लिए देशभर में प्रसिद्ध हैं, लेकिन माटुंगा के GSB सेवा मंडल की पूजा पद्धति और परंपराएं इसे अन्य मंडलों से अलग पहचान देती हैं।
डीजे नहीं, वैदिक मंत्रों से गूंजता है पंडाल
GSB सेवा मंडल में गणेश उत्सव का माहौल बेहद धार्मिक और पारंपरिक नजर आता है। यहां तेज संगीत या डीजे का शोर नहीं होता। इसके बजाय पूरे पंडाल में वैदिक मंत्रों का जाप और धार्मिक अनुष्ठानों की गूंज सुनाई देती है। मंडप में दो विशेष हवन कुंड बनाए जाते हैं, जहां पांचों दिनों तक 24 घंटे वैदिक ब्राह्मणों द्वारा मंत्रोच्चार के साथ हवन किया जाता है।
हवन और आहुति से जुड़ी है भक्तों की आस्था
GSB गणपति उत्सव में हवन की परंपरा को विशेष महत्व दिया जाता है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि हवन में दी गई आहुति के माध्यम से उनकी प्रार्थनाएं और मनोकामनाएं भगवान गणेश तक पहुंचती हैं। यही वजह है कि बड़ी संख्या में भक्त यहां दर्शन के साथ धार्मिक अनुष्ठानों में भी भाग लेते हैं।
70 साल पुरानी है अनाज दान की परंपरा
GSB सेवा मंडल की एक अनोखी परंपरा करीब 70 साल पुरानी बताई जाती है। मंडप के पास दो विशेष तराजू रखे जाते हैं। जब किसी भक्त की मनोकामना पूरी होती है, तो वह अपने बच्चों को इन तराजुओं में बैठाकर उनके वजन के बराबर चावल, दाल और अन्य अनाज दान करता है। इस अनाज का इस्तेमाल जरूरतमंदों और गरीबों के लिए पूरे साल महाप्रसाद तैयार करने में किया जाता है।
आस्था के साथ सेवा और दान का संदेश
GSB गणपति उत्सव की सबसे खास बात यही है कि यहां भक्ति के साथ सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी को भी महत्व दिया जाता है। करोड़ों रुपये के बीमा, सोने-चांदी के भव्य श्रृंगार और विशाल प्रतिमा के बावजूद मंडल की परंपराओं का केंद्र धार्मिक अनुष्ठान, दान और जरूरतमंदों की सेवा है। यही वजह है कि माटुंगा का यह गणपति मुंबई के सबसे खास और समृद्ध गणपति उत्सवों में अपनी अलग पहचान रखता है।
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