Yogi-Amit Shah Meeting : समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बयान के बाद देश की राजनीति में बहस तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी की ओर से इसे लेकर आगे बढ़ने के संकेत दिए जा रहे हैं, जबकि विपक्षी दलों ने इसके संभावित क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठाए हैं। इसी बीच उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी UCC को लेकर गतिविधियां बढ़ती दिखाई दे रही हैं।
दिल्ली में अमित शाह और योगी आदित्यनाथ की हो सकती है मुलाकात
सूत्रों के मुताबिक, मंगलवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच मुलाकात हो सकती है। दोनों नेताओं की संभावित बैठक दिल्ली के कर्तव्य भवन में होने की बात कही जा रही है। माना जा रहा है कि इस मुलाकात के दौरान उत्तर प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने को लेकर चर्चा हो सकती है।
किशाऊ परियोजना की बैठक के लिए दिल्ली पहुंचेंगे मुख्यमंत्री योगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ किशाऊ परियोजना से जुड़ी बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली आ रहे हैं। इस परियोजना को लेकर संबंधित पक्षों के बीच समझौता ज्ञापन यानी एमओयू पर हस्ताक्षर होने हैं। इसी दौरान गृह मंत्री अमित शाह से उनकी संभावित मुलाकात की चर्चा है। ऐसे में प्रशासनिक बैठक के साथ UCC जैसे महत्वपूर्ण राजनीतिक और संवैधानिक मुद्दे पर बातचीत की संभावना को भी अहम माना जा रहा है।
यूपी विधानसभा चुनाव से पहले UCC पर बन सकती है रणनीति
उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में UCC को लेकर समिति गठित करने, रिपोर्ट तैयार कराने या मसौदा तैयार करने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि यदि प्रक्रिया अभी शुरू होती है, तो भविष्य में राज्य में इसे लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाना आसान हो सकता है। हालांकि, बैठक में वास्तव में क्या चर्चा होगी, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
उत्तराखंड में पहले ही लागू हो चुका है समान नागरिक संहिता
UCC के मामले में उत्तराखंड भाजपा शासित राज्यों के लिए एक प्रमुख उदाहरण बन चुका है। राज्य में फरवरी 2024 में कानून पारित होने के बाद समान नागरिक संहिता लागू की गई। इसके बाद विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और अन्य व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े मामलों में एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करने की दिशा में कदम उठाया गया।
गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में भी प्रक्रिया आगे बढ़ी
उत्तराखंड के अलावा गुजरात, असम और मध्य प्रदेश जैसे भाजपा शासित राज्यों में भी UCC से संबंधित विधायी प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन राज्यों में संबंधित विधेयकों को पारित किए जाने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी और अधिसूचना जैसी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण चरण हैं। इससे संकेत मिलता है कि भाजपा शासित राज्यों में UCC को लेकर गतिविधियां तेज हो रही हैं।
2029 से पहले NDA राज्यों में UCC लागू करने का लक्ष्य
अमित शाह ने कहा है कि 2029 से पहले NDA शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। उनका यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2029 में लोकसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में UCC को भाजपा और NDA के बड़े राजनीतिक एजेंडे के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि अलग-अलग राज्यों में इसकी प्रक्रिया और समयसीमा अलग हो सकती है।
कांग्रेस और सपा समेत विपक्षी दलों ने किया विरोध
अमित शाह के बयान के बाद कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और इंडिया ब्लॉक से जुड़े कई राजनीतिक दलों ने UCC को लेकर विरोध दर्ज कराया है। विपक्षी दलों का तर्क है कि समान नागरिक संहिता लागू करने से पहले इसके सामाजिक, कानूनी और संवैधानिक प्रभावों पर व्यापक चर्चा जरूरी है। दूसरी ओर भाजपा इसे समान अधिकार और समान कानून की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में पेश करती रही है।
यूपी में UCC को लेकर अगला कदम क्या होगा
अमित शाह और योगी आदित्यनाथ की संभावित बैठक ने उत्तर प्रदेश में UCC को लेकर अटकलों को और तेज कर दिया है। यदि राज्य सरकार इस दिशा में समिति या मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू करती है, तो 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। फिलहाल सभी की नजरें सरकार के अगले कदम और आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं।
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