UPI Charges : ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर चार्ज लगाए जाने की खबरों के बीच सरकार ने अब स्थिति स्पष्ट कर दी है। 14 सितंबर 2026 को जारी अधिसूचना में सरकार ने अलग-अलग तरह के UPI ट्रांजैक्शन के लिए MDR यानी Merchant Discount Rate का ढांचा बताया है। इसके मुताबिक व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P भुगतान पर किसी भी राशि के लिए कोई चार्ज नहीं लगेगा। वहीं, ₹2,000 से अधिक के कुछ मर्चेंट भुगतान पर निर्धारित MDR लागू होगा।
P2P UPI ट्रांजैक्शन पर नहीं लगेगा कोई शुल्क
सरकार के नए प्रावधानों के तहत व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI ट्रांजैक्शन पूरी तरह मुफ्त रहेगा। इसका मतलब है कि कोई व्यक्ति UPI के जरिए दूसरे व्यक्ति को ₹500, ₹2,000, ₹10,000 या ₹1 लाख भेजता है, तो उस भुगतान पर कोई MDR नहीं लगाया जाएगा। सरकार के अनुसार P2P ट्रांजैक्शन UPI के कुल वॉल्यूम का लगभग 37 प्रतिशत और कुल वैल्यू का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा हैं।
Payment and Settlement Systems Act में बदलाव
सरकार ने डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जुड़े नियमों में बदलाव के लिए Payment and Settlement Systems (PSS) Act, 2007 में संशोधन किया है। इसके तहत इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड पर शुल्क निर्धारित करने का अधिकार सरकार को मिला है। नए ढांचे में ₹2,000 तक के UPI ट्रांजैक्शन पर MDR शून्य रखा गया है, जबकि कुछ बड़े मर्चेंट भुगतान के लिए अलग दरें तय की गई हैं।
₹2,000 से अधिक मर्चेंट पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत MDR
नए नियमों में Person-to-Merchant यानी P2M ट्रांजैक्शन पर विशेष प्रावधान किया गया है। ₹2,000 से अधिक के सामान्य मर्चेंट UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। उदाहरण के तौर पर यदि कोई व्यक्ति किसी व्यापारी को ₹10,000 का भुगतान करता है, तो निर्धारित MDR ₹40 होगा। यह शुल्क पेमेंट सिस्टम में शामिल बैंकों, ऐप प्रोवाइडर्स और अन्य संबंधित भागीदारों के बीच बांटा जाएगा।
बड़े भुगतान पर MDR की अधिकतम सीमा तय
सरकार ने बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन के लिए MDR की अधिकतम सीमा भी तय की है। ₹75,000 या उससे अधिक के भुगतान पर MDR प्रति ट्रांजैक्शन अधिकतम ₹300 तक सीमित रहेगा। इसका उद्देश्य बड़े डिजिटल भुगतानों पर शुल्क को एक निर्धारित सीमा के भीतर रखना है, ताकि कारोबारियों और पेमेंट सिस्टम से जुड़े पक्षों के लिए व्यवस्था स्पष्ट बनी रहे।
जरूरी सेक्टर के लिए सिर्फ ₹5 फ्लैट MDR
रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और कृषि इनपुट जैसे जरूरी क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट UPI भुगतान पर ₹5 का फ्लैट MDR लागू होगा। इन क्षेत्रों की UPI P2M वॉल्यूम में करीब 17 प्रतिशत और मर्चेंट ट्रांजैक्शन वैल्यू में लगभग 46 प्रतिशत हिस्सेदारी बताई गई है। वहीं, म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉक ब्रोकर और डीलर से जुड़े भुगतानों पर 0.02 प्रतिशत MDR लागू होगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 होगी।

छोटे व्यापारियों को MDR से राहत जारी
सरकार ने छोटे कारोबारियों को राहत देने का भी प्रावधान रखा है। ₹1 लाख तक की मासिक UPI QR रिसीट वाले छोटे व्यापारियों को P2PM कैटेगरी के तहत सभी पात्र ट्रांजैक्शन पर शून्य MDR का लाभ मिलता रहेगा। सरकार का अनुमान है कि MDR के नए प्रावधान से कुल मर्चेंट ट्रांजैक्शन में केवल करीब 4 प्रतिशत भुगतान प्रभावित होंगे।
ग्राहकों पर अतिरिक्त चार्ज लगाने की अनुमति नहीं
नए नियमों के तहत UPI ऐप प्रोवाइडर्स को प्लेटफॉर्म फीस या किसी छिपे हुए अतिरिक्त शुल्क को लागू करने की अनुमति नहीं होगी। बैंकों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि मर्चेंट पर लगने वाला MDR किसी ग्राहक से UPI भुगतान के नाम पर वसूल न किया जाए। यानी सामान्य यूजर से इस शुल्क की सीधी वसूली नहीं की जा सकेगी।
UPI यूजर्स पर मासिक कोटा नहीं होगा
व्यक्तिगत यूजर्स के लिए UPI इस्तेमाल पर किसी तरह का मासिक कोटा या सामान्य ट्रांजैक्शन लिमिट लागू नहीं होगी। हालांकि, बैंक और NPCI द्वारा ₹1 लाख से ₹5 लाख तक की दैनिक भुगतान सीमा कुछ मामलों में लागू रह सकती है। सरकार के मुताबिक ये सीमाएं शुल्क वसूली के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा और जोखिम प्रबंधन के उद्देश्य से निर्धारित की जाती हैं।
छोटे कारोबारियों के लिए बनेगा डेडिकेटेड फंड
डिजिटल भुगतान को छोटे व्यापारियों के बीच और बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एक समर्पित फंड बनाने का भी प्रावधान किया है। इसमें कुल MDR कलेक्शन का 5 प्रतिशत योगदान दिया जाएगा। इस फंड का उद्देश्य छोटे कारोबारियों को डिजिटल भुगतान अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना और UPI के इस्तेमाल को व्यापक बनाना है।
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