Hot Tea Coffee Risk : भारत में चाय और कॉफी पीने वालों की संख्या काफी ज्यादा है। कई लोग दिन में कई बार चाय या कॉफी पीना पसंद करते हैं और कुछ लोग इसे बेहद गर्म अवस्था में ही पीते हैं। लेकिन बहुत गर्म पेय पदार्थों का लगातार सेवन स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय हो सकता है। एक अध्ययन में बहुत गर्म चाय, कॉफी और अन्य पेय पदार्थों को ग्रासनली यानी एसोफैगस कैंसर के बढ़े हुए जोखिम से जोड़ा गया है।
बहुत गर्म पेय से कैंसर का जोखिम बढ़ने का दावा
‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ कैंसर’ में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, बहुत गर्म पेय पदार्थों का नियमित सेवन ग्रासनली के स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा यानी एससीसी के खतरे से जुड़ा पाया गया। अध्ययन में करीब 10 लाख लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने खास तौर पर ग्रासनली के स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा पर ध्यान दिया, जो दुनिया में इस कैंसर के प्रमुख प्रकारों में शामिल है।
क्या होती है ग्रासनली और क्यों है महत्वपूर्ण
ग्रासनली शरीर की वह मांसपेशीय नली है जो मुंह से भोजन और पेय पदार्थों को पेट तक पहुंचाती है। इस हिस्से में होने वाला कैंसर गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की कैंसर एजेंसी इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर यानी आईएआरसी के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2020 में दुनियाभर में ग्रासनली कैंसर के करीब 6.04 लाख नए मामले सामने आए थे और लगभग 5.44 लाख लोगों की मौत हुई थी।
2040 तक बढ़ सकते हैं एसोफैगस कैंसर के मामले
आईएआरसी के अनुमान के मुताबिक आने वाले वर्षों में दुनियाभर में ग्रासनली कैंसर के मामलों में और वृद्धि हो सकती है। एजेंसी ने 2040 तक वैश्विक मामलों में 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी का अनुमान जताया है। ऐसे में बीमारी से जुड़े संभावित जोखिम कारकों को समझना और जीवनशैली में जरूरी सावधानी बरतना महत्वपूर्ण माना जाता है।
दिन में छह या उससे ज्यादा गर्म पेय पर अध्ययन
रिसर्च में शामिल लोगों से उनके रोजाना गर्म पेय पदार्थों के सेवन के बारे में जानकारी ली गई। प्रतिभागियों को दो समूहों में बांटकर उनसे पूछा गया कि वे प्रतिदिन छह से कम गर्म पेय लेते हैं या छह अथवा उससे अधिक। इसके साथ ही लोगों से यह भी पूछा गया कि उन्हें पेय गर्म, बहुत गर्म या गुनगुना किस तापमान पर पसंद है।
बहुत गर्म पेय पसंद करने वालों में जोखिम ज्यादा
अध्ययन में करीब आधे प्रतिभागियों ने बताया कि वे रोजाना छह या उससे अधिक गर्म पेय पदार्थों का सेवन करते हैं। वहीं लगभग 15 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें पेय पदार्थ बहुत गर्म पसंद हैं। शोधकर्ताओं के विश्लेषण में पेय पदार्थ के तापमान और ग्रासनली के एससीसी के जोखिम के बीच संबंध सामने आया।
बहुत गर्म पेय से जोखिम तीन गुना से ज्यादा
अध्ययन के मुताबिक, जिन लोगों को गर्म पेय पसंद थे, उनमें गुनगुने पेय पसंद करने वालों की तुलना में ग्रासनली एससीसी का जोखिम लगभग दोगुना पाया गया। वहीं बहुत गर्म पेय पसंद करने वाले लोगों में यह जोखिम तीन गुना से भी अधिक था। हालांकि, इस तरह के अध्ययन में संबंध पाया जाना यह साबित नहीं करता कि केवल गर्म चाय या कॉफी ही कैंसर का कारण है।
रोज छह या अधिक गर्म पेय से भी जुड़ा बढ़ा जोखिम
शोधकर्ताओं ने पेय पदार्थों के तापमान के साथ उनकी मात्रा को भी ध्यान में रखा। विश्लेषण के अनुसार, रोजाना छह या उससे अधिक गर्म पेय पीने वालों में छह से कम गर्म पेय लेने वालों की तुलना में ग्रासनली एससीसी का जोखिम 71 प्रतिशत अधिक पाया गया।
चाय-कॉफी गुनगुनी पीना हो सकता है बेहतर विकल्प
रिसर्च के निष्कर्षों के आधार पर विशेषज्ञों ने बहुत गर्म पेय पदार्थों से बचने और चाय-कॉफी को कुछ ठंडा या गुनगुना होने के बाद पीने की सलाह दी है। खास तौर पर बार-बार बहुत गर्म पेय पीने की आदत को कम करना एक व्यावहारिक सावधानी हो सकती है। हालांकि कैंसर का जोखिम कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है, इसलिए किसी भी स्वास्थ्य चिंता या लगातार लक्षण होने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
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