Wild Almond : बादाम को सेहत के लिए उपयोगी ड्राई फ्रूट माना जाता है। लोग इसे भिगोकर, मिठाइयों में मिलाकर या अलग-अलग व्यंजनों में शामिल करके खाते हैं। हालांकि, सामान्य बादाम के अलावा एक जंगली बादाम भी पाया जाता है, जिसका इस्तेमाल पारंपरिक आयुर्वेदिक उपचारों में किया जाता है। यह समुद्र तटीय क्षेत्रों में ऊंचाई वाले स्थानों पर पाया जाता है। इसका फल सामान्य बादाम से अलग आकार का होता है।
चपटा और अंडाकार होता है जंगली बादाम का फल
जंगली बादाम के फल का आकार थोड़ा चपटा, नुकीला और अंडाकार बताया जाता है। इसके किनारों पर लाल और बैंगनी रंग दिखाई दे सकता है। प्रत्येक फल में एक बीज होता है। मौसम के अनुसार इस पेड़ पर फूल और फल आते हैं। आयुर्वेदिक परंपरा में इसके केवल बीज ही नहीं, बल्कि पत्तियों, छाल और कच्चे फलों का भी अलग-अलग तरीके से इस्तेमाल किया जाता है।
आयुर्वेद में बताए गए हैं कई पारंपरिक उपयोग
आचार्य बालकृष्ण के अनुसार, जंगली बादाम का इस्तेमाल विभिन्न आयुर्वेदिक उपचारों और औषधीय प्रयोगों में किया जाता है। आयुर्वेद में इसे अम्ल, मधुर और कषाय रस वाला, शीत प्रकृति तथा पित्तशामक माना गया है। इसे खास तौर पर कुछ पारंपरिक उपचारों में उपयोगी बताया जाता है। हालांकि, किसी बीमारी के इलाज के लिए इसका इस्तेमाल विशेषज्ञ की सलाह से ही करना उचित है।
सिरदर्द में जंगली बादाम का पारंपरिक प्रयोग
आयुर्वेदिक उपयोगों में जंगली बादाम की पत्तियों का भी उल्लेख मिलता है। पारंपरिक तौर पर इसकी पत्तियों का रस निकालकर इस्तेमाल करने की बात कही जाती है। कुछ जगहों पर पत्तियों के रस की थोड़ी मात्रा नाक में डालने या उसे पीने का उल्लेख मिलता है। इसके अलावा बादाम की गिरी को सरसों के तेल के साथ पीसकर सिर पर लगाने की पारंपरिक विधि भी बताई जाती है।
दस्त और पेट की परेशानी में उपयोग
जंगली बादाम की पत्तियों और छाल में टैनिन पाए जाने का उल्लेख किया जाता है। पारंपरिक चिकित्सा में इन्हें दस्त जैसी समस्या में इस्तेमाल किया जाता रहा है। पेट दर्द की स्थिति में भी इसकी पत्तियों के रस में काला नमक मिलाकर सेवन करने की विधि बताई जाती है। हालांकि दस्त के दौरान शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट की कमी हो सकती है, इसलिए गंभीर या लगातार समस्या में डॉक्टर से संपर्क जरूरी है।
गठिया और जोड़ों के दर्द में पत्तियों का इस्तेमाल
उम्र बढ़ने के साथ जोड़ों में दर्द और अकड़न जैसी समस्याएं आम हो सकती हैं। पारंपरिक आयुर्वेदिक उपयोग में जंगली बादाम की पत्तियों को पीसकर प्रभावित जोड़ों पर लगाने का उल्लेख मिलता है। इसे गठिया के कारण होने वाले दर्द में राहत देने वाला माना जाता है। हालांकि, लगातार जोड़ों के दर्द का कारण जानने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
बुखार में छाल के काढ़े का उल्लेख
जंगली बादाम के तने की छाल का काढ़ा बनाकर पीने का इस्तेमाल भी कुछ पारंपरिक उपचारों में बताया जाता है। इसे बुखार में राहत के लिए उपयोग किए जाने का उल्लेख मिलता है। लेकिन बुखार कई अलग-अलग कारणों से हो सकता है। इसलिए केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय लंबे समय तक बुखार रहने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
जंगली बादाम का इस्तेमाल विशेषज्ञ की सलाह से करें
आयुर्वेद के अनुसार जंगली बादाम के पेड़ की छाल, पत्तियां, बीज और फल अलग-अलग तरीकों से उपयोग किए जाते हैं। हालांकि, इसकी सही मात्रा, सेवन की विधि और उपयुक्तता व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर कर सकती है। इसलिए किसी बीमारी के इलाज के लिए जंगली बादाम का इस्तेमाल खुद से शुरू करने के बजाय योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लेना बेहतर है। यह जानकारी पारंपरिक उपयोगों पर आधारित है और चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है।
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