Wildlife News : न्यूजीलैंड में आज ऑस्ट्रेलियन ब्रशटेल पॉसम पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। करीब दो सदी पहले इन्हें आर्थिक फायदे की उम्मीद में देश में लाया गया था। 1837 में न्यूजीलैंड में पॉसम को इस उद्देश्य से पहुंचाया गया कि इनके फर से कारोबार विकसित होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। हालांकि, समय के साथ यह प्रयोग उलटा पड़ गया और पॉसम देश की सबसे बड़ी बाहरी कीट प्रजातियों में शामिल हो गए।
जंगलों और देशी पेड़-पौधों को पहुंचा रहे भारी नुकसान
न्यूजीलैंड के संरक्षण विभाग के मुताबिक, पॉसम देशी वनस्पतियों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाते हैं। वे पेड़ों की पत्तियां, फूल, फल और छाल खाते हैं। दक्षिणी द्वीप के एक जंगल से सामने आई हवाई तस्वीरों ने इस नुकसान की गंभीरता को उजागर किया है। कमजोर पेड़ों में करीब आधे पेड़ पॉसम के कारण प्रभावित पाए गए हैं। पत्तियां लगातार खाए जाने से पेड़ों की ऊपरी परत यानी कैनोपी कमजोर हो जाती है।
19वीं सदी में अलग-अलग इलाकों में बढ़ाई गई पॉसम की संख्या
फर व्यापार को बढ़ावा देने के लिए पॉसम को बाद में न्यूजीलैंड के कई हिस्सों में छोड़ा गया। निजी संचालकों और अनुकूलन समितियों ने भी इन्हें अलग-अलग इलाकों में पहुंचाया। उस समय इस बात का पर्याप्त अनुमान नहीं था कि पॉसम कितनी तेजी से अपनी संख्या बढ़ा सकते हैं और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र इनके दबाव का सामना कितना कर पाएगा।
न्यूजीलैंड के जंगल बाहरी स्तनधारियों से अनजान थे
न्यूजीलैंड का पारिस्थितिक विकास चूहे, स्टोट और पॉसम जैसे जमीनी स्तनधारी जीवों की मौजूदगी के बिना हुआ था। यहां कई पक्षी, कीड़े और सरीसृप ऐसी भूमिकाएं निभाते थे, जो दूसरे देशों में स्तनधारी जीव निभाते हैं। इसलिए देशी पौधों और जीवों के पास रात में पेड़ों पर चढ़कर पत्तियां खाने वाले बड़े जीवों से निपटने का लंबा प्राकृतिक अनुभव नहीं था।
फर कारोबार उम्मीद के मुताबिक नहीं चला, पॉसम तेजी से फैल गए
पॉसम से जिस बड़े फर उद्योग की उम्मीद की गई थी, वह अपेक्षाओं के अनुरूप विकसित नहीं हो सका। लेकिन तब तक ये जीव न्यूजीलैंड के जंगलों, खेतों और शहरों के आसपास के क्षेत्रों में फैल चुके थे। भरपूर भोजन और प्राकृतिक नियंत्रण की कमी ने इनके विस्तार को और बढ़ावा दिया। आज ये देश के अधिकांश हिस्सों में पाए जाते हैं और स्थानीय जैव-विविधता के लिए चुनौती बने हुए हैं।
पक्षियों और दूसरे स्थानीय जीवों के भोजन पर भी असर
पॉसम केवल पेड़ों को नुकसान नहीं पहुंचाते, बल्कि स्थानीय जीवों के भोजन और आवास को भी प्रभावित करते हैं। वे फूल और फल खाकर पक्षियों तथा कीड़ों के लिए उपलब्ध भोजन कम कर सकते हैं। केरेरू, तुई और बेलबर्ड जैसी देशी पक्षी प्रजातियां पेड़ों से मिलने वाले फल और अमृत पर निर्भर रहती हैं। पेड़ों के कमजोर होने से उनके आवास पर भी असर पड़ सकता है।
खेती और पशुओं के लिए भी पॉसम चिंता का कारण
पॉसम स्थानीय प्रजातियों से भोजन के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं और कुछ परिस्थितियों में अंडे या छोटे पक्षियों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा इनमें बोवाइन ट्यूबरकुलोसिस जैसी बीमारी हो सकती है, जो मवेशियों को प्रभावित कर सकती है। इस वजह से पॉसम से जुड़ी समस्या केवल वन्यजीव संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि और अर्थव्यवस्था से भी जुड़ी है।
पॉसम नियंत्रण के लिए कई तरीकों का इस्तेमाल
न्यूजीलैंड में पॉसम की संख्या नियंत्रित करने के लिए ट्रैपिंग, शूटिंग, जहरीले चारे और बेट स्टेशन जैसे अलग-अलग उपाय अपनाए जाते हैं। बड़े क्षेत्रों में हवाई माध्यम से जहरीला चारा फैलाने के साथ जमीन पर निगरानी और नियंत्रण अभियान भी चलाए जाते हैं। हालांकि, हर इलाके के लिए एक ही तरीका प्रभावी नहीं होता।
नियंत्रण के बाद दोबारा बढ़ सकती है पॉसम की आबादी
घने जंगलों में ट्रैपिंग कठिन और दूरदराज क्षेत्रों में अभियान महंगा हो सकता है। जहरीले चारे से बड़े क्षेत्र में संख्या कम की जा सकती है, लेकिन इसके लिए पालतू जानवरों और अन्य गैर-लक्षित जीवों की सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी होता है। नियंत्रण अभियान के बाद लगातार निगरानी भी आवश्यक है, क्योंकि बचे हुए पॉसम प्रजनन कर सकते हैं या आसपास की आबादी दोबारा खाली क्षेत्रों में पहुंच सकती है।
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