Manoj Jarange Patil : महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे मनोज जरांगे पाटील ने 17 सितंबर को अपनी करीब 20 दिन लंबी भूख हड़ताल खत्म कर दी। बीड जिले के पाटोदा में मंत्रियों और अधिकारियों के साथ बैठक के बाद उन्होंने सरकार को अपनी मांगों पर कार्रवाई के लिए 90 दिनों का समय दिया। इसके साथ ही मुंबई की ओर प्रस्तावित मार्च को फिलहाल टालने का निर्णय लिया गया।
बिगड़ती सेहत के बीच सरकार से हुई अहम बातचीत
जरांगे पाटील की लंबी भूख हड़ताल के दौरान उनकी तबीयत को लेकर भी चिंता जताई गई थी। चिकित्सकों ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए अस्पताल में इलाज की सलाह दी थी। इसी बीच सरकार और जरांगे के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत तेज हुई और कई मांगों पर आश्वासन देने की बात सामने आई। इसके बाद आंदोलन को अस्थायी रूप से रोकने का रास्ता बना।
पाटोदा में मंत्रियों और अधिकारियों के साथ बैठक
बीड जिले के पाटोदा में हुई बैठक में मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील, दादा भुसे, विधायक प्रसाद लाड, विधायक सुरेश धस और बीड के जिला कलेक्टर सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। बैठक का केंद्र मराठा समुदाय से जुड़ी आरक्षण मांगों, पुराने गजट दस्तावेजों और कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को लेकर था।
58 लाख रिकॉर्ड को लेकर जरांगे की मांग
बैठक के बाद जरांगे पाटील ने कहा कि शिंदे समिति द्वारा खोजे गए 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड में किसी तरह की कमी नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने इन रिकॉर्ड के आधार पर प्रमाणपत्र जारी करने और उनकी वैधता सुनिश्चित करने के लिए समयबद्ध कार्यक्रम की मांग रखी। उनका कहना है कि रिकॉर्ड की जांच और खोज की प्रक्रिया में उनके लोगों को भी शामिल किया जा सकता है।
सातारा और कोल्हापुर गजट पर सरकार का आश्वासन
सरकार की ओर से सातारा और कोल्हापुर समेत संबंधित गजट के आधार पर आगे की प्रक्रिया के लिए तीन महीने के भीतर शासनादेश जारी करने का आश्वासन दिया गया। इसके अलावा हैदराबाद गजट के आधार पर कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए संशोधित जीआर लाने की बात कही गई। प्रमाणपत्रों की वैधता से जुड़े मामलों में भी प्रक्रिया जारी रखने का आश्वासन दिया गया।
हैदराबाद गजट पर संशोधन की मांग
जरांगे पाटील ने हैदराबाद गजट में दर्ज रिकॉर्ड के आधार पर कुनबी प्रमाणपत्र और उनकी वैधता देने की मांग दोहराई। उन्होंने संबंधित जीआर में संशोधन की मांग के साथ मराठा और कुनबी को एक ही मानने से जुड़ा शासनादेश जारी करने की बात भी रखी। उनका तर्क है कि ऐतिहासिक दस्तावेजों में दर्ज सामाजिक पहचान को प्रशासनिक प्रक्रिया में ध्यान में रखा जाना चाहिए।
सरकार ने रिपोर्ट के अध्ययन के लिए मांगा समय
मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील के मुताबिक सातारा गजट से संबंधित रिपोर्ट करीब 1100 पन्नों की है और उसका अध्ययन करने के बाद कार्रवाई के लिए तीन से चार महीने का समय आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि हैदराबाद गजट से जुड़ा मामला अदालत में लंबित है, लेकिन सरकार शासनादेश पर रोक नहीं लगे, इसके लिए कानूनी स्थिति को ध्यान में रखकर आगे बढ़ेगी।
मुंबई मार्च फिलहाल टला, आगे सरकार की कार्रवाई अहम
जरांगे पाटील ने सरकार को 90 दिन का समय देकर फिलहाल मुंबई मार्च टाल दिया है। इससे पहले उन्होंने 19 सितंबर से मुंबई के आजाद मैदान में आंदोलन करने की घोषणा की थी। पुलिस ने उस प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी, जबकि जरांगे ने आंदोलन जारी रखने की बात कही थी।
आरक्षण मुद्दे पर अगले तीन महीने महत्वपूर्ण
मौजूदा समझौते के बाद अब सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों के क्रियान्वयन पर नजर रहेगी। जरांगे पाटील की मुख्य मांगों में पुराने रिकॉर्ड के आधार पर कुनबी प्रमाणपत्र, गजट संबंधी फैसलों का कार्यान्वयन और प्रमाणपत्रों की वैधता से जुड़ी प्रक्रिया शामिल है। सरकार और आंदोलन पक्ष के बीच अगले 90 दिनों में होने वाली कार्रवाई इस मुद्दे की अगली दिशा तय करेगी।
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