MS Subbulakshmi: कौन थीं महान गायिका, जिनका गाना सुन भावुक हुईं निर्मला सीतारमण; छलक पड़े आंसू

एमएस सुब्बुलक्ष्मी की 110वीं जयंती पर बेंगलुरु में आयोजित कार्यक्रम में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भावुक हो गईं। उनकी संगीत विरासत को याद करते हुए सुब्बुलक्ष्मी का गीत सुनाया गया, जिसे सुनकर सीतारमण की आंखों से आंसू छलक पड़े। जानिए कौन थीं यह महान गायिका और उनकी आवाज इतनी खास क्यों मानी जाती है।

MS Subbulakshmi : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बुधवार को बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भावुक हो गईं। यह कार्यक्रम कर्नाटक संगीत की महान गायिका एमएस सुब्बुलक्ष्मी की 110वीं जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में उनकी संगीत साधना, कला और भारतीय शास्त्रीय संगीत में दिए गए योगदान को याद किया गया। इसी दौरान जब एमएस सुब्बुलक्ष्मी का प्रसिद्ध गीत बजाया गया तो वित्त मंत्री भावुक नजर आईं।

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गीत सुनते हुए निर्मला सीतारमण की आंखों से छलके आंसू

कार्यक्रम से सामने आए वीडियो में निर्मला सीतारमण ध्यानपूर्वक एमएस सुब्बुलक्ष्मी का गीत सुनती दिखाई दे रही हैं। वह गीत के साथ धीरे-धीरे गुनगुनाती भी नजर आती हैं। कुछ ही देर बाद उनकी आंखों में आंसू दिखाई देने लगे। इस भावुक क्षण ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान खींचा। वित्त मंत्री ने गायिका की कला और उनकी वर्षों की साधना को याद किया।

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कर्नाटक संगीत में भक्ति को बताया महत्वपूर्ण आधार

निर्मला सीतारमण ने एमएस सुब्बुलक्ष्मी के योगदान का उल्लेख करते हुए कर्नाटक संगीत की विशेषताओं पर भी बात की। उन्होंने कहा कि कर्नाटक संगीत में भक्ति उसकी जीवंत आत्मा है। अलग-अलग भाषाओं और आध्यात्मिक परंपराओं का मेल इस संगीत को विशिष्ट बनाता है। उनके अनुसार, एमएस सुब्बुलक्ष्मी ने अपनी गायकी के माध्यम से इस परंपरा को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मदुरै में हुआ था एमएस सुब्बुलक्ष्मी का जन्म

एमएस सुब्बुलक्ष्मी का पूरा नाम मदुरै षण्मुखवडिवु सुब्बुलक्ष्मी था। उनका जन्म 16 सितंबर 1916 को तमिलनाडु के मदुरै में हुआ था। वह संगीत से जुड़े परिवार में पली-बढ़ीं और बचपन से ही कर्नाटक संगीत का प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया था। अपनी प्रतिभा, अनुशासन और लगातार अभ्यास के कारण उन्होंने कम उम्र में ही संगीत की दुनिया में पहचान बना ली थी।

कर्नाटक संगीत को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया

20वीं सदी में भारतीय शास्त्रीय संगीत, विशेष रूप से कर्नाटक संगीत के क्षेत्र में एमएस सुब्बुलक्ष्मी का नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है। उनकी आवाज में शास्त्रीय संगीत और भक्ति का अनूठा संगम सुनने को मिलता था। इसी विशेषता ने उन्हें भारत के अलावा विदेशों में भी पहचान दिलाई। वर्ष 1966 में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्तुति दी, जिसे भारतीय संगीत के अंतरराष्ट्रीय प्रसार से जुड़े महत्वपूर्ण अवसरों में गिना जाता है।

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भारत रत्न पाने वाली पहली संगीतकार बनीं

एमएस सुब्बुलक्ष्मी को संगीत के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। वर्ष 1998 में उन्हें यह सम्मान मिला और वह भारत रत्न प्राप्त करने वाली पहली संगीतकार बनीं। इससे पहले वर्ष 1974 में उन्हें रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। वह यह पुरस्कार पाने वाली पहली भारतीय संगीतकार थीं।

भक्ति संगीत को अपनी गायकी से मिली नई पहचान

एमएस सुब्बुलक्ष्मी ने तमिल के अलावा संस्कृत और कई अन्य भारतीय भाषाओं में भी रचनाएं प्रस्तुत कीं। उनकी गायकी में भक्ति संगीत का विशेष स्थान रहा। उनके द्वारा प्रस्तुत कई भजन और आध्यात्मिक रचनाएं आज भी लोकप्रिय हैं। निर्मला सीतारमण ने उनके अनुशासन और साधना का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी प्रतिभा के पीछे गहन बौद्धिक अनुशासन और वर्षों की मेहनत थी।

संयुक्त राष्ट्र ने जारी किया था डाक टिकट

एमएस सुब्बुलक्ष्मी ने भारतीय शास्त्रीय संगीत को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला। वर्ष 2016 में उनकी स्मृति और योगदान के सम्मान में संयुक्त राष्ट्र ने डाक टिकट जारी किया था। उनकी प्रस्तुतियों ने भारतीय संगीत, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने में भूमिका निभाई।

88 वर्ष की उम्र में चेन्नई में हुआ निधन

महान गायिका एमएस सुब्बुलक्ष्मी का निधन 11 दिसंबर 2004 को चेन्नई में हुआ था। वह 88 वर्ष की थीं। उनके निधन के बाद भी उनकी रिकॉर्डिंग, भजन और शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियां लगातार सुनी जाती रही हैं। उनकी आवाज भारतीय सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है और नई पीढ़ियां भी उनके संगीत से जुड़ रही हैं।

अब बड़े पर्दे पर दिखाई जाएगी उनकी संगीत यात्रा

एमएस सुब्बुलक्ष्मी के जीवन और संगीत यात्रा को बड़े पर्दे पर पेश करने की तैयारी भी चल रही है। आगामी पैन-इंडियन बायोपिक ‘एमएस ए लेगेसी ऑन स्क्रीन’ में अभिनेत्री रश्मिका मंदाना महान गायिका की भूमिका निभाती नजर आएंगी। फिल्म के संगीत की जिम्मेदारी अनिरुद्ध रविचंदर संभाल रहे हैं। इस फिल्म के जरिए नई पीढ़ी को एमएस सुब्बुलक्ष्मी के जीवन, साधना और संगीत विरासत से परिचित कराने का प्रयास किया जाएगा।

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